ट्रक ऑपरेटरों ने उठाई आरसी बहाली व ई-रवाना चालान निरस्त करने की मांग’

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’-2 सितंबर को महापड़ाव कर कलेक्टर को सौंपेंगे ट्रकों की चाबियां’
हनुमानगढ़।
 जिला ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन हनुमानगढ़ ने मंगलवार को जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए ट्रक व्यवसाय से जुड़ी कई गंभीर समस्याओं के त्वरित समाधान की मांग की। एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्याओं का हल समय पर नहीं निकाला गया तो 2 सितंबर को जिलेभर के ट्रक संचालक महापड़ाव डालकर सभी ट्रकों की चाबियां जिला कलेक्टर को सौंप देंगे। इससे जिले की परिवहन व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो जाएगी और सरकार को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
एसोसिएशन के प्रधान जुगल राठी ने बताया कि ट्रक व्यवसाय देश की अर्थव्यवस्था और सरकारी राजस्व का बहुत बड़ा साधन है, लेकिन विभागीय त्रुटियों और दोहरे रवैये के कारण यह व्यवसाय लगातार संकट में पहुंचता जा रहा है। राज्य सरकार के दो विभाग कृ खनिज विभाग और परिवहन विभाग कृ की नीतियां ट्रक संचालकों पर बोझ डाल रही हैं। खनिज विभाग द्वारा ट्रकों को ओवरलोडिंग के लिए विवश किया जाता है, वहीं परिवहन विभाग उन्हीं आंकड़ों के आधार पर ई-रवाना चालान जारी करता है और चालान के आधार पर ट्रकों की आरसी ब्लॉक या निरस्त कर देता है। यह दोहरा रवैया ट्रक मालिकों और चालकों के साथ सीधा अन्याय है।
एसोसिएशन के पदाधिकारी लीलाधर शर्मा ने ज्ञापन में स्पष्ट कहा कि पूरे प्रदेश में खनिज हो या अन्य उत्पाद, सभी की ओवरलोडिंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। ई-रवाना चालान के कारण जिन ट्रकों की आरसी ब्लॉक या निरस्त की गई है, उन्हें तुरंत बहाल किया जाए और चालान माफ किए जाएं। उन्होंने कहा कि ओवरलोडिंग के मामलों में केवल ट्रक मालिक या चालक को दंडित करना अनुचित है। इसकी जिम्मेदारी समान रूप से माल भरवाने वाले, परिवहन कराने वाले और माल उतारने वाले सभी पक्षों पर तय की जानी चाहिए।
यूनियन ने मांग रखी कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी की 2011 की धारा और स्टेट हाईवे की 2015 की धारा को सख्ती से लागू किया जाए। इन प्रावधानों के अनुसार टोल नाकों पर ओवरलोड ट्रक का माल उतरवाकर अंडरलोड परिवहन की व्यवस्था करनी चाहिए और ऐसे वाहनों से दस गुना टोल शुल्क वसूलना चाहिए। इसी तरह जिस क्षेत्र से ओवरलोड ट्रक गुजरता है, वहां के संबंधित डीटीओ की जवाबदेही तय होनी चाहिए और उन पर आपराधिक मुकदमा दर्ज होना चाहिए। ओवरलोडिंग रोकने के लिए पूरे राजस्थान में पुलिस विभाग को नाके लगाकर कार्यवाही करने की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।
एसोसिएशन ने यह भी कहा कि खनिज, परिवहन और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम बनाकर पल्लू, मसीतावाली हैड, तलवाड़ा, पीलीबंगा, चोहिलावाली सहित अन्य प्रमुख स्थानों पर स्थाई नाके स्थापित किए जाएं। इन स्थानों पर अवैध गतिविधियों और ओवरलोडिंग की रोकथाम हो सकेगी। साथ ही अवैध रूप से व्यावसायिक गतिविधियां कर रहे ट्रैक्टरों पर तुरंत रोक लगाई जानी चाहिए, क्योंकि ये ट्रैक्टर न केवल नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं बल्कि ट्रक व्यवसाय को भी प्रभावित कर रहे हैं।
ट्रक ऑपरेटरों ने कहा कि यह पूरा व्यवसाय हजारों परिवारों की आजीविका का साधन है और सरकार के लिए भी भारी राजस्व का स्रोत है। इसके बावजूद विभागीय नीतियों और अव्यवस्थाओं के कारण यह उद्योग बर्बादी की ओर धकेला जा रहा है। यदि सरकार ने समय रहते कदम नहीं उठाए तो ट्रक व्यवसायी आंदोलन को और उग्र रूप देंगे।

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