चीन की सेना में भूचाल, चीनी जनरल झांग ने न्यूक्लियर सीक्रेट अमेरिका को लीक किया

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चीन की सेना (China Army ) में एक बड़ा राजनीतिक और सैन्य संकट सामने आया है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बाद सबसे ताकतवर माने जाने वाले सैन्य अधिकारी और सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) के वाइस चेयरमैन जनरल झांग यूक्सिया के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है। उन पर अमेरिका को चीन के न्यूक्लियर हथियारों से जुड़ी गोपनीय जानकारी लीक करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

चीन के रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को बयान जारी कर बताया कि 75 वर्षीय झांग पर “पार्टी अनुशासन और कानून के गंभीर उल्लंघन” के आरोप हैं। हालांकि, मंत्रालय ने जांच के सटीक कारणों को सार्वजनिक नहीं किया। जांच शुरू होते ही झांग को उनके पद से हटा दिया गया है।

न्यूक्लियर सीक्रेट लीक करने का आरोप (Allegations of Leaking Nuclear Secrets to the US)
अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, झांग यूक्सिया पर आरोप है कि उन्होंने चीन के परमाणु हथियार कार्यक्रम से जुड़ी संवेदनशील जानकारी अमेरिका तक पहुंचाई। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि झांग ने CMC के भीतर अपनी अलग गुटबाजी बनाई और पार्टी एकता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की।

बताया जा रहा है कि चीन नेशनल न्यूक्लियर कॉर्पोरेशन के पूर्व महाप्रबंधक गु जून ने झांग के खिलाफ कुछ अहम सबूत उपलब्ध कराए हैं। गु जून खुद भी फिलहाल कम्युनिस्ट पार्टी विरोधी गतिविधियों और भ्रष्टाचार के मामलों में जांच का सामना कर रहे हैं।

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भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का दावा (China Claims Zero Tolerance on Corruption)
वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा है कि यह जांच दिखाती है कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं करेगी। पार्टी नेतृत्व की नीति “जीरो टॉलरेंस” पर आधारित है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कार्रवाई राष्ट्रपति शी जिनपिंग की उस व्यापक मुहिम का हिस्सा है, जिसके तहत वह सेना में सुधार, अनुशासन और व्यक्तिगत वफादारी को मजबूत करना चाहते हैं। शी जिनपिंग खुद सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के चेयरमैन हैं और सेना की सर्वोच्च कमान उनके हाथ में है।

झांग ने राष्ट्रपति बनाने में जिनपिंग की मदद की थी
झांग ने राष्ट्रपति बनाने में जिनपिंग की मदद की थी 2023 में जिनपिंग को तीसरी बार राष्ट्रपति बनाने में जनरल झांग ने मदद की थी, लेकिन फिर उनके जिनपिंग से मतभेद गहरे होते गए। इस समय तक झांग ही PLA में बड़े फैसले ले रहे थे। जनरल झांग और CMC के एक और जनरल लियू कई महीनों से कम्युनिस्ट पार्टी की बैठकों से गायब रहने लगे। झांग पहले भी कई बार गायब हो चुके थे।

चीन में ऐसा तब होता है, जब किसी ऑफिसर को हटाया जाना होता है या उसकी जिनपिंग से वफादारी पर संदेह खड़ा होता है। 24 जनवरी 2026 को झांग के खिलाफ ‘पार्टी के कानून और अनुशासन के उल्लंघन’ का आरोप लगा और उनके खिलाफ जांच शुरू हुई। चीन में भ्रष्टाचार और टॉप लीडरशिप के प्रति वफादारी न दिखाने पर ऐसे ही आरोपों के तहत जांच शुरू की जाती है। कई ऑफिसर इस जांच के पहले ही गायब हो जाते हैं या पद से हटा दिए जाते हैं। ऐसा बहुत कम होता है कि चीन में किसी ऑफिसर के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में जांच शुरू हो और वह बाद में निर्दोष साबित हो जाए। झांग से पहले भी कई ऑफिसर इसी तरह हटाए गए हैं।

क्या पहले कभी हुआ था चीन में तख्तापलट?
पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (PRC) की स्थापना के बाद कोई सफल सैन्य तख्तापलट नहीं हुआ है। CCP ने कई पर्ज और आंतरिक संघर्ष देखे हैं, लेकिन ये पार्टी के भीतर ही रहे। साल 1971 में माओ जेडोंग के उत्तराधिकारी लिन बियाओ पर तख्तापलट की कोशिश का आरोप लगा। वे भागने की कोशिश में प्लेन क्रैश में मारे गए.।इसे चीनी इतिहास में असफल तख्तापलट माना जाता है। हालांकि कुछ लोग इसे फेब्रिकेटेड भी कहते हैं। इसके अलावा 1966-1976 में कल्चरल रिवॉल्यूशन के दौरान बड़े पैमाने पर हत्याएं और पर्ज हुए, लेकिन ये माओ की नीति से थे न कि सैन्य तख्तापलट। 1920-1940 के दशक में CCP के शुरुआती वर्षों में कुछ घटनाएं कैंटन कू जैसी घटनाएं हुई थीं, लेकिन ये PRC से पहले थीं। कुल मिलाकर कहें तो CCP की संरचना ने तख्तापलट को रोका ही है और कभी ये सफल नहीं हुआ।

बता दें, विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कार्रवाई सिर्फ भ्रष्टाचार के खिलाफ नहीं है, बल्कि शी जिनपिंग की सत्ता को और मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा भी है। सेना में पूरी तरह पार्टी के प्रति वफादारी सुनिश्चित करना और चीन को वैश्विक सैन्य शक्ति बनाना शी जिनपिंग का मुख्य लक्ष्य है।

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