इजरायल ने अचानक क्यों किया ईरान पर इतना बड़ा हमला? जानें क्या है ट्रंप का इरादा

169

इजरायल और अमेरिका (Iran israel us war )ने 28 फरवरी 2026 को ईरान पर भीषण हमला किया है। इस दौरान ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई के घर और ऑफिस को भी निशाना बनाया गया है। ईरान के ऊपर एक साथ कई मिसाइलें दागी गई हैं और उसके परमाणु प्वाइंट को भी निशाना बनाया गया है। हालांकि इस हमले में अभी खामेनेई बच गए हैं और छिपे हुए हैं।

यूएस-इजराइल के हमले के बाद ईरान ने जबरदस्त पलटवार किया है। साथ ही उसने सीधी धमकी दी है कि हम ऐसा जवाब देंगे, जिससे अमेरिका और इजराइल अपने किए पर पछताएंगे। इतिहास गवाह है कि हमने कभी घुटने नहीं टेके। बता दें ईरान (Iran Attack ) ने ऑपरेशन फतह-ए-जंग के तहत मिडिल ईस्ट के 7 देशों पर हमला किया है।

ईरान ने सबसे पहले इजराइल पर अटैक किया। उसके बाद सऊदी, बहरीन, कतर, जॉर्डन, यूएई और कुवैत स्थित अमेरिकी बेस पर अटैक किया। ईरान ने इन देशों के अमेरिकी बेस को तबाह कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने पलटवार करते हुए करीब 400 मिलाइलें दागी हैं।

ये भी पढ़ें: Iran ने किया पलटवार, सऊदी से बहरीन तक…मिडिल ईस्ट के 7 देशों पर किया हमला

ईरान पर हमले की असली जड़ क्या है?
ईरान पर हुए हमलों के पीछे सबसे बड़ा कारण उसका परमाणु कार्यक्रम माना जा रहा है। ईरान लंबे समय से खुद को परमाणु ताकत के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यही बात अमेरिका और इजरायल की चिंता बढ़ा रही है। दोनों देशों को आशंका है कि कहीं ईरान गुपचुप तरीके से परमाणु हथियार विकसित न कर ले।

ये भी पढ़ें: Iran-Israel War: मिडिल ईस्ट दहल उठा, इजरायल-अमेरिका ने किया ईरान पर बड़ा हमला

पहले भी ईरान पर यूरेनियम संवर्धन को लेकर सवाल उठते रहे हैं। बताया जाता है कि उसने काफी मात्रा में संवर्धित यूरेनियम इकट्ठा किया है, जिसका इस्तेमाल परमाणु बम बनाने में हो सकता है। जून 2025 में भी इसी मुद्दे को लेकर उस पर हमला हुआ था, लेकिन उसके बाद भी तेहरान ने अपना कार्यक्रम नहीं रोका।

अमेरिका और इजरायल की कोशिश है कि ईरान की परमाणु क्षमता को पूरी तरह खत्म कर दिया जाए, ताकि वह दोबारा इस दिशा में आगे न बढ़ सके। यही वजह है कि हालिया हमलों को उसके परमाणु इरादों से जोड़कर देखा जा रहा है।

प्रॉक्सी ग्रुप्स भी बड़ी वजह
तनाव की एक अहम वजह ईरान का उन संगठनों को समर्थन देना भी है, जो इजरायल और अमेरिका के खिलाफ सक्रिय रहे हैं। लेबनान में हिजबुल्लाह, गाजा में हमास, यमन में हूती विद्रोही और इराक-सीरिया की शिया मिलिशिया इन सभी को ईरान का समर्थन मिलने के आरोप लगते रहे हैं।

2023-2024 के गाजा संघर्ष के दौरान इन समूहों ने इजरायल और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया था। इससे वॉशिंगटन और तेल अवीव में ईरान के प्रति नाराजगी और ज्यादा बढ़ी। यही परोक्ष टकराव अब सीधे टकराव में बदलता नजर आ रहा है।

पंचदूत अब व्हाट्सएप चैनल पर उपलब्ध है। लिंक पर क्लिक करें और अपने चैट पर पंचदूत की सभी ताज़ा खबरें पाएं।

अमेरिका-ईरान बातचीत क्यों अटकी?
पिछले कुछ समय से अमेरिका, ईरान पर दबाव बना रहा था कि वह अपना परमाणु कार्यक्रम बंद करे, संवर्धित यूरेनियम अंतरराष्ट्रीय निगरानी में सौंप दे और मिसाइल कार्यक्रम के साथ-साथ प्रॉक्सी संगठनों को समर्थन देना बंद करे।

हालांकि, ईरान ने इन शर्तों को मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद अमेरिकी नेतृत्व की ओर से सख्त रुख अपनाया गया और साफ संकेत दिए गए कि अगर बातचीत से हल नहीं निकला तो कार्रवाई की जाएगी।

कुल मिलाकर, परमाणु महत्वाकांक्षा, क्षेत्रीय राजनीति और प्रॉक्सी संघर्ष इन तीन वजहों ने हालात को इतना गंभीर बना दिया है कि अब पूरा मिडिल ईस्ट तनाव की आग में घिरा नजर आ रहा है।

 

देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (Hindi News) पढ़ें। आप हमें फेसबुकट्विटरइंस्ट्राग्राम और यूट्यूब चैनल पर फॉलो कर सकते हैं।