Iran Protest: इन वजहों से बनें ईरान में तनावपूर्ण हालात, क्या रेजा पहलवी करेंगे तख्तापलट?

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ईरान (Iran Protest) में महंगाई के खिलाफ 13 दिनों से चल रहे प्रदर्शन के बीच गुरुवार रात को हालात और खराब हो गए। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक देशभर में 100 से ज्यादा शहरों में प्रदर्शन फैल चुका है। अमेरिकी ह्यूमन राइट एजेंसी के मुताबिक, प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में अब तक 45 लोग मारे गए हैं।

लोग अली खामेनेई की सरकार को सत्ता हटाने की मांग कर रहे हैं। ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी के समर्थन में नारेबाजी कर रहे हैं। बीती रात रेजा पहलवी की अपील पर लोगों ने आधी रात को सड़कों पर उतरकर बवाल काटा और आगजनी की।

वहीं अब, ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने देशभर में प्रदर्शनों के बीच पहली बार राष्ट्र को संबोधित किया। ईरान की सरकारी टीवी ने खामेनेई का भाषण प्रसारित किया। खामेनेई ने कहा कि प्रदर्शनकारी किसी दूसरे देश के राष्ट्रपति को खुश करने के लिए अपने ही देश को बर्बाद कर रहे हैं।

खामेनेई ने कहा कि ईरान “विदेशियों के लिए काम करने वाले भाड़े के लोगों” को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनों के पीछे विदशी एजेंट हैं जो देश में हिंसा भड़का रहे हैं।

डोनाल्ड ट्रंप की हमले की धमकी
बता दें कि ईरान के हालातों को देखते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने ईरान की सरकार को 2 बार चेताया है कि अगर सरकार ने जनता का दमन किया, उनकी आवाज दबाने की कोशिश की तो अमेरिकी की सरकार मामले में दखल देगी और ईरान पर हमला करेगी। चर्चा है कि अमेरिकी वायुसेना के एयरक्राफ्ट 2 दिन पहले ही मध्य पूर्व के लिए निकल गए थे और ट्रंप के आदेश का इंतजार कर रहे हैं।

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क्यों शुरु हुए ईरान में प्रदर्शन
देशभर में GenZ आक्रोश में है। इसका कारण आर्थिक बदहाली रहा है। दिसंबर 2025 में ईरानी मुद्रा रियाल गिरकर करीब 1.45 मिलियन प्रति अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। साल की शुरुआत से रियाल की कीमत लगभग आधी हो चुकी है। यहां महंगाई चरम पर पहुंच गई है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 72% और दवाओं की कीमतों में 50% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा सरकार द्वारा 2026 के बजट में 62% टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव ने आम लोगों में भारी नाराजगी पैदा कर दी है।

37 साल से सत्ता अली खामेनेई
ईरान में 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी सत्ता में आए। वे 1979 से 1989 तक 10 साल सुप्रीम लीडर रहे। उनके बाद सुप्रीम लीडर बने अयातुल्ला अली खामेनेई 1989 से अब तक 37 साल से सत्ता में हैं।

ईरान आज आर्थिक संकट, भारी महंगाई, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, बेरोजगारी, मुद्रा गिरावट और लगातार जन आंदोलनों जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। 47 साल बाद अब मौजूदा आर्थिक बदहाली और सख्त धार्मिक शासन से नाराज लोग अब बदलाव चाहते हैं।

इसी कारण 65 वर्षीय क्राउन प्रिंस रजा पहलवी को सत्ता सौंपने की मांग उठ रही है। प्रदर्शनकारी उन्हें एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक विकल्प मानते हैं। युवाओं और जेन जी को लगता है कि पहलवी की वापसी से ईरान को आर्थिक स्थिरता, वैश्विक स्वीकार्यता और व्यक्तिगत आजादी मिल सकती है।

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