अविमुक्तेश्वरानंद, शंकराचार्य हैं या नहीं? प्रयागराज प्राधिकरण ने क्यों उठाया सवाल, बढ़ा विवाद

342

प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने ज्योतिर्मठ से जुड़े विवाद को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (avimukteshwaranand saraswati) को आधिकारिक नोटिस जारी किया है। नोटिस में उनसे यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि वह किस आधार पर स्वयं को ज्योतिर्मठ का शंकराचार्य बताते हैं। प्रशासन ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में लंबित एक मामले का हवाला देते हुए 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा है।

यह कार्रवाई उस घटनाक्रम के बाद सामने आई है, जब मौनी अमावस्या के अवसर पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का धर्म रथ मेले में प्रवेश नहीं कर सका। उस दौरान उनके समर्थकों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति भी बनी थी। आरोप है कि झड़प के दौरान कुछ शिष्यों के साथ दुर्व्यवहार हुआ।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उस समय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि उनके अनुयायियों को जबरन रोका जा रहा है, उनके साथ मारपीट की जा रही है और उन्हें धार्मिक कर्तव्यों का पालन करने से वंचित किया जा रहा है। उन्होंने इसे हिंदू धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन बताया था।

अब मेला प्राधिकरण ने नोटिस के जरिए अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि शंकराचार्य पद को लेकर मामला न्यायालय में विचाराधीन है और इसी कारण उनसे उनकी वैधता पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। प्रशासन का दावा है कि मौजूदा कानूनी स्थिति में उन्हें ज्योतिर्मठ का शंकराचार्य मानने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

क्यों शंकराचार्य होने पर सवाल उठ रहे हैं?
अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य होने पर सिर्फ प्राधिकरण ही नहीं दूसरे शंकराचार्य भी सवाल उठा देते हैं। साल 2022 में उनका पट्टाभिषेक विवादास्पद था। जब स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की मृत्यु के बाद अविमुक्तेश्वरानंदर ने उनका उत्तराधिकारी होने का दावा किया और कहा कि उन्हें ही उनके गुरु उत्तराधिकारी बनाकर गए हैं। उनके पट्टाभिषेक पर गोवर्धन मठ और पुरी पीठ ने मान्यता नहीं दी गई।

सुप्रीम कोर्ट तब कहा था कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को ज्योतिष पीठ के नए शंकराचार्य के रूप में अभिषेक पर रोक रहेगी। अविमुक्तेश्वरानंद सुर्खियों में बने रहते हैं। वह योगी और मोदी सरकार की खुलकर आलोचना करते हैं। उन पर राजनीतिक पूर्वाग्रह के आरोप लगते हैं। उनके आलोचक कहते हैं कि वह समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के एजेंडे पर काम करते हैं।

पंचदूत अब व्हाट्सएप चैनल पर उपलब्ध है। लिंक पर क्लिक करें और अपने चैट पर पंचदूत की सभी ताज़ा खबरें पाएं।

क्यों अनशन पर बैठे हैं अविमुक्तेश्वरानंद?
रविवार को ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके समर्थकों को संगम में जाने से कथित तौर पर रोका गया था। अधिकारियों ने कहा था कि माघ मेले में शंकराचार्य के आसन सहित स्नान की परंपरा नहीं है। जब शंकराचार्य के शिष्यों ने विरोध किया तो उनके समर्थकों को पुलिस ने पीट दिया।

पुलिस अधीक्षक (माघ मेला) नीरज पांडेय ने कहा था कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बिना किसी इजाजत के 200-250 समर्थकों के साथ पुल नंबर दो की बैरिकेडिंग तोड़कर स्नान घाट की तरफ जा रहे थे, इसलिए रोक दिया गया।

माघ मेला प्रशासन का दावा है कि अविमुक्तेश्वरानंद से अपील की गई थी कि श्रद्धालुओं की भीड़ है, ऐसे में इतनी बड़ी यात्रा न निकाली जाए। अविमुक्तेश्वरानंद के भक्त उनकी बात नहीं माने और बढ़ते गए। जब पुलिस ने जबरन रोका तो वह बिना नहाए लौट गए। तब से लेकर अब तक वह आमरण अनशन पर बैठे हैं।

देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (Hindi News) पढ़ें। आप हमें फेसबुकट्विटरइंस्ट्राग्राम और यूट्यूब चैनल पर फॉलो कर सकते हैं।