Donald Trump Tariff: मेरा मार्केट मेरा टैरिफ, ट्रंप ने दिया जापान, बांग्लादेश समेत 14 देशों को झटका

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump Tariff) ने एक बार फिर वैश्विक व्यापार पर बड़ा असर डालने वाला निर्णय लिया है। सोमवार को उन्होंने घोषणा की कि ग्लोबल टैरिफ (Donald Trump Tariff) बढ़ाने की अंतिम तारीख 9 जुलाई से बढ़ाकर 1 अगस्त कर दी गई है। इसके साथ ही अमेरिका ने बांग्लादेश, जापान और दक्षिण कोरिया समेत 14 देशों पर 25% से 40% तक के आयात शुल्क लागू करने का ऐलान भी कर दिया है।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका वैश्विक व्यापार घाटे को कम करने और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में सख्त रुख अपना रहा है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि इन देशों के साथ अमेरिका का व्यापार संतुलन बेहद खराब है और भारी शुल्क के माध्यम से इसे सुधारा जा सकता है।

क्या है फैसला और किन देशों पर असर
ट्रंप प्रशासन ने सोमवार को सभी 14 प्रभावित देशों को औपचारिक पत्र भेजकर इस फैसले की जानकारी दी। इनमें बांग्लादेश, जापान, दक्षिण कोरिया के अलावा कुछ यूरोपीय और एशियाई देश शामिल हैं।

  • दक्षिण कोरिया और जापान से आने वाले सामान पर 25% शुल्क लगाया गया है।
  • अन्य देशों पर 30% से 40% तक का टैरिफ लगाया जाएगा।
  • प्रभावित वस्तुओं में इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा, ऑटो पार्ट्स और स्टील उत्पाद प्रमुख हैं।

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क्यों लिया गया यह फैसला
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने पत्र में लिखा कि यह टैरिफ इसलिए जरूरी हैं ताकि अमेरिका और इन देशों के बीच व्यापार असंतुलन को सुधारा जा सके। उन्होंने कहा कि ये देश अमेरिकी बाजार में अपने उत्पाद तो बड़ी मात्रा में भेजते हैं, लेकिन अमेरिका के उत्पादों को वहां उचित बाजार नहीं मिलता।

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ट्रंप प्रशासन का यह कदम उनके “America First” नीति का हिस्सा है, जिसके तहत वे घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना चाहते हैं और आयात पर निर्भरता कम करना चाहते हैं।

भारत के लिए क्या मायने हैं इस फैसले के
हालांकि इस सूची में भारत का नाम फिलहाल नहीं है, लेकिन यह कदम वैश्विक व्यापार माहौल में नई चुनौतियां पैदा कर सकता है। अगर अमेरिका की टैरिफ नीति और सख्त होती है, तो भारत जैसे देशों पर भी असर पड़ सकता है जो अमेरिका के साथ बड़े स्तर पर व्यापार करते हैं। इसके अलावा भारत के लिए चिंता का विषय यह भी है कि बांग्लादेश और दक्षिण एशियाई देशों पर टैरिफ का असर भारतीय निर्यातकों के लिए अप्रत्यक्ष प्रतिस्पर्धा और बाज़ार के अवसरों में बदलाव ला सकता है।

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भविष्य की रणनीति
अमेरिका का यह फैसला WTO की व्यापार नीति पर भी सवाल खड़े कर सकता है। ट्रंप प्रशासन पहले भी व्यापार संबंधों में दबाव की रणनीति अपनाता रहा है, और इस बार भी इसका असर वैश्विक व्यापार साझेदारियों पर पड़ेगा। भारत को इस स्थिति का सावधानीपूर्वक विश्लेषण करते हुए अपने निर्यात बाजारों को विविधता देने और अमेरिकी व्यापार नीति के संभावित प्रभावों से निपटने की तैयारी करनी होगी।

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