स्थानीय वृक्षों के स्थान पर जहरीली प्रजाति लगाए जाने पर सौंपा ज्ञापन
हनुमानगढ़। वृक्ष मित्र एवं मानव सेवा संस्थान गोलुवाला द्वारा एनएच-54 सड़क निर्माण के दौरान स्थानीय प्रजाति के पेड़ों के स्थान पर कथित रूप से गलत व अनुपयुक्त प्रजाति के पौधरोपण किए जाने के विरोध में जिला कलक्टर श्री खुशाल यादव तथा क्षेत्रीय उपवन संरक्षक श्री सुरेश आबुसरिया को ज्ञापन सौंपकर स्थिति से अवगत कराया गया।
संस्थान अध्यक्ष नरेंद्र सुथार ने बताया कि एनएच-54 सड़क निर्माण से पूर्व सड़क के दोनों ओर पीपल, नीम, जामुन, बेरी, बरगद, शीशम, बबूल, गूलर सहित अनेक स्थानीय व पर्यावरण के अनुकूल वृक्ष मौजूद थे। इन वृक्षों से न केवल क्षेत्र की हरियाली बनी हुई थी, बल्कि पक्षियों, जीव-जंतुओं और मानव जीवन के लिए भी यह अत्यंत लाभकारी थे। इन पर बड़ी संख्या में पक्षी अपने घोंसले बनाते थे, जिससे जैव विविधता का संरक्षण होता था।
उन्होंने बताया कि सड़क चौड़ीकरण एवं निर्माण कार्य के दौरान इन सभी स्थानीय वृक्षों को काट दिया गया, जिससे पर्यावरण को भारी क्षति पहुंची है। अब इनके स्थान पर केवल एक ही प्रजाति अलस्ट्रॉनिया/सप्तपर्णी के पौधे लगाए जा रहे हैं, जो स्थानीय वातावरण के अनुकूल नहीं हैं। यह प्रजाति जहरीली मानी जाती है, जिसे न तो पशु खाते हैं और न ही पक्षी इस पर घोंसला बनाते हैं। इसके कारण हजारों पक्षियों के प्राकृतिक आशियाने उजड़ गए हैं और क्षेत्र में पर्यावरणीय असंतुलन उत्पन्न हो रहा है। संस्थान ने ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से मांग की कि एनएच-54 के किनारे एक ही प्रजाति के स्थान पर विविध प्रकार की स्थानीय व उपयोगी प्रजातियों के वृक्ष लगाए जाएं। इनमें पीपल, नीम, जामुन, बरगद, गूलर, शीशम, बबूल व अन्य फलदार व छायादार वृक्ष शामिल हों, जिससे पशु-पक्षियों को आश्रय मिले और पर्यावरण संतुलन बना रहे।
संस्थान पदाधिकारियों ने कहा कि यदि समय रहते सही प्रजातियों का चयन नहीं किया गया तो आने वाले समय में इसके गंभीर दुष्परिणाम देखने को मिलेंगे। उन्होंने प्रशासन से सड़क निर्माण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता देने की अपील की। इस अवसर पर वृक्ष मित्र साथी मनोज देपावत, नरेश सिहाग, मोहनलाल भोभरिया, दीपक शर्मा, चंद्र प्रकाश सारस्वत सहित अन्य पर्यावरण प्रेमी उपस्थित रहे।
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