Dussehra 2025: भारत के 5 दुर्लभ मंदिर जहाँ रावण की होती है पूजा, देखिए तस्वीरें..

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दशहरा ( Ravan Temples) आते ही ज़हन में भगवान राम द्वारा रावण वध की कहानी ताज़ा हो जाती है। पर भारत में कुछ ऐसे मंदिर भी हैं, जहाँ रावण को खलनायक नहीं बल्कि विद्वान और भगवान शिव का परम भक्त मानकर पूजा जाता है। उत्तर प्रदेश से लेकर मध्य प्रदेश और राजस्थान तक फैले ये मंदिर न सिर्फ धार्मिक महत्व रखते हैं, बल्कि अपनी अनोखी परंपराओं और वास्तुकला की वजह से यात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र भी हैं। आइए जानते हैं इन अद्भुत मंदिरों के बारे में-

1. रावण महादेव मंदिर, बिसरख, ग्रेटर नोएडा (Ravan Mahadev Temple)
ग्रेटर नोएडा के पास बिसरख गाँव को रावण की जन्मस्थली माना जाता है। यहाँ का रावण महादेव मंदिर भक्तों के बीच बेहद लोकप्रिय है। इस मंदिर में शिवलिंग पर पूजा-अर्चना की जाती है और रावण को उसकी विद्या, शक्ति और भगवान शिव के प्रति भक्ति के लिए याद किया जाता है। दशहरे के दौरान यहाँ मेले और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं, जो श्रद्धालुओं और पर्यटकों दोनों को आकर्षित करते हैं।

2. काकीनाडा रावण मंदिर, आंध्र प्रदेश (Kakinada Ravan Temple)
आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में स्थित यह मंदिर रावण की अद्वितीय भक्ति का प्रतीक है। यहाँ दशहरे के दौरान विशेष अनुष्ठान, भजन और सामूहिक भोज आयोजित किए जाते हैं। मंदिर की स्थापत्य कला, नक्काशीदार स्तंभ और गर्भगृह में विराजमान रावण की मूर्ति इसे और भी खास बनाते हैं। श्रद्धालु मानते हैं कि यहाँ पूजा करने से ज्ञान और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

3. रावण मंदिर, मंदसौर, मध्य प्रदेश (Ravan Temple)
मध्य प्रदेश के मंदसौर में स्थित यह मंदिर रावण और मंदोदरी के विवाह स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। मंदिर में रावण की पूजा बुद्धि, साहस और बुराइयों से रक्षा के लिए की जाती है। इसकी दीवारों और मूर्तियों पर रावण के जीवन और उनकी शिव भक्ति की झलक देखने को मिलती है। दशहरे के मौके पर यहाँ विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होता है।

4. रावणग्राम रावण मंदिर, विदिशा, मध्य प्रदेश (Ravangram Ravana Temple)
विदिशा के रावणग्राम में स्थित यह मंदिर कम प्रसिद्ध होने के बावजूद बेहद खास है। यहाँ दशहरे पर विशेष समारोह होते हैं, जहाँ रावण की विद्वता और शिव भक्ति को याद किया जाता है। मंदिर की प्राचीन नक्काशियाँ और स्थानीय परंपराएँ इसे धार्मिक और ऐतिहासिक दोनों दृष्टिकोणों से महत्वपूर्ण बनाती हैं।

5. मांडोर रावण मंदिर, जोधपुर, राजस्थान (Mandore Ravan Temple)
राजस्थान के जोधपुर स्थित मांडोर रावण मंदिर रावण की पत्नी मंदोदरी के मायके से जुड़ा हुआ है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यहाँ रावण को “जमाई” मानकर पूजा जाता है। मंदिर की वास्तुकला राजस्थान की शाही झलक पेश करती है, जिसमें बारीक पत्थर की नक्काशी और रावण के जीवन की झलकियाँ दिखाई देती हैं। दशहरे के दौरान यहाँ का माहौल आध्यात्मिकता और उत्सव का अनूठा संगम बन जाता है।

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ये मंदिर हमें याद दिलाते हैं कि रावण केवल “बुराई का प्रतीक” ही नहीं थे, बल्कि एक महान विद्वान और शिवभक्त भी थे। इसलिए भारत के अलग-अलग हिस्सों में दशहरे पर जहाँ एक ओर रावण दहन होता है, वहीं दूसरी ओर उनकी पूजा भी उतनी ही श्रद्धा और आस्था से की जाती है।

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