वार्ड 57 के नागरिकों की बदहाल स्थितिरू बंद शौचालयों से महिलाओं को खुले में जाने की मजबूरी

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-नगरपरिषद की लापरवाही पर भड़के वार्डवासी, बोले – विकास पर करोड़ों खर्च हुए, अब सार सम्भाल भगवान भरोसे
हनुमानगढ़। जिले के हनुमानगढ़ जंक्शन क्षेत्र के वार्ड नंबर 57 के नागरिक इन दिनों अत्यंत दयनीय स्थिति में जीवन बिता रहे हैं। स्वच्छ भारत मिशन की सफलता की बात करने वाले सरकारी दावे इस वार्ड में खोखले साबित हो रहे हैं। हालत यह है कि वार्ड की महिलाएं और बच्चियां आज भी खुले में शौच जाने को मजबूर हैं, जबकि नगरपरिषद द्वारा बनाए गए सार्वजनिक शौचालय पिछले दो माह से बंद पड़े हैं।
वार्ड के लोगों का कहना है कि नगरपरिषद कर्मचारियों ने शौचालयों पर ताले जड़ दिए हैं, जिससे नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। महिलाएं और बच्चियां असहज परिस्थितियों में सुबह-शाम घर से दूर जाकर अपनी जरूरतें पूरी करने को मजबूर हैं। स्थानीय महिलाओं ने बताया कि उन्हें शौच के लिए करीब दो किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है, जो न केवल असुविधाजनक है बल्कि असुरक्षित भी है।
एक महिला निवासी ने कहा, “हमारे वार्ड में बने सार्वजनिक शौचालयों के ताले पिछले दो महीने से बंद हैं। मजबूरन हमें बच्चों सहित खुले में जाना पड़ता है। यह हमारे लिए शर्मनाक स्थिति है, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं।” महिलाओं ने यह भी बताया कि कई बार नगरपरिषद अधिकारियों से शिकायत की गई, मगर अब तक किसी ने कोई कार्रवाई नहीं की।
गौरतलब है कि वर्ष 2017 में हनुमानगढ़ जिला खुले में शौच से मुक्त घोषित किया गया था। लेकिन वार्ड 57 की स्थिति यह साबित करती है कि स्वच्छता अभियान की जमीनी हकीकत कुछ और ही है। इस वार्ड के कई हिस्सों में नालियों की सफाई महीनों से नहीं हुई, जिससे चारों ओर गंदगी फैली हुई है और मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। इससे डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है।
वार्डवासी विकास शर्मा ने नगरपरिषद की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला करते हुए कहा, “नगरपरिषद भगवान भरोसे चल रही है। करोड़ों रुपए विकास कार्यों पर खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन उन विकास कार्यों का रखरखाव करने वाला कोई नहीं है। अधिकारी आमजन की समस्याओं से पूरी तरह बेखबर हैं। जनता त्राहि-त्राहि कर रही है, मगर किसी को इसकी परवाह नहीं।”
स्थानीय निवासियों ने बताया कि शौचालयों को खोलने की मांग को लेकर कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन नगरपरिषद ने अब तक ध्यान नहीं दिया। कुछ नागरिकों ने कहा कि शौचालयों की देखरेख और साफ-सफाई की जिम्मेदारी तय नहीं की गई, जिसके चलते यह समस्या उत्पन्न हुई।
स्थिति से नाराज वार्डवासियों ने नारेबाजी करते हुए नगरपरिषद प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो वे परिषद कार्यालय के बाहर धरना देंगे।

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