ईरान हमले का असली मास्टरमाइंड बना AI, ट्रंप की ‘टेक वॉर मशीन’ के टूल्स जानकर चौंक जाएंगे आप

ईरान हमले ने दुनिया को दिखा दिया कि भविष्य का युद्ध सिर्फ मैदान में नहीं, डेटा और एल्गोरिद्म की दुनिया में भी लड़ा जाएगा।

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दुनिया अब सिर्फ मिसाइलों और फाइटर जेट्स से नहीं, बल्कि एल्गोरिद्म और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से भी लड़ रही है। 28 फरवरी को ईरान (AI in Iran Attack) पर हुए हमले के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि क्या अमेरिकी सेना ने इस ऑपरेशन में AI का इस्तेमाल किया? रिपोर्ट्स इशारा करती हैं कि Anthropic के Claude मॉडल्स ने हमले से पहले अहम भूमिका निभाई। लेकिन कहानी सिर्फ यहीं खत्म नहीं होती। असल तस्वीर कहीं ज्यादा बड़ी और चौंकाने वाली है।

अमेरिकी रक्षा विभाग पिछले कुछ सालों में कई बड़ी टेक कंपनियों के साथ मिलकर युद्ध के लिए AI सिस्टम तैयार कर रहा है। जुलाई 2025 में करीब 200 मिलियन डॉलर तक के कॉन्ट्रैक्ट जारी किए गए। मकसद साफ था AI को वॉर प्लानिंग, इंटेलिजेंस और राष्ट्रीय सुरक्षा के हर स्तर पर शामिल करना। Anthropic के अलावा OpenAI, Google और एलन मस्क की xAI भी इस इकोसिस्टम का हिस्सा हैं।

ईरान हमले में AI बना अमेरिका का डिजिटल सलाहकार: Claude AI ने क्या-क्या ‘सर्च’ और एनालाइज किया? रिपोर्ट्स के मुताबिक, Claude जैसे मॉडल्स का इस्तेमाल सीधे हथियार चलाने के लिए नहीं हुआ, बल्कि इन कामों में किया गया:

  • सैटेलाइट इमेजरी, इंटरसेप्टेड कम्युनिकेशन और सिग्नल इंटेलिजेंस का विश्लेषण
  • संभावित सैन्य ठिकानों और रणनीतिक परिसरों की पहचान
  • टारगेट की प्राथमिकता तय करना और क्रॉस-रेफरेंस करना
  • हमले के संभावित नतीजों, जोखिम और कोलैटरल डैमेज का अनुमान लगाना

यानी AI ने डेटा के पहाड़ को मिनटों में खंगालकर सैन्य अधिकारियों को फैसले लेने के लिए साफ तस्वीर दी।

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Claude की एंट्री कैसे हुई अमेरिकी रक्षा तंत्र में?
2024 के आखिर में Anthropic ने Palantir और Amazon Web Services के साथ मिलकर Claude को अमेरिकी डिफेंस और इंटेलिजेंस नेटवर्क में उतारा। बाद में Claude Gov नाम का खास वर्जन लॉन्च किया गया, जिसे सरकारी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कामों के लिए डिजाइन किया गया था। 2025 के अंत तक यह सिस्टम अमेरिकी एजेंसियों के अंदर गहराई से इंटीग्रेट हो चुका था। हालांकि फरवरी 2026 में ट्रंप प्रशासन ने Anthropic को सप्लाई चेन रिस्क घोषित कर दिया। इसके बाद Claude को धीरे-धीरे हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन तब तक यह कई अहम सिस्टम का हिस्सा बन चुका था।

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ट्रंप बनाम Anthropic: विवाद की असली वजह
ईरान हमले से ठीक पहले ट्रंप प्रशासन और Anthropic के बीच बड़ा विवाद सामने आया। पेंटागन चाहता था कि Claude को “हर वैध सैन्य उद्देश्य” के लिए बिना किसी सीमा के इस्तेमाल किया जाए। लेकिन Anthropic ने अपने Constitutional AI ढांचे के तहत कुछ नैतिक सीमाएं हटाने से इनकार कर दिया। Claude को इस तरह प्रोग्राम किया गया है कि वह पूरी तरह स्वायत्त घातक हथियार प्रणाली या बड़े पैमाने पर घरेलू निगरानी के लिए इस्तेमाल नहीं होगा। यही टकराव कॉन्ट्रैक्ट विवाद का कारण बना।

Anthropic के बाद किसने संभाली कमान?
Anthropic के साथ विवाद गहराने के बाद OpenAI और xAI तेजी से आगे आए। OpenAI ने क्लासिफाइड नेटवर्क के लिए नए समझौते किए। Google ने Gemini for Government प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया। वहीं एलन मस्क की xAI ने Grok for Government लॉन्च कर क्लासिफाइड सिस्टम में एंट्री की। शुरुआत में इन टूल्स का इस्तेमाल अनक्लासिफाइड कामों में हो रहा था, लेकिन धीरे-धीरे इनकी भूमिका संवेदनशील सिस्टम तक बढ़ गई।

ईरान हमले ने दुनिया को दिखा दिया कि भविष्य का युद्ध सिर्फ मैदान में नहीं, डेटा और एल्गोरिद्म की दुनिया में भी लड़ा जाएगा। हम एक ऐसे दौर में प्रवेश कर चुके हैं जहां मशीनें फैसला नहीं ले रहीं, लेकिन फैसलों को आकार जरूर दे रही हैं। यही है AI युग का युद्ध।

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