बड़ोपल बारानी की 8000 बीघा भूमि वन विभाग को देने के निर्णय का विरोध

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– पूर्व विधायक धर्मेन्द्र मोची के नेतृत्व में ग्रामीणों ने कलेक्टर से मिलकर किसानों को उजड़ने से बचाने की उठाई मांग
हनुमानगढ़। पीलीबंगा तहसील के बड़ोपल बारानी क्षेत्र में स्थित जीडीसी (सिंचाई विभाग) की लगभग 8000 बीघा भूमि को वन विभाग के अधीन ‘डिम्ड फोरेस्ट’ घोषित किए जाने के प्रस्ताव का ग्रामीणों ने कड़ा विरोध जताया है। इस संबंध में ग्रामीणों ने पूर्व विधायक धर्मेन्द्र मोची के नेतृत्व में जिला कलेक्टर से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और निर्णय को बदलने की मांग की।
ग्रामीणों ने बताया कि प्रस्तावित क्षेत्र के खसरों में लगभग 500 किसानों की खातेदारी भूमि भी शामिल है, जिनकी जोत पहले से ही बहुत छोटी है। अधिकांश किसानों के पास अन्यत्र कोई भूमि या आजीविका का साधन नहीं है। ऐसे में यदि उक्त भूमि वन विभाग को हस्तांतरित की जाती है तो किसानों के सामने जीवन-यापन का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि एक ओर सरकार ग्रामीण क्षेत्र में विकास कार्य करवा रही है—स्कूल खोले जा रहे हैं, सड़कें बनाई जा रही हैं और विद्युत कनेक्शन दिए जा रहे हैं—वहीं दूसरी ओर किसानों को उनकी भूमि से वंचित करने जैसा निर्णय लिया जा रहा है। जीडीसी की भूमि वन विभाग को देने से किसानों को खेतों तक पहुंचने के रास्ते, विद्युत लाइन, सिंचाई व्यवस्था, तारबंदी तथा आवारा पशुओं से सुरक्षा जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। चूंकि अधिकांश खसरों में किसानों की आंशिक भूमि भी स्थित है, इसलिए भविष्य में विभाग और किसानों के बीच टकराव की स्थिति बनने की आशंका जताई गई है।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि क्षेत्र में बाढ़ का पानी कभी अत्यधिक मात्रा में आता है तो कई वर्षों तक बिल्कुल नहीं आता, फिर भी किसानों ने कभी पानी का विरोध नहीं किया। बावजूद इसके, वे मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहकर कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहे हैं।
जिला कलेक्टर ने प्रतिनिधिमंडल की बात गंभीरता से सुनी और मौके पर संबंधित अधिकारियों से वार्ता की। उन्होंने आश्वासन दिया कि काश्तकारों की मांगों को राज्य सरकार तक पहुंचाया जाएगा।

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