-गांवों में भरे पानी और नकली स्प्रे से चौपट हुई मेहनत, मुआवजे की उठी मांग
हनुमानगढ़। जिले में किसानों की बर्बाद फसलों का दर्द आखिरकार प्रदेश के कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा तक पहुंच गया। शनिवार को औचक निरीक्षण पर पहुंचे मंत्री को जिला परिषद डायरेक्टर मनीष मक्कासर ने ज्ञापन सौंपकर तत्काल मुआवजे की मांग की। उन्होंने बताया कि जिले के कई गांवों में नरमा और ग्वार की पूरी फसल बर्बाद हो चुकी है, लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के कारण किसानों को अब तक कोई राहत नहीं मिल सकी है।
मक्कासर ने मंत्री को बताया कि ग्राम पंचायत मोहनमगरिया, रणजीतपुरा, मुण्डा, मटोरियावाली ढाणी, आदर्शनगर, हरीपुरा, शेरगढ़, भूनावाली ढाणी, किशनपुरा, लखुवाली और जोरावरपुरा समेत अनेक गांवों के खेतों में आज भी 3-3 फुट पानी भरा हुआ है। भारी बारिश और सेमनाला से आए पानी के कारण बम्पर फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं। किसानों की मेहनत और निवेश डूब जाने के बावजूद अब तक न तो प्रशासनिक अधिकारी और न ही कोई नेता मौके पर पहुंचा। ऐसे में किसानों को मुआवजे की आस धूमिल होती जा रही है।
मक्कासर ने कहा कि सरकार और प्रशासन की चुप्पी किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। किसानों ने पूरी उम्मीद के साथ नरमा और ग्वार की बिजाई की थी। मौसम की मेहरबानी से इस बार पैदावार अच्छी होने की उम्मीद थी, लेकिन जलभराव ने सब कुछ चौपट कर दिया।
इस मौके पर बावरियावाली ढाणी के किसान दर्शन सिंह बराड़ का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि किसान ने महज 5 बीघा जमीन में नरमा की बिजाई की थी। उनकी फसल बम्पर थी, लेकिन नकली स्प्रे की वजह से पूरी की पूरी फसल जलकर नष्ट हो गई। इस पर भी प्रशासनिक अधिकारी मौके पर निरीक्षण तक करने नहीं पहुंचे। मक्कासर ने सवाल उठाया कि ऐसे हालात में उस किसान का परिवार कैसे गुजारा करेगा, जिसके पास खेती ही आय का मुख्य साधन है।
किसानों की व्यथा सुनकर कृषि मंत्री मीणा ने अधिकारियों को तुरंत मौके का मुआयना करने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसानों को मुआवजे से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा। मंत्री ने कहा कि नकली दवाइयों और स्प्रे बेचने वालों पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में कोई किसान इस तरह की समस्या का शिकार न हो।
जिला परिषद डायरेक्टर मनीष मक्कासर ने मंत्री की पहल का स्वागत करते हुए कहा कि अब उन्हें उम्मीद है कि उनकी आवाज सरकार तक पहुंचेगी और उन्हें राहत मिल सकेगी। हालांकि, किसानों ने यह भी चेतावनी दी कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
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