-श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिवस में रास पंचाध्यायी, कंस वध और रुक्मिणी विवाह प्रसंगों का हुआ मनमोहक वर्णन
हनुमानगढ़। श्री बद्रीनाथ धर्मशाला, हुडको कॉलोनी, हनुमानगढ़ जंक्शन में चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ की कथा के छठे दिवस पर परम पूज्य आचार्य भानु देव शास्त्री जी ने भगवान श्रीकृष्ण की तीन अद्भुत और दिव्य लीलाओं का वर्णन करते हुए धर्म की सर्वोच्च स्थापना पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। कथा की शुरूवात जिला कलक्टर के सहायक पवन कुमार, सहयोगी किशन कुमार व राजस्थान पुलिस से किशन कुमार शेखावत ने विधिवत पूजा अर्चना के साथ की। परम पूज्य आचार्य भानु देव शास्त्री जी ने श्रद्धालुओं को बताया कि भगवान श्रीकृष्ण की प्रत्येक लीला केवल चमत्कार नहीं, बल्कि धर्म, न्याय और भक्ति के गहन संदेशों का प्रतीक है, जो आज भी मानव जीवन के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
आचार्य शास्त्री ने कथा की शुरुआत रास पंचाध्यायी के दिव्य प्रसंग से की। उन्होंने कहा कि गोपियों का प्रेम संसारिक नहीं, बल्कि आत्मिक समर्पण का प्रतीक था। जब भगवान श्रीकृष्ण की बंसी की ध्वनि गूंजती है, तो वह मनुष्य के भीतर के ‘काम’ और ‘अहंकार’ का अंत कर केवल शरणागति धर्म की स्थापना करती है। यह आत्मा का परमात्मा से मिलन और प्रेम का शुद्धतम स्वरूप है।
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