संवाददाता भीलवाड़ा। देश के आदिवासी क्षेत्रों में संविधान की 5 विं अनुसूची के प्रभावी रूप से लागू नहीं होने के कारण आदिवासियों के मौलिक आधिकारों के दमनकारी सरकारों द्वारा उनके उद्यगपति मित्रों के कहने पर बर्बरता पूर्ण तरीके से कुचला जा रहा है ! इसी कड़ी में राजस्थान में गांधीवादी सोच का दंभ भरने वाली गहलोत सरकार आदिवासियों के हितों पर कुठाराघात करते हुए उनके हक को ख़तम करने पर आमदा है! डूंगरपुर के काकरी डूंगरी की पहाड़ियों पर हमारे आदिवासी भाई 7 सितंबर से कोविड के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए शांतीपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे थे, लेकिन राज्य की गहलोत सरकार 17 दिन तक सोती रही, और हमारे जनप्रतिनिधियों के बार बार के आग्रह पर करवाई नहीं की गई !
उसके बाद हमारे आंदोलन को कुचलने की नीयत से आंदोलनकारियों के साथ प्रस्तावित मीटिंग को हमारे साथियों के कोविड़ संक्रमण होने की ग़लत जानकारी देकर जानबूजकर आंदोलन और आदिवासियों को ख़तम करने की नीयत से उस वार्ता को नहीं होने दिया ! उसके पश्चात हमारी न्यायप्रिय कौम को बदनाम करने की साजिश के तहत स्थानीय गेर आदिवासी समाज को हमारे आंदोलन को उग्र रूप दिया गया ,उसके तुरंत बाद सभी तरह के मीडिया पर हम सब आदिवासियों के नक्सली, उपद्रवी और देशविरोधी जैसी उपाधियों से नवाजा ! स्थानीय साहूकारों के कहे अनुसार सरकारी तंत्र के साथ पूरी तरह से हमें नक्सली घोषित करने में लगा हुआ है ! ये बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण है, जब जब देश के किसी भी हिस्से में आदिवासी अपने हक के लिए आवाज़ उठाता है ये दमनकारी सरकारें हमारी सारी कौम को नक्सली साबित कर देते हैं !
रास्ट्रीय मीणा महासभा के बैनर तले आज बड़ी संख्या में आदिवासी भाइयों ने अपने अन्य आदिवासी भाइयों के साथ सहानुभूति रखते हुए बताया है कि हम एक शांतिप्रिय, न्यायप्रिय और संविधान में विश्वास रखने वाली कौम है, हम राज्य सरकार और केंद्र सरकार से ये अतिशीघ्र मांग करते हैं कि हमारे भाइयों पर किए जा रहे दमन को तुरंत बंद किया जाएं साथ ही शहीद हुए हमारे भाइयों के परिवारजनों को एक करोड़ की सहायता और एक परिवार सदस्य को राजकीय नौकरी अतिशीघ्र उपलब्ध करवाई जाए !
इस सम्पूर्ण प्रकरण कि न्यायिक आयोग द्वारा जांच करवाई जाए जिसमें एक सदस्य आदिवासी समुदाय से हो ! 2018 रीट परीक्षा में 1167 रिक्त रहें पदों पर तुरंत कानूनी परेशानियों को पूर्ण करते हुए आदिवासी समुदाय के अभ्यार्थियों को नियुक्ति दी जाए !
5 वीं अनुसूची को प्रभावी तरीके से लागू करते हुए अनुसूचित क्षेत्रों में आबादी के अनुपात में आदिवासियों को सभी सरकारी और निजी उपक्रमों में आरक्षण उपलब्ध करवाया जाए !
साथ ही निर्दोष लोगों पे लगाए गए मुक़दमे अतिशीघ्र वापस लिए जाएं !
शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों संभाग अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह मीना, जिला अध्यक्ष डॉ योगेन्द्र मीना, महिला जिला अध्यक्ष गायत्री मीना, छात्र महासभा अध्यक्ष रविन्द्र सिंह, मुख्य महासचिव प्रताप सिंह मीणा, एस सी/ एस टी अखिल भारतीय परिसंघ के जिला अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह, शैलेश महाराजसर, आदिवासी एकता मंच के मनोज पीलोड़ी, मनीष पीलोड़ी, हेमंत सपोटरा,प्रेम सिंह ककरौआ,यशपाल मीना,एडवोकेट जीत सिंह सहित ,रामफल, नीरज, अनीता मीना सहित बड़ी तादात में लोग शामिल हुए
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