काबुल: अफगानिस्तान (afghanistan earthquake) एक बार फिर प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहा है। रविवार देर रात देश के पूर्वी हिस्से में आए 6.0 तीव्रता के भूकंप ने भारी तबाही मचाई। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अब तक 500 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1,300 से अधिक लोग घायल हैं। मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है क्योंकि कई इलाकों में अब भी राहत टीमें नहीं पहुँच पाई हैं और सैकड़ों लोग मलबे में दबे हुए बताए जा रहे हैं।
इस भूकंप का केंद्र जलालाबाद शहर से लगभग 27 किलोमीटर दूर और जमीन से मात्र 8 किलोमीटर गहराई में था। कम गहराई में आया भूकंप हमेशा ज्यादा खतरनाक माना जाता है और यही वजह है कि इसके झटकों ने पूरे पूर्वी अफगानिस्तान को हिला दिया। राजधानी काबुल तक तेज झटके महसूस किए गए, जबकि पड़ोसी पाकिस्तान के कई इलाकों इस्लामाबाद, पेशावर और पंजाब प्रांत तक लोग आधी रात को घरों से बाहर निकल आए।
अफगानिस्तान की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित बुनियादी ढांचे ने राहत कार्य को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया है। प्रभावित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई, मोबाइल नेटवर्क बाधित है और अस्पताल घायलों से भर चुके हैं। कई गांवों तक सड़कें भूस्खलन और दरारों की वजह से बंद हो गई हैं, जिससे बचाव दलों को पहुँचने में देरी हो रही है।
सबसे ज्यादा तबाही कुनार प्रांत में
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुनार प्रांत इस आपदा का सबसे ज्यादा शिकार बना है। नूरगुल, सोकी, वटपुर, मनोगी और चापदारे जैसे जिलों में पूरे-के-पूरे गांव ढह गए। मिट्टी और ईंट-पत्थर से बने घर ताश के पत्तों की तरह गिर गए और लोग सोते समय ही मलबे में दब गए।
जलालाबाद, जो पूर्वी अफगानिस्तान का सबसे बड़ा शहर है, वहाँ भी नुकसान कम नहीं है। बाजारों, मकानों और अस्पतालों में दरारें पड़ी हैं। शहर का मुख्य अस्पताल घायलों से भर गया है और डॉक्टरों को लगातार आपातकालीन सर्जरी करनी पड़ रही है।
आधी रात में लोगों में दहशत
भूकंप रविवार रात करीब 11:47 बजे आया। लोग गहरी नींद में थे कि अचानक ज़मीन हिलने लगी। तेज झटकों से घरों की दीवारें दरकने लगीं और लोग घबराकर सड़कों पर आ गए। कई इलाकों में बिजली गुल हो गई और अंधेरे में लोगों ने रात काटी। सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि लोग कुरान की तिलावत करते हुए बाहर खुले मैदानों में ठहरे रहे।
राहत कार्य में चुनौतियाँ
तालिबान सरकार ने सेना और स्थानीय प्रशासन को राहत कार्य में झोंक दिया है। मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए खोजी कुत्ते, क्रेन और मशीनरी लगाई गई है। लेकिन, समस्या यह है कि प्रभावित क्षेत्र ज्यादातर पहाड़ी इलाकों में हैं, जहाँ पहुँच पाना बेहद कठिन है।
कई गांव ऐसे हैं जहाँ तक सड़कें भूस्खलन के कारण पूरी तरह बंद हो चुकी हैं। हेलिकॉप्टर से बचाव कार्य शुरू करने की योजना बनाई जा रही है, लेकिन मौसम और सीमित संसाधन बड़ी बाधा हैं।
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अक्टूबर 2023 में भी हुई थी भारी तबाही
अक्टूबर 2023 में अफगानिस्तान में 6.3 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें हजारों लोगों की मौत हुई थी। उस समय भी पश्चिमी प्रांत हेरात सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ था। बार-बार आने वाले भूकंप अफगानिस्तान की नाजुक भूगोलिक स्थिति को उजागर करते हैं, क्योंकि यह देश भूकंपीय रूप से बेहद सक्रिय ज़ोन में आता है।
भूकंप क्यों आता है?
धरती की सतह मुख्य तौर पर 7 बड़ी और कई छोटी-छोटी टेक्टोनिक प्लेट्स से मिलकर बनी है। ये प्लेट्स लगातार तैरती रहती हैं और कई बार आपस में टकरा जाती हैं। टकराने से कई बार प्लेट्स के कोने मुड़ जाते हैं और ज्यादा दबाव पड़ने पर ये प्लेट्स टूटने लगती हैं। ऐसे में नीचे से निकली ऊर्जा बाहर की ओर निकलने का रास्ता खोजती है और इस डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।
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