मुख्यमंत्री के बयान के विरोध में भारतीय किसान यूनियन की बैठक

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– किसानों और महिलाओं के अपमान का आरोप लगाते हुए जताया कड़ा विरोध
हनुमानगढ़। मुख्यमंत्री के हाल ही में हुए हनुमानगढ़ दौरे के दौरान दिए गए बयान को लेकर भारतीय किसान यूनियन हनुमानगढ़ के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं में रोष व्याप्त है। इसी संबंध में यूनियन की एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें मुख्यमंत्री के भाषण में किसानों के प्रति की गई कथित टिप्पणी को अपमानजनक बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया गया।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष रेशम सिंह मानुका ने कहा कि मुख्यमंत्री ने अपने भाषण के दौरान किसानों के बारे में ऐसी टिप्पणी की, जिससे किसानों की भावनाओं को ठेस पहुंची है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने कहा था कि किसान घर की महिलाओं को खेतों में काम पर लगाकर स्वयं सिर पर साफा बांधकर उपखंड कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करने पहुंच जाते हैं। इस प्रकार का बयान किसानों के सम्मान के विरुद्ध है और इसका किसान समाज में व्यापक विरोध हो रहा है।
रेशम सिंह मानुका ने कहा कि किसान देश की रीढ़ है और खेती-किसानी से ही देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। ऐसे में किसानों के बारे में इस प्रकार की टिप्पणी करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को अपने शब्दों पर पुनर्विचार करना चाहिए और किसानों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री द्वारा किसान संवाद के नाम पर केवल दिखावे का कार्यक्रम आयोजित किया गया। उनके अनुसार इस संवाद कार्यक्रम में केवल भारतीय जनता पार्टी से जुड़े भारतीय किसान संघ के कुछ किसानों को ही आमंत्रित किया गया, जबकि अन्य किसान संगठनों और आम किसानों को नजरअंदाज कर दिया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि संवाद कार्यक्रम केवल औपचारिकता निभाने के लिए आयोजित किया गया था।
बैठक में उपस्थित किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि जब यूनियन के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी समस्याएं रखने की इच्छा जताई तो उन्हें पुलिस द्वारा रोक दिया गया और कुछ समय तक बंधक बनाकर रखा गया। किसानों का कहना है कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के विपरीत है और किसानों की आवाज को दबाने का प्रयास है।

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