Explained: जानिए ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की जान के पीछे क्यों पड़े थे इजराइल-अमेरिका?

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मिडिल ईस्ट की राजनीति में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई (Supreme Leader Khamenei) सबसे ताकतवर चेहरा माने जाते थे। ईरान की विदेश नीति, परमाणु कार्यक्रम, सैन्य रणनीति और क्षेत्रीय हस्तक्षेप जैसे हर अहम फैसले पर अंतिम मुहर उन्हीं की लगती थी। यही वजह थी कि इजराइल और अमेरिका की नजरें सीधे खामेनेई पर टिकी रहती थीं।

अमेरिका-इजराइल ने 28 फरवरी की स्ट्राइक में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो चुकी है। लेकिन यह भी सच है कि सिर्फ खामेनेई की मौत से पुराने विवाद खत्म नहीं होते। आने वाले समय में ईरान और मिडिल ईस्ट की राजनीति किस दिशा में जाएगी, यह देखना अहम होगा। चलिए जानिए आखिर इजराइल-अमेरिका खामेनेई के पीछे क्यों पड़े थे।

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1. परमाणु कार्यक्रम सबसे बड़ा कारण
इजराइल का कहना रहा है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम उसके लिए बड़ा खतरा है। पश्चिमी देशों को शक है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की दिशा में काम कर रहा है, हालांकि ईरान कहता है कि उसका कार्यक्रम सिर्फ बिजली बनाने के लिए है। इजराइल का मानना था कि जब तक खामेनेई सत्ता में हैं, यह कार्यक्रम पूरी तरह बंद नहीं होगा। इसलिए कुछ लोगों का मानना था कि नेतृत्व बदलने से हालात बदल सकते हैं।

2. IRGC और दूसरे देशों में दखल
खामेनेई के समय में ईरान ने अपनी सेना की खास शाखा IRGC को काफी मजबूत किया। अमेरिका ने 2019 में इसे आतंकी संगठन घोषित किया था। ईरान ने इराक, सीरिया, लेबनान और यमन में अपना असर बढ़ाया। हिजबुल्लाह, हमास और हूती जैसे समूहों को समर्थन देने के आरोप भी लगे। इजराइल का कहना है कि उसके खिलाफ होने वाले हमलों के पीछे ईरान का हाथ होता है।

3. 2025 के आंदोलन
2025 के आखिर में ईरान में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन हुए। कुछ लोगों ने खामेनेई को हटाने की मांग भी की।अमेरिका और इजराइल ने इन प्रदर्शनकारियों के समर्थन में बयान दिए। डोनाल्ड ट्रम्प और बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ईरान की जनता को अपने भविष्य का फैसला खुद करना चाहिए। ईरान की सरकार ने इन प्रदर्शनों को सख्ती से दबा दिया। जून 2025 में ट्रम्प ने कहा था कि खामेनेई आसान निशाना हैं। इस बयान के बाद काफी विवाद हुआ। इसे ईरान पर दबाव बनाने की कोशिश माना गया।

4. खामेनेई के बाद क्या होगा?
रिपोर्ट्स में अली लारीजानी का नाम सामने आया, जो सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी रहे हैं। कहा गया कि खामेनेई ने हाल में उनकी जिम्मेदारियां बढ़ाई थीं। लेकिन ईरान में नया सुप्रीम लीडर चुनना आसान नहीं है। सेना, धार्मिक नेताओं और राजनीतिक गुटों के बीच मतभेद हो सकते हैं। अगर हालात बिगड़ते हैं, तो पूर्व शाह के बेटे रजा पहलवी भी सामने आ सकते हैं। वे अभी अमेरिका में रहते हैं और ईरान में लोकतांत्रिक सरकार की बात करते हैं।

5. इजराइल-ईरान की पुरानी दुश्मनी

दोनों देशों के बीच लंबे समय से तनाव है।

  • ईरान इजराइल को मान्यता नहीं देता।
  • फिलिस्तीन का खुलकर समर्थन करता है।
  • दोनों के बीच कई बार गुप्त हमले और साइबर अटैक की खबरें आती रही हैं।

खामेनेई के दौर में ईरान ने मिडिल ईस्ट में अपना असर बढ़ाया। ऐसे में अगर नेतृत्व बदलता है, तो पूरे इलाके की राजनीति पर असर पड़ सकता है।

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जानिए कौन थे ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई

  • अयातुल्ला अली खामेनेई का जन्म 19 अप्रैल 1939 को ईरान के धार्मिक शहर मशहद में एक मौलवी परिवार में हुआ था। वे खोमैनी शाह की नीतियों के खिलाफ थे और इस्लामी शासन की वकालत करते थे।
  • 1963 में शाह के खिलाफ भाषण देने पर उन्हें गिरफ्तार भी किया गया। धीरे-धीरे वे सरकार विरोधी आंदोलन का बड़ा चेहरा बन गए और खोमैनी के भरोसेमंद सहयोगी माने जाने लगे।
  • 1979 में ईरान में इस्लामी क्रांति हुई और शाह की सरकार गिर गई। खोमैनी देश लौटे और नई इस्लामी सरकार बनाई। खामेनेई को क्रांतिकारी परिषद में जगह मिली और बाद में उप रक्षामंत्री बनाया गया।
  • 1981 में तेहरान की एक मस्जिद में भाषण के दौरान खामेनेई पर बम हमला हुआ। उसी साल एक और बम धमाके में तत्कालीन राष्ट्रपति की मौत हो गई। इसके बाद हुए चुनाव में खामेनेई भारी बहुमत से जीतकर ईरान के तीसरे राष्ट्रपति बने।
  • 1989 में खोमैनी के निधन के बाद खामेनेई को देश का सर्वोच्च नेता यानी ‘रहबर’ बनाया गया। इसके लिए संविधान में बदलाव भी किया गया। समर्थक उन्हें इस्लामी व्यवस्था का मजबूत रक्षक मानते हैं, जबकि आलोचक उन पर सख्त और कट्टर शासन चलाने का आरोप लगाते हैं।

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