– युवाओं को बताया संघर्ष और प्रेरणा का संदेश
हनुमानगढ़। महाकवि वीर राव चंद्रवरदाई की 877वीं जयंती मंगलवार को राव चंद्रवरदाई भाट चौक पर सर्वभाट राव ऑल इंडिया फाउंडेशन की ओर से हर्षाेल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर चौक पर पुष्प वर्षा की गई और जयकारों से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा। कार्यक्रम की अध्यक्षता फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राम प्रताप भाट उर्फ प्रकाश नाथ ने की।
राम प्रताप उर्फ प्रकाशनाथ ने कहा कि वीर चंद्रवरदाई का जीवन युवाओं के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा। उन्होंने अपने साहित्य और शौर्य से राष्ट्र की सेवा की। उनके जीवन की गाथाएं आज भी समाज को संघर्ष और साहस का संदेश देती हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे वीर चंद्रवरदाई के आदर्शों पर चलकर समाज और राष्ट्रहित में योगदान दें। उन्होंने कहा कि कथा के अनुसार, जब मोहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज चौहान को बंदी बना लिया और उनकी आंखें फोड़ दीं, तब चंद्रवरदाई ने एक योजना बनाई। गौरी ने पृथ्वीराज की वीरता की चर्चा सुनी थी, इसलिए उसने अंधे होने के बावजूद तीर चलाने का आदेश दिया।
तब चंद्रवरदाई ने पृथ्वीराज चौहान को लक्ष्य बताने के लिए ये प्रसिद्ध पंक्तियां बोलीं
“चार बांस चौबीस गज, अष्ट उंगल प्रमाण।
ता ऊपर सुलतान है, मत चूको चौहान॥”
इन पंक्तियों के आधार पर पृथ्वीराज ने दिशा और दूरी का अनुमान लगाया और अपने शर से मोहम्मद गौरी का वध कर दिया। इसके बाद चंद्रवरदाई ने भी स्वयं अपने प्राण त्याग दिए।
यह प्रसंग वीरता, मित्रता और स्वाभिमान का प्रतीक माना जाता है, और वीर चंद्रवरदाई की अमर काव्य पंक्तियां आज भी भारतीय इतिहास और लोककथाओं में गूंजती हैं।
कार्यक्रम के दौरान एएसआई प्रेम कुमार भाट ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि समाज के महापुरुषों ने जिस मार्ग का अनुसरण किया, वही मार्ग हमारे लिए सही दिशा दिखाता है। हमें उनके आदर्शों पर चलते हुए सामाजिक सद्भाव और राष्ट्र सेवा की भावना को बढ़ाना चाहिए। जिलाध्यक्ष विजय भाट ने युवाओं को शिक्षित व संगठित करने पर बल देते हुए कहा कि युवाओं को सरकारी नौकरियों में सफलता के लिए गंभीर प्रयास करने और उचित कोचिंग सेवाओं का लाभ उठाने की सलाह दी।
इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों और समाजजनों ने वीर चंद्रवरदाई को नमन किया और पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। वक्ताओं ने कहा कि वीर चंद्रवरदाई जैसे महापुरुषों के योगदान को याद करना नई पीढ़ी को इतिहास और संस्कृति से जोड़ने का कार्य है।
कार्यक्रम में मंगतराम, मदनलाल, बलराम, संदीप, विजय, जगदीश, अविनाश, पवन कुमार, राकेश, रमन, सुरेंद्र, शिशुपाल, मनमोहन, राकेश योगी, रमेश, बनवारी लाल, दिनेश, अनिल, दीपक और अजय सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। अंत में रामस्वरूप भाटी ने आए हुए सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
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