इज़रायल और ईरान (Iran Israel war )के बीच जारी जंग अब थमती दिख रही है। इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हमले रोकने का ऐलान कर दिया है। नेतन्याहू ने कहा कि इजराइली सेना का मकसद पूरा हो चुका है। इससे पहले, ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा- ईरानी लोगों ने दिखा दिया है कि उन्हें तानाशाहों की धमकियों का कोई डर नहीं है। ईरानी लोग कभी भी सरेंडर नहीं करेंगे।
यह फैसला उस वक्त आया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दोनों देशों से युद्ध रोकने की अपील की थी। डोनाल्ड ट्रम्प ने जंग के 12वें दिन सीजफायर का ऐलान किया और कहा कि यह अगले 6 घंटे में लागू हो जाएगा। तय समय पूरा होने पर उन्होंने एक और पोस्ट किया और लिखा – “अभी से सीजफायर लागू होता है, प्लीज इसे न तोड़ें।”
ट्रम्प के सीजफायर के ऐलान के बाद से ईरान के विदेश मंत्री ने इसे खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा कि इजराइल के साथ अभी कोई अंतिम युद्धविराम समझौता नहीं हुआ है। अगर इजराइल, हमले रोक देता है, तो ईरान भी हमले नहीं करेगा।
कुछ ही देर बाद ईरान ने इज़रायल पर 6 बार बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। टाइम्स ऑफ इजराइल की रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक मिसाइल बीर्शेबा शहर में इमारत पर गिरी। मेडिकल टीम ने बताया कि हमले में 5 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 20 से ज्यादा घायल हैं।
ट्रम्प के ऐलान से कुछ घंटे पहले ही ईरान ने कतर में अमेरिका के अल-उदीद एयर मिलिट्री बेस पर 19 मिसाइलें दागीं थीं। हालांकि, इस हमले में कोई हताहत नहीं हुआ, क्योंकि ईरान ने हमले से पहले ही इसके बारे में अलर्ट जारी कर दिया था।
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इज़रायल और ईरान के बीच युद्ध के हालात क्यों बनें?
इज़रायल और ईरान के बीच टकराव कोई नया नहीं है, लेकिन हालिया तनाव 2024 और 2025 में एक सैन्य संघर्ष के कगार तक पहुंच गया है। यह संघर्ष सीधे तौर पर युद्ध का रूप नहीं ले पाया है, लेकिन इसे “छाया युद्ध” (Shadow War) कहा जा रहा है — जिसमें सीधी भिड़ंत के बजाय साइबर अटैक, मिसाइल हमले, एयरस्ट्राइक और प्रॉक्सी समूहों के जरिए एक-दूसरे को निशाना बनाया जा रहा है।
1. ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम- ईरान 2015 की न्यूक्लियर डील से बाहर आने के बाद तेजी से यूरेनियम संवर्धन कर रहा है। इज़रायल को डर है कि ईरान गुपचुप तरीके से परमाणु बम बना रहा है, जो इज़रायल की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है।
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2. प्रॉक्सी वार्स और हिज़बुल्लाह- ईरान ने लेबनान में हिज़बुल्लाह, गाज़ा में हमास और सीरिया में मिलिशिया को हथियार और पैसा देकर मजबूत किया है। ये सभी संगठन इज़रायल विरोधी हैं और समय-समय पर हमले करते हैं। इज़रायल इसे ईरान की “घेराबंदी नीति” मानता है।
3. हालिया घटनाएं और जवाबी कार्रवाइयां
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अक्टूबर 2023 में हमास द्वारा इज़रायल पर बड़ा हमला हुआ था जिसमें ईरान की भूमिका पर सवाल उठे।
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अप्रैल 2024 में इज़रायल ने सीरिया स्थित ईरानी दूतावास पर एयरस्ट्राइक की, जिसमें ईरान के कई अधिकारी मारे गए।
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इसके जवाब में ईरान ने पहली बार सीधे इज़रायल पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया।
4. पश्चिम एशिया में बढ़ती दखलअंदाज़ी- ईरान की रणनीति है कि वह पूरे मिडिल ईस्ट में शिया प्रभुत्व स्थापित करे, जबकि इज़रायल पश्चिमी देशों के साथ मिलकर उसकी इस नीति का विरोध करता है।
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