Magsaysay Award 2025: भारत के इस NGO को मिला एशिया का नोबेल अवॉर्ड, जानें किस-किस को मिला ये अवॉर्ड

मैग्सेसे पुरस्कार प्राप्त करने वाली पहली भारतीय संस्था बनी, 67वीं रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड सेरेमनी में मिलेगा यह पुरस्कार

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एशिया का नोबेल अवॉर्ड के नाम से पहचाना जाने वाला रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड की घोषणा (Ramon Magsaysay Award 2025) आज फिलीपींस में की गई है और इस वर्ष 2025 में इस अवॉर्ड के विजेता में शामिल है, भारत में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए काम करने वाले एनजीओ (गैर-लाभकारी संगठन) “फाउंडेशन टू एजुकेट गर्ल्स ग्लोबली” जिसको आम तौर पर एजुकेट गर्ल्स के नाम से जाना और पहचाना जाता है।

इस एनजीओ को इस वर्ष का रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड बालिकाओ को स्कूल से जोड़ने, विद्यार्थियों की बुनियादी शिक्षा को बेहतर बनाने और उनके स्वयंसेवकों के योगदान के लिए दिया गया हैं । एजुकेट गर्ल्स भारत की पहली संस्था (एनजीओ) है जिसको इस अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा।

क्यों मिल रहा है रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड :
वर्ष 2007 में राजस्थान के पाली जिले से बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सफीना हुसैन ने इस एनजीओ एजुकेट गर्ल्स की स्थापना की थी और वर्तमान में गायत्री नायर इसकी मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। वर्तमान में यह एनजीओ राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा से वंचित बालिकाओं का सर्वे कर के उनको वापस शिक्षा की मुख्य धारा में स्कूल से जोड़ने और किशोरियों और अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ने वाली महिलाओं को अपने जीवन को सेकंड चांस प्रदान करने के लिए प्रगति कार्यक्रम के माध्यम से स्टेट ओपन स्कूल के साथ मिलकर उनके जीवन कौशल को बढ़ावा देकर विकसित भारत की परिकल्पना के लिए NEET ( Not in education, employment, entrepreneurship and Training ) जनसंख्या को मुख्यधारा में लाने के लिए कार्य कर रही हैं । संस्था को बालिका शिक्षा में उसके इस योगदान के लिए रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा।

 

 

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क्यों है यह संस्था खास : एजुकेट गर्ल्स एनजीओ का अगले दस वर्षों में 1 करोड़ शिक्षार्थियों के लिए कार्य करने का लक्ष्य रखा है इसके लिए संस्था कुछ अन्य राज्यों में भी राज्य सरकार के साथ एमओयू ( MoU ) कर रही है, हाल ही में  तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी द्वारा हस्ताक्षर किए गए एमओयू में भी इस एनजीओ का नाम आया था । एजुकेट गर्ल्स को शिक्षा में दुनिया के पहले डेवलपमेंट इम्पैक्ट बॉन्ड, एशिया के पहले ऑडेशस प्रोजेक्ट और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के सोशल स्टॉक एक्सचेंज (एसएसई) में अपनी लिस्टिंग के लिए भी जाना जाता हैं और एजुकेट गर्ल्स की संस्थापक सफीना हुसैन वर्ष 2023 में शिक्षा का नोबल कहा जाने वाला प्रतिष्ठित वाइज़ अवॉर्ड प्राप्त करने वाली पहली भारतीय महिला बनी थी ।

एजुकेट गर्ल्स अब तक 30 हज़ार से ज़्यादा गांवों में काम कर चुकी है। 55,000 से अधिक सामुदायिक वालंटियर्स की मदद से इसने 20 लाख से ज़्यादा बच्चियों को स्कूल वापिस लाने और 24 लाख से अधिक बच्चों की  बेहतर पढ़ाई में मदद दी है।

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साल 2025 में इन को भी मिला रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड :
इस वर्ष 2025 में एजुकेट गर्ल्स के साथ-साथ पत्रकारिता की पृष्ठभूमि से आने वाली मालदीव की डाइविंग उद्योग में पेशेवर के रूप में कार्य करने वाली पहली महिला शाहिना अली को प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ उनकी लड़ाई और मालदीव के नाज़ुक समुद्री तंत्र को बचाने के लिए एवं फिलीपींस के सोसाइटी ऑफ द डिवाइन वर्ड (एसवीडी) के एक मिशनरी, फादर फ्लेवियानो “फ्लेवी” विलानुएवा को मनीला के हज़ारों बेघर और ग़रीब लोगों की गरिमा बहाल करने के लिए यह अवॉर्ड मिला है और यह पुरस्कार 7 नवंबर 2025 फिलीपींस की राजधानी मनीला के मेट्रोपॉलिटन थिएटर में आयोजित 67वीं रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड सेरेमनी में औपचारिक रूप से दिया जाएगा।

क्या है रेमन मैग्सेसे पुरस्कार : रेमन मैग्सेसे पुरस्कार की शुरुआत 1957 में हुई थी। यह पुरस्कार फिलीपींस के पूर्व राष्ट्रपति रेमन मैग्सेसे की स्मृति में क्षेत्र में समाज के लिए उल्लेखनीय योगदान करने वाले एशिया के व्यक्तियों और संगठनों को दिया जाता है।  1957 में ही फिलीपींस के पूर्व राष्ट्रपति रेमन मैग्सेसे की मृत्यु एक विमान हादसे में हो गई थी तब से उनकी याद में यह पुरुस्कार दिया जाता है । आज 31 अगस्त को उनके जन्मदिवस के दिन इस पुरस्कार की घोषणा की गई है।

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रेमन मैग्सेसे पुरस्कार की श्रेणियां :
1958 से 2008 तक यह पुरस्कार अलग-अलग छह श्रेणियों में दिया जाता था जिनमे शासकीय सेवा, सार्वजनिक सेवा, सामुदायिक नेतृत्व, पत्रकारिता, साहित्य और रचनात्मक कला, शांति और अंतर्राष्ट्रीय समझ शामिल थे। अब यह पुरस्कार अलग – अलग श्रेणियों की जगह उन व्यक्तियों या समूहों को दिया जाता हैं जिन्होंने अपने क्षेत्र में समाज के लिए उत्कृष्ट योगदान दिया हैं।

अब तक यह पुरस्कार प्राप्त करने वाले भारतीय :
एजुकेट गर्ल्स यह पुरस्कार पाने वाला पहला भारतीय एनजीओ है परंतु इसका मतलब यह नहीं है कि भारत में आने वाला यह पहला रेमन मैग्सेसे पुरस्कार हैं । सन 1958 में विनोबा भावे यह पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय थे और उसके बाद मदर टेरेसा को भी 1962 में शांति और उनकी अंतर्राष्ट्रीय समझ के लिए इस पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं । इनके साथ ही एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी लक्ष्मी 1974 में सार्वजनिक सेवा के लिए यह पुरस्कार पाने वाली पहली भारतीय संगीतकार बनी ।

वर्गिस कुरियन भारतीय श्वेत क्रांति के जनक 1963, प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और राजनीतिज्ञ जयप्रकाश नारायण को सार्वजनिक सेवा के लिए 1965, विश्वप्रसिद्ध फिल्म निर्देशक सत्यजित राय को साहित्य और रचनात्मक कला के लिए 1967, हरित क्रांति के जनक एम. एस. स्वामीनाथन 1971, और भारत के जल पुरुष ( वाटर मेन ऑफ इंडिया ) राजेन्द्र सिंह को 2001 में इस पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका हैं।

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इनके अलावा महिला सशक्तिकरण के लिए काम करने वाली समाज सुधारक इला रमेश भट्ट 1977, प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता बाबा आमटे 1985, टी. एन शेषन 1996, किरण बेदी 1994, अरुणा राय 2000, अरविन्द केजरीवाल 2006, प्रकाश आमटे और मंदाकिनी आमटे 2008, टी. एम. कृष्णा 2016, सोनम वांगचुक 2018, रवीश कुमार 2019 और डॉ रवि कन्नान 2023 में कैंसर के इलाज और स्वास्थय सेवाओं में उनके योगदान के लिए यह पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं । इनके अलावा भी अन्य भारतीय अपने योगदान के लिए यह पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं।

प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों की सूची : दुनिया भर में कई प्रतिष्ठित पुरस्कार दिए जाते हैं जो विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्टता को सम्मानित करते हैं। नीचे कुछ प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों की सूची दी गई है, जो अपने-अपने क्षेत्र में सर्वोच्च माने जाते हैं:

पुरस्कार का नाम क्षेत्र स्थापना वर्ष विशेषता
नोबेल पुरस्कार शांति, साहित्य, भौतिकी, रसायन, चिकित्सा, अर्थशास्त्र 1901 विश्व का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार
ऑस्कर पुरस्कार (Academy Awards) फिल्म 1929 फिल्म जगत का सर्वोच्च सम्मान
पुलित्जर पुरस्कार पत्रकारिता, साहित्य, संगीत 1917 अमेरिकी पत्रकारिता और लेखन में उत्कृष्टता के लिए
बुकर पुरस्कार अंग्रेजी साहित्य (उपन्यास) 1969 अंग्रेजी भाषा के सर्वश्रेष्ठ उपन्यास के लिए
ग्रैमी पुरस्कार संगीत 1959 संगीत उद्योग में उत्कृष्टता के लिए
रेमन मैग्सेसे पुरस्कार जनसेवा, पत्रकारिता, नेतृत्व 1957 एशिया का नोबेल कहा जाता है
राइट लाइवलीहुड पुरस्कार पर्यावरण, सामाजिक न्याय 1980 वैकल्पिक नोबेल के रूप में प्रसिद्ध
एबेल पुरस्कार गणित 2002 गणित के क्षेत्र में नोबेल के समकक्ष
वाइज़ अवॉर्ड शिक्षा 2011 शिक्षा का नोबेल कहा जाता हैं

इनके अलावा भी कई क्षेत्रीय और विशिष्ट पुरस्कार हैं जैसे कि इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार, जवाहरलाल नेहरू सदभावना पुरस्कार, और बियोंड द वॉर पुरस्कार, जो शांति और मानवता के क्षेत्र में योगदान के लिए दिए जाते हैं। 

कब होगी नोबेल पुरस्कार की घोषणा : दुनिया के सबसे बड़े पुरस्कार की घोषणा भी जल्दी ही होने वाली है, वैसे इस साल के नोबेल पुरस्कार पर सबकी नजर है क्यूंकी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपनी गतिविधियों से खासतौर पर शांति श्रेणी को  रोचक बना रखा हैं । इस साल के नोबेल पुरस्कारों की घोषणा अक्टूबर 2025 में होगी, और हर श्रेणी के लिए तारीखें तय की गई हैं। नीचे देखिए:

चिकित्सा (Medicine)   6 अक्टूबर 2025 सुबह 11:30

भौतिकी (Physics)     7 अक्टूबर 2025 सुबह 11:45

रसायन (Chemistry)   8  अक्टूबर 2025 सुबह 11:45

साहित्य (Literature)   9  अक्टूबर 2025 दोपहर 1:00

शांति (Peace)        10 अक्टूबर 2025 सुबह 11:00

अर्थशास्त्र (Economics) 13 अक्टूबर 2025 सुबह 11:45

सभी घोषणाएँ नोबेल पुरस्कार की आधिकारिक वेबसाइट और डिजिटल चैनलों पर लाइव प्रसारित की जाएँगी।