अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग (america iran war) का आज 13वां दिन हैं। दोनों तरफ से हमले के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है। ईरान संघर्ष पर ट्रंप ने कहा, ‘जब भी मैं चाहूंगा कि युद्ध खत्म हो, यह खत्म हो जाएगा।’ ट्रंप ने एक्सियोस को दिए एक इंटरव्यू में यह भी कहा कि हाल के मिलिट्री हमलों के बाद ईरान में US के लिए टारगेट करने के लिए प्रैक्टिकली कुछ भी नहीं बचा है।
ट्रंप के इस बयान के बाद आईआरजीसी के डिप्टी कमांडर अली फदावी ने कहा ‘कल से ट्रंप खुद युद्धविराम की घोषणा करने की कोशिश कर रहे हैं। अगर दुश्मन युद्ध जीत गया होता तो वह युद्धविराम के लिए पूरी दुनिया से मध्यस्थता करने की गुहार नहीं लगाता।’
दूसरी ओर ईरान के राष्ट्रपति मसूज पजशकियान ने कहा कि जंग खत्म करने के लिए तीन शर्तें जरूरी हैं 1. ईरान के कानूनी अधिकारों को मान्यता दी जाए, 2. युद्ध के नुकसान की भरपाई की जाए, 3. भविष्य में हमला न होने की अंतरराष्ट्रीय गारंटी मिले।
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भारत आ रहे जहाज को ईरान ने निशाना बनाया
इससे पहले ईरान गार्ड्स ने होर्मुज में लाइबेरिया के झंडे वाले जहाज और थाई बल्क कैरियर पर हमला किया। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने बुधवार को कहा कि उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट में लाइबेरिया के झंडे वाले एक जहाज और एक थाई बल्क कैरियर पर हमला किया, क्योंकि उन्होंने रुकने की चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया था। वहीं दूसरी खबर ये भी आ रही है कि ईरान ने बुधवार रात फारस की खाड़ी में ‘सेफसी विष्णु’ नाम के एक अमेरिकी तेल टैंकर (जहाज) पर हमला किया। इसमें एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक हमले में आत्मघाती नाव (सुसाइड बोट) का इस्तेमाल किया गया। जहाज पर मौजूद बाकी 27 लोग सुरक्षित बचा लिए गए। ये जहाज मार्शल आइलैंड के झंडे के तहत चल रहा था। फिलहाल मारे गए भारतीय नागरिक की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।
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ट्रम्प के पास जंग खत्म करने का कोई प्लान नहीं
अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने एक इंटरव्यू में कहा था कि डोनाल्ड ट्रंप को यह चिंता नहीं थी कि अगर युद्ध हुआ तो मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई पर असर पड़ेगा या तेल के बाजार में बड़ी गड़बड़ी होगी। राइट ने कहा था कि पिछले साल जून में जब इजराइल और अमेरिका ने ईरान पर हमले किए थे, तब भी तेल बाजार पर ज्यादा असर नहीं पड़ा था। उनके मुताबिक उस समय तेल की कीमत थोड़ी बढ़ी थी, लेकिन जल्द ही नीचे आ गई थी।
ट्रम्प के दूसरे सलाहकार भी निजीतौर पर इसी तरह की राय रखते थे। उनका मानना था कि चेतावनियां बढ़ा-चढ़ाकर दी जा रही हैं और ईरान शायद ही इस बार तेल ले जाने वाले समुद्री रास्तों को बंद करेगा, जिनसे दुनिया की लगभग 20% तेल सप्लाई गुजरती है।
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लेकिन हाल के दिनों में यह आकलन गलत साबित होता दिख रहा है। ईरान ने धमकी दी कि वह होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल के टैंकरों पर हमला कर सकता है। यह वही अहम समुद्री रास्ता है जिससे होकर फारस की खाड़ी से निकलने वाले सभी जहाज गुजरते हैं।
आर्थिक संकट से बचने का ट्रंप के पास कोई मास्टरप्लान नहीं
ट्रम्प प्रशासन के अधिकारी इस बात को लेकर परेशान है कि ट्रंप के पास अब युद्ध रोकने का कोई प्लान नहीं है। क्योंकि ट्रम्प बार-बार कह रहे हैं कि सैन्य अभियान पूरी तरह सफल रहा है। इस बीच ट्रम्प ने यह भी कहा कि तेल की सप्लाई पर युद्ध के असर से वह नाराज हैं। उन्होंने फॉक्स न्यूज से कहा कि तेल टैंकरों के क्रू मेंबर्स को ‘थोड़ी हिम्मत दिखानी चाहिए’ और होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते रहना चाहिए। हालांकि ट्रम्प ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में चेतावनी दी कि अगर ईरान ने दुनिया की एनर्जी सप्लाई रोकने की कोशिश की तो अमेरिका और भी कड़ा कदम उठाएगा।
कुछ सैन्य सलाहकारों ने युद्ध से पहले चेतावनी दी थी कि ईरान बहुत आक्रामक जवाब दे सकता है और अमेरिका-इजराइल के हमले को अपने अस्तित्व के लिए खतरा मान सकता है। लेकिन कुछ अन्य सलाहकारों को भरोसा था कि अगर ईरान की टॉप लीडरशिप को मार दिया गया तो उनकी जगह आने वाले नेता ज्यादा व्यावहारिक होंगे और युद्ध खत्म करने की कोशिश करेंगे।

जब ट्रम्प को बताया गया कि युद्ध की वजह से तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, तो उन्होंने माना कि ऐसा हो सकता है, लेकिन इसे थोड़े समय की समस्या बताते हुए ज्यादा महत्व नहीं दिया। उन्होंने ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट और वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट से कहा कि अगर तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो उससे निपटने के लिए जरूरी विकल्प तैयार रखें।
इन विकल्पों में सरकार की तरफ से कंपनियों को राजनीतिक जोखिम का बीमा देना और अमेरिकी नेवी के जरिए जहाजों को सुरक्षा देना जैसे कदम शामिल हैं, लेकिन अभी तक नौसेना की ऐसी एस्कॉर्ट व्यवस्था शुरू नहीं हुई है।
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