– जाति प्रमाण पत्र बनाने की मांग, धाणका समाज के लोगों का 11 वें दिन धरना जारी
हनुमानगढ़। धाणका समाज जनजाति संघर्ष समिति, जिला हनुमानगढ़ के नेतृत्व में शुरू हुआ अनिश्चितकालीन धरना गुरूवार को ग्यारहवें दिन भी जारी रहा। धरने पर बैठे समाज के लोगों ने सरकार के विरूद्ध नारेबाजी कर विरोध दर्ज करवाया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को शीघ्र नहीं माना गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। वक्ताओं ने कहा कि धाणका समाज की मांग पूरी तरह से उचित है, लेकिन सरकार और प्रशासन लगातार इसे अनसुना कर रहा है। इससे समाज के लोगों में भारी रोष व्याप्त है। समाज के युवा प्रतियोगी परीक्षाओं का पास करने के बाद भी जाति प्रमाण पत्र के अभाव में बेरोजगार बैठे है। धरने पर वक्ताओं ने कहा कि धाणका समाज को अनुसूचित जनजाति वर्ग में शामिल किए जाने का प्रावधान पहले से है। वर्ष 1976 की गजट अधिसूचना में धाणका जाति को अनुसूचित जनजाति में शामिल किया गया है। लेकिन स्थानीय प्रशासन व्यवहार में धानका को अलग मानकर जाति प्रमाण-पत्र जारी नहीं कर रहा है। जबकि धानका और धानका दोनों का अंग्रेजी अनुवाद एक ही है। इसी वजह से समाज के लोगों को शैक्षणिक, सामाजिक और आर्थिक योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
धरने के दौरान यह भी कहा गया कि धाणका समाज श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में आज़ादी से पहले से निवासरत है। समाज के पूर्वजों के नाम रियासतकालीन राजस्व पट्टों में भी दर्ज हैं, जिनमें धानका जाति स्पष्ट रूप से अंकित है। इसके बावजूद समाज के वर्तमान लोगों को प्रमाण-पत्र जारी करने में बाधाएं डाली जा रही हैं। धरना स्थल पर मौजूद नेताओं ने मुख्यमंत्री से मांग की कि संबंधित अधिकारियों को तुरंत निर्देश जारी किए जाएं ताकि धाणका समाज को अनुसूचित जनजाति वर्ग में शामिल कर उन्हें जाति प्रमाण-पत्र प्रदान किए जा सकें। धरने पर बैठे लोगों ने कहा कि समाज को न्याय दिलाना प्रशासन और सरकार की जिम्मेदारी है। यदि अब भी उचित समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
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