-100वें दिन चक्काजाम और विशाल जनसभा का ऐलान, प्रशासन की उदासीनता पर समाज में गहरा रोष
हनुमानगढ़। अनुसूचित जनजाति (एसटी) का जाति प्रमाण-पत्र जारी करवाने की मांग को लेकर धाणका समाज का धरना-प्रदर्शन सोमवार को 95वें दिन में प्रवेश कर गया। लगातार तीन महीने से अधिक समय से जिला मुख्यालय पर चल रहे इस आंदोलन ने अब प्रशासन के प्रति गहरी नाराजगी का रूप ले लिया है। समाज के प्रतिनिधि बार-बार जिला प्रशासन से न्याय की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से समुदाय में असंतोष और आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
जिला मुख्यालय स्थित धरना स्थल पर समाज के सैकड़ों सदस्य एकत्र हुए और आंदोलन की दिशा तय करने के लिए एक विस्तृत बैठक आयोजित की गई। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि धाणका समाज वर्षों से अनुसूचित जनजाति में शामिल किए जाने और जाति प्रमाण-पत्र जारी करने की मांग कर रहा है, लेकिन प्रशासन की बेरुखी और लापरवाही से समाज के लोग अपने मौलिक अधिकारों से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि प्रमाण-पत्र न होने से समाज के युवाओं को सरकारी योजनाओं, नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण जैसी सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है, जिससे उनका सामाजिक और आर्थिक विकास रुक गया है।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आंदोलन को अब और मजबूत रूप दिया जाएगा। समाज ने घोषणा की कि धरने के 100वें दिन विशाल जनसभा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें जिले और प्रदेश के विभिन्न इलाकों से बड़ी संख्या में समाजजन भाग लेंगे। इस जनसभा में आंदोलन की आगामी रणनीति तय की जाएगी। साथ ही चेतावनी दी गई कि उसी दिन जिलेभर में शांतिपूर्ण चक्काजाम किया जाएगा, ताकि प्रशासन तक समाज की आवाज प्रभावी रूप से पहुंच सके।
वक्ताओं ने प्रशासन की चुप्पी पर कड़ा रोष जताते हुए कहा कि यदि शासन-प्रशासन ने 100वें दिन से पहले समाज की मांगों पर कोई निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन और अधिक उग्र होगा। उन्होंने कहा कि अब यह आंदोलन केवल एक प्रमाण-पत्र का नहीं, बल्कि समाज के अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है।
धरना स्थल पर मौजूद समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने स्पष्ट कहा कि यदि प्रशासन ने इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया तो इसके परिणामों की पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। उन्होंने कहा कि धाणका समाज लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रहा है, परंतु सरकार की उदासीनता यह दर्शाती है कि वह समाज की पीड़ा को समझने में असफल रही है।
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