गुरुद्वारा शहीद बाबा सुखा सिंह, महताब सिंह जी निहंग सिंह छावनी बुढ़ा दल में जोड़ मेले की तैयारियां जोरोशोरो से शुरू

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16 अखंड पाठों के भोग, 16 नए पाठों का प्रकाश; 9 सितंबर को होगा वार्षिक शहीदी जोड़ मेला
हनुमानगढ़ टाउन स्थित गुरुद्वारा शहीद बाबा सुखा सिंह, बाबा महताब सिंह जी निहंग सिंह छावनी बुढ़ा दल में जोड़ मेले के उपलक्ष्य में चल रहे धार्मिक कार्यक्रमों के अंतर्गत शनिवार को 16 अखंड पाठों के भोग डाले गए। इस अवसर पर 16 नए अखंड पाठों का प्रकाश भी किये गया। गुरुघर की ओर से भोग डलवाने वाले परिवारों को बाबा जग्गा सिंह ने गुरुघर की बक्शीस सरोपा देकर सम्मानित किया। इस दौरान हेड ग्रंथी भाई दयाल सिंह ने अरदास कर इलाके में सुख-शांति, खुशहाली और भाईचारे की कामना की। सेवादार बाबा जोगा सिंह और बाबा जग्गा सिंह ने जानकारी दी कि वार्षिक शहीदी जोड़ मेला 9 सितंबर 2025 (भादो सुदी 25) को बड़े श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाएगा। यह आयोजन शिरोमणी सेवा रतन, शिरोमणी पंथ रतन सिंह साहिब, बाबा बलबीर सिंह जी अकाली 96 करोड़ी, 14वें मुखी शिरोमणी पंथ अकाली बुढ़ा दल, पंजवा तख्त, चलदा वहींर, चक्रवर्ती निहंग सिंह, पंजाब भारत के सानिध्य में प्रतिवर्ष की भांति संपन्न होगा। 8 और 9 सितंबर को होंगे विशेष धार्मिक कार्यक्रम सेवादारों ने बताया कि 8 सितंबर की रात को स्कूल ग्राउंड में खुले दीवान का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बाहर से पधारे तख्तों के सिंह साहिबान, निहंग सिंह, जत्थेबंदियों के मुखी साहिबान, संत महापुरुष, शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटियों के मुख्य सेवादार, भाई सुखप्रीत सिंह हजूरी रागी जत्था श्री दरबार साहिब श्री अमृतसर साहिब, बाबा मनमोहन सिंह बारनवाले, भाई सुखप्रीत सिंह कनईया, कथावाचक सहित खालसा पंथ के प्रमुख रागी, ढाडी, कथावाचक और गुरबाणी ज्ञानी श्रोताओं को निहाल करेंगे। 9 सितंबर को सुबह 10 बजे लड़ीवार अखंड पाठों के भोग डाले जाएंगे। इसके उपरांत खुले दीवान सजेंगे और दोपहर 3 बजे अमृत संचार होगा। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि जो अमृत छकना चाहते हैं, वे 9 सितंबर को प्रातः स्नान कर दोपहर 2 बजे तक गुरुद्वारे में पहुँचें। गुरुद्वारा परिसर में गुरु के लंगर हाल की कार सेवा निरंतर जारी है। अखंड पाठों के प्रकाश के उपरांत श्रद्धालुओं को गुरु का अटूट लंगर वरताया गया। कार्यक्रम में नगर व आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में संगत ने भाग लेकर गुरुघर से आशीर्वाद प्राप्त किया और धार्मिक वातावरण में श्रद्धा व आनंद का अनुभव किया।

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