भक्ति और श्रद्धा में डूबा छठवां दिन

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– स्वामी विजयानंद गिरि के प्रवचनों ने दिखाया मोक्ष का मार्ग
हनुमानगढ़। 
श्री गौशाला सेवा समिति, अबोहर रोड हनुमानगढ़ जंक्शन की ओर से चल रहे सात दिवसीय दुर्लभ सत्संग महोत्सव का छठा दिन मंगलवार को श्रद्धा और भक्ति में सराबोर रहा। प्रांगण में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भजन-कीर्तन की मधुर स्वर लहरियों और स्वामी श्री विजयानंद गिरि जी महाराज (ऋषिकेश वाले) के दिव्य प्रवचनों ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
छठे दिन के प्रवचन में स्वामी विजयानंद गिरि ने कहा कि मनुष्य यदि सभी कामनाओं से रहित हो या फिर सभी कामनाओं से युक्त हो अथवा केवल मोक्ष की ही कामना रखता हो, तो उसे भगवान का भजन करना चाहिए। भजन और स्मरण ही मनुष्य को कल्याण के मार्ग पर ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि यह संसार एक सराय है और मनुष्य इसमें मुसाफिर बनकर आया है। लेकिन अपने मन, बुद्धि और कर्मों से भटकता रहता है। आयु बढ़ने के साथ-साथ मनुष्य के भीतर काम, लोभ, मोह और अहंकार भी बढ़ते जाते हैं। इसलिए भगवान की आराधना और भजन के लिए उम्र का इंतजार करना उचित नहीं है।
समिति अध्यक्ष इन्द्र हिसारिया ने जानकारी दी कि यह सात दिवसीय सत्संग महोत्सव 24 से 30 अगस्त तक आयोजित किया जा रहा है। इसमें प्रतिदिन दो सत्र होते हैं। पहला सत्र दोपहर 3 से 4 बजे तक भजन-कीर्तन का होता है, जिसमें स्थानीय कलाकार और मंडलियां भक्तिरस की धारा बहाती हैं। इसके बाद सायं 4 से 6 बजे तक स्वामी विजयानंद गिरि जी का प्रवचन होता है। उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रांगण को आकर्षक ढंग से सजाया गया है और आरामदायक बैठने की विशेष व्यवस्था की गई है।
श्रद्धालुओं ने प्रवचन सुनने के बाद अपने अनुभव साझा किए। उनका कहना था कि स्वामी जी के शब्द आत्मा को शांति और ऊर्जा प्रदान करते हैं। उनके उपदेश जीवन की उलझनों को सुलझाने और मन को स्थिर करने का मार्ग दिखाते हैं। भक्तों ने इसे आत्मिक उन्नति का अद्वितीय अवसर बताया और कहा कि इस तरह के आयोजन समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले सिद्ध होते हैं।

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