मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ धान मंडी से कलेक्ट्रेट तक रोष मार्च

79

– चार लेबर कोड, श्रम शक्ति नीति-2025 व निजीकरण के विरोध में राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
हनुमानगढ़। 
मजदूर, किसान और विभिन्न जनसंगठनों के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ धान मंडी से जिला कलेक्ट्रेट तक रोष मार्च निकाला गया। मार्च के बाद कलेक्ट्रेट परिसर में सभा आयोजित कर सहामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार लेबर कोड, श्रम शक्ति नीति-2025 तथा अन्य आर्थिक नीतियों को जन-विरोधी बताते हुए इन्हें निरस्त करने की मांग उठाई। और अनाज मंडियो में जो लॉटरी निकालकर पांच ब्लाकों में बांटने का काम किया है इसके विरोध में
रोष मार्च धान मंडी से शुरू होकर मुख्य मार्गों से होता हुआ जिला कलेक्ट्रेट पहुंचा। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने “चारों लेबर कोड रद्द करो”, “एफसीआई बचाओ, खाद्य सुरक्षा बचाओ”, “समान काम के लिए समान वेतन लागू करो” जैसे नारे लगाए। कलेक्ट्रेट पहुंचकर सभा का आयोजन किया गया, जिसमें श्रमिक नेताओं ने कहा कि नए श्रम कानूनों से संगठित व असंगठित क्षेत्र के करोड़ों मजदूरों की कानूनी सुरक्षा कमजोर हुई है।
सभा को संबोधित करते हुए कॉमरेड रामेश्वर वर्मा ने आरोप लगाया कि लेबर कोड्स के लागू होने से श्रमिकों के वेतन, सामाजिक सुरक्षा और ट्रेड यूनियन अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। उनका कहना था कि न्यूनतम वेतन की सार्वभौमिकता का दावा भ्रामक है और बड़ी संख्या में छोटे प्रतिष्ठानों व श्रमिकों को इसके दायरे से बाहर कर दिया गया है। इसके अलावा फिक्स टर्म रोजगार, ठेका प्रथा के विस्तार और सार्वजनिक क्षेत्र के विनिवेश को भी श्रमिक हितों के खिलाफ बताया गया।
रघुवीर वर्मा ने श्रम शक्ति नीति-2025 को भी श्रमिक संगठनों की भूमिका सीमित करने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि सामूहिक सौदेबाजी की शक्ति को कमजोर कर पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। मनरेगा कानून में बदलाव और कार्यदिवसों की अवधारणा में परिवर्तन को ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों पर प्रहार बताते हुए पूर्व व्यवस्था बहाल करने की मांग की गई।

देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (Hindi News) पढ़ें। आप हमें फेसबुकट्विटरइंस्ट्राग्राम और यूट्यूब चैनल पर फॉलो कर सकते हैं।