भारत खुद को 5,000 साल पुरानी सभ्यता और “अतिथि देवो भव” की परंपरा वाला देश बताता है, लेकिन हकीकत यह है कि देश लगातार दुनिया के टॉप टूरिस्ट डेस्टिनेशंस (India Tourism Reality) की सूची में पिछड़ता जा रहा है। 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, सिर्फ नौ महीनों में भारत में केवल 61 लाख विदेशी पर्यटक पहुंचे। वहीं, अकेले पेरिस शहर में एक साल में करीब 1.8 करोड़ अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आते हैं, जबकि भारत से छोटे देश वियतनाम में भी लगभग 2 करोड़ विदेशी सैलानी पहुंचे।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत अब न विदेशी और न ही घरेलू पर्यटकों के लिए सस्ता विकल्प रह गया है। महंगी घरेलू फ्लाइट्स, ओवरप्राइस्ड होटल, खराब ट्रांसपोर्ट व्यवस्था और सर्विस क्वालिटी बड़ी वजहें हैं। इसके अलावा, प्रदूषण, सार्वजनिक जगहों पर गंदगी, कमजोर सिविक सेंस और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मामले भारत की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
टूरिज्म जानकारों का मानना है कि पर्यटन सिर्फ ऐतिहासिक स्थलों से नहीं, बल्कि सुरक्षित, साफ और सम्मानजनक अनुभव से चलता है। जब तक इन बुनियादी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जाएगा, तब तक भारत का टूरिज्म सेक्टर कमजोर ही बना रहेगा।
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