नवरात्रा में होगा नवग्रह का जैन विधि के अनुसार विशेष अनुष्ठान
संवाददाता भीलवाड़ा। गृहस्थ धर्म ग्रहण करने वाला भी मोक्ष प्राप्त कर सकता है। इंसान जाति से नही कर्म से महान बनता है, भगवान महावीर ने सदैव जातिवाद का खंडन किया है, मानव की जाति धर्म करने में कोई मायने नही रखती है। व्यक्ति का धन, बल व अन्य संपति को कोई भी नष्ट पहुचा सकता है, चूरा सकता है। परंतु व्यक्ति द्वारा किया गया पुण्य कोई भी छीन नही सकता है, नुकसान नही पहुचा सकता है। उक्त विचार तपाचार्य साध्वी जयमाला की सुशिष्या साध्वी चंदनबाला ने धर्मसभा में व्यक्त किये। साध्वी ने कहा कि तीर्थकरों की उम्र बहुत लंबी होती थी परंतु भगवान महावीर की उम्र छोटी थी, उन्होंने छोटी सी उम्र में भी बहुत कुछ सीखा दिया था, 30 वर्ष तक गृहस्थ जीवन मे रहे, गृहस्थ जीवन को कैसे जीया जाये, माता-पिता की सेवा कैसे की जावे यह सब सीखा दिया था। गृहस्थ जीवन के बाद साधु जीवन अंगीकार कर साधु जीवन मे कैसे रहना है यह सब सीखा दिया । भगवान महावीर ने 2600 वर्ष पहले ही बता दिया था कि अभिमान से व्यक्ति कैसे नष्ट होता है आठ तरह का अभिमान बताया गया है। व्यक्ति का अभिमान व नशा नही हटेगा तब तक उसका कल्याण होने वाला नही है। आत्मा के भटकाव के प्रमुख कारण क्रोध, मान, माया , लोभ है साध्वी डॉ चंद्रप्रभा ने कहा कि नवरात्रा इस बार खंडित है जो अशुभ के संकेत है। नवरात्रि के दौरान धर्मसभा में नवग्रह का जैन विधि के अनुसार 7 अक्टूबर गुरुवार से विशेष अनुष्ठान किया जायेगा जो भी श्रावक श्राविका इसमे शामिल होना चाहते है वो पूर्व में अपना रजिस्ट्रेशन करवा लेवे। नवग्रह का शुद्ध मन से अनुष्ठान करने से आदि, व्यादि, उपादि को टाला जा सकता है एवं ग्रह संबंधी किसी के कोई समस्या होगी तो उससे उसे मुक्ति मिल सकती है। संघ के मंत्री देवीलाल पीपाड़ा ने सभी श्रावक – श्राविकाओं से आग्रह किया कि वह नवग्रह अनुष्ठान में अवश्य भाग लेवे। बाहर से आये आगन्तुको का स्थानीय संघ ने स्वागत किया।
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