राहुल गांधी का नया नारा हर साल 72 हजार, जानिए क्या है कांग्रेस की NYAY योजना?

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नई दिल्ली: कर्जमाफी के ऐलान से तीन राज्यों में अपनी सरकार बनाने में कामयाब हुई कांग्रेस ने अब लोकसभा चुनावों के लिए एक नए नारे की घोषणा कर दी है। जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने घोषणा की है कि यदि जनता उनकी सरकार को सत्ता में लाती है तो वह हर साल देश के 20 फीसदी गरीबों को 72 हजार रूपये सालाना देगी।

रूपये बांटने वाली इस प्रक्रिया को ‘न्यूनतम आय योजना’ (NYAY) नाम दिया है। कांग्रेस अगर सत्ता में आती है तो हर किसी को 12 हजार रुपये प्रति महीने कांग्रेस सरकार देगी। राहुल गांधी ने कहा कि पांच साल तक मोदी सरकार में गरीब दुखी रहे हैं। ऐसे में अब हम उन्हें न्याय देंगे। राहुल ने कहा कि हमने मनरेगा कमिट किया था और अब आय गारंटी देकर दिखा देंगे।

राहुल ने कहा कि हम गरीबी मिटा देंगे। हमारा कहना है कि अगर आप काम कर रहे हो तो महीने में 12 हजार रुपए से आय कम से कम होनी चाहिए। हिंदुस्तान में अगर मिनिमम इनकम से कम आमदनी है तो यह आय बढ़ाने की कोशिश होगी। जिससे गरीबी से निकाला जा सकता है। यह सेकेंड फेज में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से निकाल देगी। इस योजना को हम आगे लाकर दिखाएंगे।

एयर स्ट्राइक के बाद कांग्रेस बैकफुट पर नजर आ रही थी और बीजेपी के हौसले बुलंद। ऐसे में राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ये कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने न्यूनतम आय स्कीम (NYAY) आगामी चुनावों में मास्टरस्ट्रोक की तरह भी काम कर सकता है।

इंदिरा गांधी के नक्शे पर राहुल गांधी:
न्यूनतम आय योजना’ (NYAY) के लागू करने के बाद देश से गरीबी का नामोनिशान क्या मिट जाएगी? ये सवाल उठना लाजमी है क्योंकि राहुल गांधी की दादी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1971 में गरीब हटाओ का नारा दिया था। इसका चुनाव में कांग्रेस को फायदा भी मिला था। तो क्या राहुल गांधी क्या चुनावी राजनीति कर रहे हैं या सच में वह गरीबी हटा देंगे।

आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़े:
आपको बता दें आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17 द्वारा दिए गए मॉडल के मुताबिक देश में गरीबी रेखा का आंकलन उचित ढंग से नहीं किया गया है। जहां तेंदुलकर फॉर्मूले से 22 फीसदी जनसंख्या को गरीब बताया गया, वहीं इसके बाद हुए सी रंगराजन फॉर्मूले ने 29.5 फीसदी यानि 36.3 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा के नीचे बताया। वहीं प्रति व्यक्ति खर्च के स्तर को भी 2012 में 27.2 रुपये से सुधार कर 2014-15 में 32 रुपये कर दिया गया। जबकि शहरी इलाकों के लिए इस खर्च को 33.3 रुपये से बढ़ाकर 47 रुपये प्रति व्यक्ति कर दिया गया।

क्यों नहीं होती चुनावों में बेहतर रोजगार देने की बात
लोकसभा चुनावी रैलियों में हर कोई जनता को मुफ्त में पैसा बांटने और वोट मांगने की राजनीति करता दिखाई दे रहा है। क्यों कोई नेता ये घोषणा करता कि अगर वह सत्ता में आएगा तो रोजगार देने के विभिन्न पहलू पर काम किया जाएगा। शिक्षा की गुणवत्ता पर काम किया जाएगा। ताकि भविष्य में पैसे बांटने और बेरोजगारी जैसी समस्या का सामना ना करना पड़ें।

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