अमेरिका-चीन में फिर भड़का ट्रेड वॉर, ट्रंप ने लगाया 100% टैरिफ, जानिए क्या हुआ पूरी दुनिया पर इसका असर?

यह विवाद नया नहीं है। ट्रंप के पिछले कार्यकाल में भी अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ ट्रेड वॉर छिड़ चुका था। उस समय अमेरिका ने चीनी वस्तुओं पर 145% तक टैरिफ लगाया था

498

दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर 100% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी है। यह फैसला शुक्रवार रात बाजार बंद होने के तुरंत बाद लिया गया, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में हलचल मच गई है।

ट्रंप ने कहा कि 1 नवंबर 2025 से चीन से आने वाले सभी सामानों पर नया टैरिफ लागू होगा। फिलहाल चीन से आयातित उत्पादों पर 30% टैक्स लग रहा है। नए फैसले के बाद अब कुल टैरिफ 130% तक पहुंच जाएगा।

चीन के ‘रेयर अर्थ कंट्रोल’ का अमेरिका ने दिया जवाब
दरअसल, चीन ने 9 अक्टूबर को अपने दुर्लभ खनिजों (Rare Earth Materials) के निर्यात पर सख्ती बढ़ा दी थी। इन खनिजों का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, इलेक्ट्रिक व्हीकल और डिफेंस सेक्टर में होता है। अब चीन ने 17 में से 12 रेयर अर्थ मटेरियल्स पर नियंत्रण कर लिया है, जिनमें होल्मियम, एर्बियम, थुलियम, यूरोपियम और यटरबियम जैसे धातु शामिल हैं।

इस कदम के बाद विदेशी कंपनियों को इन खनिजों के इस्तेमाल के लिए चीन से एक्सपोर्ट लाइसेंस लेना जरूरी होगा। चीन ने यह भी साफ किया कि वह ऐसे लाइसेंस उन कंपनियों को नहीं देगा जिनका संबंध विदेशी सेनाओं से है।

ट्रंप ने इसे “ग्लोबल इकॉनॉमी के लिए खतरनाक संदेश” बताया और कहा, “चीन ने दुनिया के हर देश को एक आक्रामक संदेश भेजा है। यह फैसला वैश्विक सप्लाई चेन को हिला देगा।”

ये भी पढ़ें: इन 4 वजहों से नहीं मिला डोनाल्ड ट्रंप को नोबल पुरस्कार? जानिए कौन है मारिया कोरीना

1 नवंबर से सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट पर भी नियंत्रण
ट्रंप ने घोषणा की कि 1 नवंबर से अमेरिका सभी मुख्य सॉफ्टवेयर और टेक्नोलॉजी एक्सपोर्ट्स पर भी नियंत्रण लागू करेगा। यह कदम चीन की नीतियों के जवाब में उठाया जा रहा है, ताकि अमेरिका अपनी तकनीकी बढ़त को सुरक्षित रख सके।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि चीन की यह रणनीति “नैतिक रूप से शर्मनाक और आर्थिक रूप से खतरनाक” है। उनका कहना था, “चीन ने वर्षों पहले यह योजना बनाई थी, और अब वह दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।”

अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर का पुराना इतिहास
यह विवाद नया नहीं है। ट्रंप के पिछले कार्यकाल में भी अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ ट्रेड वॉर छिड़ चुका था। उस समय अमेरिका ने चीनी वस्तुओं पर 145% तक टैरिफ लगाया था, जिसके जवाब में चीन ने अमेरिकी उत्पादों पर 125% टैक्स लगा दिया था। नतीजतन, दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग ठप हो गया था। बाद में बातचीत के बाद टैरिफ घटाकर अमेरिका ने 30% और चीन ने 10% कर दिया था। लेकिन अब ट्रंप के ताज़ा ऐलान से यह राहत खत्म होती दिख रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दोनों देशों के बीच आर्थिक तनाव फिर से गहराएगा और वैश्विक व्यापार पर असर पड़ेगा।

पंचदूत अब व्हाट्सएप चैनल पर उपलब्ध है। लिंक पर क्लिक करें और अपने चैट पर पंचदूत की सभी ताज़ा खबरें पाएं।

वॉल स्ट्रीट पर दिखा टैरिफ का असर
ट्रंप के इस ऐलान के बाद अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। S&P 500 इंडेक्स 2.7% नीचे बंद हुआ, जबकि डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 878 अंकों (1.9%) की गिरावट आई। टेक सेक्टर पर भी बड़ा असर पड़ा — एपल, एनवीडिया और अन्य कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई। नैस्डैक कंपोजिट इंडेक्स 3.6% गिरकर बंद हुआ। एनालिस्ट्स का कहना है कि ट्रंप की नई नीति से ग्लोबल सप्लाई चेन और कीमतों पर सीधा असर पड़ेगा। इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और रक्षा उद्योग से जुड़े उत्पादों के दाम बढ़ सकते हैं।

ट्रंप के इस फैसले से हिलेगा वैश्विक बाजार?
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला वैश्विक बाजार को हिला सकता है। चीन पहले से ही दुनिया की 70% रेयर अर्थ सप्लाई और 90% प्रोसेसिंग क्षमता पर नियंत्रण रखता है। अमेरिका और उसके सहयोगी देश अगर वैकल्पिक आपूर्ति नहीं ढूंढ पाते हैं, तो उत्पादन लागत बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगाई और तेज हो सकती है। ट्रंप के इस कदम से यह भी साफ है कि आने वाले महीनों में अमेरिका-चीन आर्थिक टकराव एक नए दौर में प्रवेश करेगा, जो वैश्विक राजनीति और बाजार दोनों के लिए चुनौती बन सकता है।

देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (Hindi News) पढ़ें। आप हमें फेसबुकट्विटरइंस्ट्राग्राम और यूट्यूब चैनल पर फॉलो कर सकते हैं।