गणेश चतुर्थी का उत्सव बस दो दिनों में शुरू होने वाला है, जिसको लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। गणपति बप्पा 27 अगस्त को पधारेंगे और इसी बीच मुंबई के प्रसिद्ध गणपति लालबागचा राजा (Lalbaugcha Raja) की पहली झलक 24 अगस्त को भक्तों को देखने को मिली है। इसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर छा गई है। आप भी कीजिए घर बैठे गणपति लालबागचा राजा के दर्शन…
लालबागचा राजा को न सिर्फ मुंबई बल्कि पूरे देश का ‘राजा’ कहा जाता है। साथ ही, उन्हें ‘नवसाला का राजा’ और मन्नत का राजा भी कहते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो यहां आकर गणेश पूजन करता है, बप्पा उनकी मनोकामनाएं अवश्य पूरी करते हैं।
किसानों के संघर्ष से जुड़ी है लालबागचा राजा की स्थापना (1934)
लालबाग इलाके में पहले कपड़ा मिल मजदूरों का बाज़ार था, जिसे ब्रिटिश सरकार ने बंद करवा दिया। मजदूरों और स्थानीय विक्रेताओं ने अपनी आजीविका वापस पाने के लिए गणपति स्थापना का संकल्प लिया। इसी तरह 1934 में लालबागचा राजा की स्थापना हुई। यानी यह सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक आंदोलन का प्रतीक भी है।
ये भी पढ़ें: कैसा दिखता है रणबीर-आलिया का 250 करोड़ का नया बंगला? देखिए तस्वीर

मूर्ति का रूप कभी नहीं बदलता
बाकी पंडालों में गणेश जी की मूर्तियों का डिज़ाइन हर साल बदलता है, लेकिन लालबागचा राजा की मूर्ति का स्वरूप 1935 से आज तक बिल्कुल वही है। इसका कारण है स्थापना समिति ने माना कि बप्पा का यह रूप ही चमत्कारिक और मनोकामना पूरी करने वाला है।
विशाल चांदी का सिंहासन:
लालबागचा राजा को जिस सिंहासन पर विराजमान किया जाता है, वह शुद्ध चांदी से बना है और उसका वजन लगभग 25 किलो से भी ज्यादा है।
सजावट में नहीं, भाव में खास
बाकी मंडल जहां करोड़ों रुपये खर्च कर थीम-आधारित सजावट करते हैं, वहीं लालबागचा राजा की पहचान भव्यता से नहीं, बल्कि श्रद्धा से है। लोग कहते हैं कि यहां आकर “फैंसी डेकोरेशन” से ज्यादा बप्पा की आंखों में सीधे संवाद का अनुभव होता है।

चमत्कारों की कहानियां
भक्त मानते हैं कि यहां मांगी गई मुराद कभी खाली नहीं जाती। फिल्मी सितारे, नेता, बिजनेसमैन, क्रिकेटर सब यहां आते हैं। कई मशहूर हस्तियां कहती हैं कि उनकी सफलता के पीछे लालबागचा राजा का आशीर्वाद है।

जल-समाधि नहीं, समुद्र विसर्जन
मुंबई के ज़्यादातर गणपति विसर्जन पास के तालाब या झीलों में होते हैं, लेकिन लालबागचा राजा को हमेशा गिरगांव चौपाटी ले जाया जाता है और समुद्र में विसर्जित किया जाता है। इस यात्रा में लाखों लोग शामिल होते हैं और पूरा मार्ग “गणपति बप्पा मोरया” के जयघोष से गूंज उठता है।
ताजा अपडेट्स के लिए आप पञ्चदूत मोबाइल ऐप डाउनलोड कर सकते हैं, ऐप को इंस्टॉल करने के लिए यहां क्लिक करें.. इसके अलावा आप हमें फेसबुक, ट्विटर, इंस्ट्राग्राम और यूट्यूब चैनल पर फॉलो कर सकते हैं।





































