लद्दाख (ladakh protest) को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की माँग ने बुधवार को लेह को सुलगने पर मजबूर कर दिया। छात्रों और सुरक्षाबलों के बीच झड़प हुई, पत्थरबाज़ी और आगजनी की घटनाएं सामने आईं। इसमें 4 लोगों की मौत हो गई और 70 से ज्यादा लोग घायल हैं। प्रदर्शनकारियों ने बीजेपी कार्यालय में आग लगा दी और सीआरपीएफ की एक गाड़ी को भी निशाना बनाया।
ये प्रदर्शन सोनम वांगचुक के समर्थन में हुए, जो पिछले 15 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे थे। आंदोलनकारियों ने बुधवार को ‘लेह बंद’ का आह्वान किया था, जिसके दौरान हिंसा भड़क उठी। हिंसा के बाद वांगचुक ने गहरी निराशा जताई। उन्होंने कहा “आज लद्दाख के लिए दुखद दिन है।
हमने पाँच साल तक शांतिपूर्ण तरीक़े से संघर्ष किया। भूख हड़ताल की, लेह से दिल्ली तक पैदल मार्च किया, लेकिन अब हिंसा और आगजनी हो रही है। मैं युवाओं से अपील करता हूँ कि यह मूर्खता तुरंत बंद करें। इसी के साथ हम अपना अनशन समाप्त कर रहे हैं और प्रदर्शन स्थगित कर रहे हैं।”
कहां से आई Gen- Z की भीड़
आंदोलनकारियों ने मंगलवार की रात को 24 सितंबर को लद्दाख बंद का आह्वान किया था। भीड़ जुटाने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया। लोगों से लेह हिल काउंसिल पहुंचने की अपील की। इसका असर दिखा और बड़ी तादाद में लोग पहुंचे। लेह हिल काउंसिल के सामने आंदोलनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेड्स लगा रखे थे। जब आंदोलन कारी आगे बढ़े तो पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी, लेकिन भीड़ ने पुलिस की गाड़ी जलाई और तोड़फोड़ की।
VIDEO | Leh, Ladakh: Police fired teargas shells and resorted to baton charge after a group of youths allegedly turned violent and pelted stones amid a massive protest and shutdown.
The protest was held in support of the demand to advance the proposed talks with the Centre on… pic.twitter.com/ebFGf8AeBO
— Press Trust of India (@PTI_News) September 24, 2025
लद्दाख की प्रमुख मांगें क्या हैं? लद्दाख के प्रदर्शनकारियों और स्थानीय संगठनों की मुख्य माँगें हैं:
- पूर्ण राज्य का दर्जा – ताकि स्थानीय लोग अपने भविष्य और संसाधनों पर निर्णय ले सकें।
- छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल करना – ताकि जनजातीय अधिकारों और ज़मीन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
- स्थायी निवास कानून – बाहरी लोगों की अनियंत्रित बस्तियों और ज़मीन खरीद पर रोक लगाने के लिए।
- नौकरी और शिक्षा में गारंटी – स्थानीय युवाओं के लिए आरक्षण और अवसर सुनिश्चित करने की माँग।
सरकार ने 2019 में अनुच्छेद 370 और 35A हटाते समय लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग कर केंद्र शासित प्रदेश बनाया था। उस समय यह आश्वासन दिया गया था कि हालात सामान्य होने के बाद राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा। अब इसी वादे की याद दिलाते हुए प्रदर्शन तेज़ हो गए हैं। इस विषय पर अगली अहम बैठक दिल्ली में 6 अक्टूबर को होगी।

सोनम वांगचुक कौन हैं?
सोनम वांगचुक एक प्रसिद्ध इंजीनियर, इनोवेटर और सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जो लद्दाख में शिक्षा और पर्यावरण सुधार के लिए लंबे समय से काम कर रहे हैं। वे SECMOL (Students’ Educational and Cultural Movement of Ladakh) के संस्थापक हैं, जिसने ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव किए।
उनसे प्रेरित होकर बॉलीवुड फिल्म “3 इडियट्स” का किरदार ‘रैंचो’ (आमिर खान द्वारा निभाया गया) बनाया गया था। वांगचुक को 2018 में रैमन मैग्सेसे अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है। लद्दाख में उनका प्रभाव गहरा है, और यही वजह है कि उनके समर्थन में छात्रों और स्थानीय संगठनों ने बड़ा आंदोलन खड़ा किया।
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