जाति प्रमाण-पत्र जारी करने की मांग पर 60वें दिन भी जारी रहा शांतिपूर्ण धरना, संघर्ष समिति का आंदोलन तेज

139

हनुमानगढ़। जिले में धानका/धाणका समाज के लोगों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का जाति प्रमाण-पत्र जारी नहीं किए जाने के विरोध में चल रहा आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। गुरुवार को आंदोलन के 60वें दिन भी जिला कलक्ट्रेट के बाहर समाज का शांतिपूर्ण धरना जारी रहा। मजदूरों, किसानों और व्यापारिक प्रतिनिधियों ने एकजुटता दिखाते हुए धानका समाज की मांगों के समर्थन में अपनी दुकानें और व्यापारिक गतिविधियाँ बंद रखीं।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि धानका समाज के लोग पीढ़ियों से कृषि उपज मंडियों में मेहनत-मजदूरी का कार्य कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते आए हैं। समाज के सदस्य अनाज की सफाई, तुलाई और लदान जैसे कार्यों से जुड़े हुए हैं। पहले तक इस समाज को अनुसूचित जनजाति वर्ग में मान्यता प्राप्त थी और जाति प्रमाण-पत्र जारी किए जाते थे, लेकिन हाल ही में प्रमाण-पत्र जारी करने पर मौखिक रोक लगाए जाने से समाज के हजारों लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि “धानका” और “धाणका” एक ही जनजातिय समूह से संबंधित हैं, केवल उच्चारण में अंतर है। समिति ने कहा कि पूर्व में “मीणा” और “मीना” समाज के मामले में भी इसी प्रकार का विवाद हुआ था, जिसे सरकार ने दोनों को समान मानते हुए सुलझाया था। उसी तर्ज पर धानका समाज को भी समान रूप से अनुसूचित जनजाति का लाभ दिया जाना चाहिए।

देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (Hindi News) पढ़ें। आप हमें फेसबुकट्विटरइंस्ट्राग्राम और यूट्यूब चैनल पर फॉलो कर सकते हैं।