कौन है छांगुर बाबा? हिंदू बेटियों का धर्मांतरण कराने वाला ‘रेटकार्ड’ चौंका देगा, जानिए पूरा मामला

जांच एजेंसियों के मुताबिक, छांगुर बाबा लड़कियों को बहला-फुसलाकर जबरन उनका धर्मांतरण करवाता। उसके टारगेट पर हिंदू लड़कियां होती थीं। हर जाति की लड़कियों का रेट फिक्स कर रखा था।

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उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले से शुरू हुआ एक नाम ‘छांगुर बाबा’ (Chhangur Baba) अब राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन चुका है। असली नाम जमालुद्दीन, लेकिन पहचान एक तथाकथित धार्मिक बाबा के रूप में। पुलिस, ATS और अब केंद्रीय एजेंसियां इस बात की गहराई से जांच कर रही हैं कि कैसे यह शख्स एक आम व्यक्ति से धर्मांतरण के बड़े गिरोह का मास्टरमाइंड बन गया। चलिए जानते हैं क्या है ये केस और अबतक क्या कुछ हुआ है।

कौन है छांगुर बाबा
जमालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा की पृष्ठभूमि कोई धार्मिक संस्था से नहीं, बल्कि व्यवसाय और राजनीतिक संपर्कों से जुड़ी बताई जाती है। पहले येगांव में नग-अंगूठियों और  गहनों के व्यापार से जुड़े थे। फिर इन्होंने धीरे-धीरे गाँवों और छोटे तबकों में अपनी पहचान एक ‘चमत्कारी बाबा’ के रूप में बनानी शुरू की। यहीं से उनका नेटवर्क फैलने लगा। बलरामपुर के मधुपुर इलाके में इनका प्रभाव इतना बढ़ा कि स्थानीय पंचायत चुनावों तक में हस्तक्षेप करने लगे। बाबा ने सामाजिक सेवा, आध्यात्मिक समाधान और आर्थिक मदद का झांसा देकर गरीब तबकों में पकड़ बनाई।

छांगुर बाबा चर्चा में तब आया जब उसने मुंबई की एक दंपती और उसकी बेटी का धर्मांतरण कराया। पति नवीन रोहरा को बाबा ने जमालुद्दीन उसकी पत्नी नीतू को नसरीन नाम दिया। यह बेहद ही रसूखदार परिवार था, जिसके बाद यह लोग बाबा के साथ ही उसके आवास मधपुर उतरौला में रहने लगे।

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छांगुर बाबा का आलीशान घर
दर्जन भर जेसीबी लगाकर अवैध निर्माण को ध्वस्त किया

धर्मांतरण गिरोह के पीछे की कहानी
एटीएस की रिपोर्ट के अनुसार छांगुर बाबा का नेटवर्क एक संगठित धर्मांतरण गिरोह के रूप में काम कर रहा था। गरीब, अनुसूचित जाति और विधवा महिलाओं को पहले आर्थिक सहायता और इलाज का वादा दिया जाता था, फिर धीरे-धीरे उन पर धर्म बदलने का दबाव बनाया जाता था। कथित तौर पर इसके लिए एक तय रेट-लिस्ट भी बनाई गई थी।

रिपोर्टों के अनुसार गिरोह के निशाने पर खासतौर से ग्रामीण इलाकों की वो आबादी थी, जो शिक्षा और जागरूकता से दूर थी। यह गतिविधि लंबे समय से चल रही थी और धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय फंडिंग से जुड़ गई। अब तक की जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि बाबा और उनके साथियों के 40 से ज्यादा बैंक खातों में ₹100 करोड़ से अधिक की विदेशी फंडिंग आई थी। इनमें से अधिकांश रकम इस्लामिक देशों से ट्रांसफर की गई थी।

ED और ATS को शक है कि ये पैसे सिर्फ धर्मांतरण के लिए नहीं, बल्कि एक बड़े स्तर पर सांस्कृतिक और जनसंख्या आधारित रणनीति का हिस्सा थे। मनी लॉन्ड्रिंग और FCRA के उल्लंघन की जांच भी अब शुरू हो चुकी है।

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अबतक क्या हुई है बाबा छांगुर पर कार्रवाई
5 जुलाई को लखनऊ से छांगुर बाबा और उनकी सहयोगी नीतू रोहरा को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने इन्हें अदालत में पेश कर 7 दिन की रिमांड ली है ताकि गिरोह के पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके। बलरामपुर स्थित उनकी अवैध कोठी को प्रशासन ने दो दिनों की कार्रवाई में ज़मींदोज कर दिया। सूत्रों के अनुसार इस मामले में जल्द ही गैंगस्टर एक्ट लगाया जा सकता है और गिरोह की सभी संपत्तियों को ज़ब्त करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।

मामले में इससे पहले आठ अप्रैल को छांगुर बाबा के बेटे महबूब और नवीन उर्फ जमालुद्दीन को गिरफ्तार किया गया था। गिरोह के सदस्यों के इस्लामी देशों की 40 से अधिक यात्राएं करने की बात भी सामने आई है। इस गिरोह के सदस्यों के बैंक अकाउंट में विदेशी फंडिंग तकरीबन 100 करोड़ रुपये की बताई जा रही है। बताया जाता है कि उतरौला स्थित बैंक ऑफ़ बड़ौदा के नीतू उर्फ नसरीन और छांगुर बाबा उर्फ जलालुद्दीन के अकाउंट में तकरीबन 30 से 40 करोड़ रुपये अभी भी जमा है।

नीतू उर्फ नसरीन बाबा की साथी

पूरे मामले में अब प्रशासन ने बीते मई माह में जारी नोटिस पर अमल करते हुए नीतू रोहरा उर्फ नसरीन के नाम से बनी बिल्डिंग के कुछ हिस्से को ध्वस्त कर दिया है, जिस जमीन पर यह बिल्डिंग बनी थी, वह सरकार की बताई जा रही है। प्रशासन ने दर्जन भर जेसीबी लगाकर अवैध निर्माण को ध्वस्त किया जा रहा है। प्रशासन के मुताबिक नीतू रोहरा का पूरा आवास 5 बीघे में बना हुआ है, जिसमें एक बिल्डिंग का कुछ हिस्सा सरकारी भूमि पर था, जिसे ध्वस्त किया गया है।

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छांगुर बाबा के टारगेट पर हिंदू लड़कियां, जातियों पर रेट फिक्स जांच एजेंसियों के मुताबिक, छांगुर बाबा लड़कियों को बहला-फुसलाकर जबरन उनका धर्मांतरण करवाता। उसके टारगेट पर हिंदू लड़कियां होती थीं। हर जाति की लड़कियों का रेट फिक्स कर रखा था। जैसे-

  • ब्राह्मण, सरदार और क्षत्रिय लड़कियों को 15 से 16 लाख रुपए दिए जाते थे।
  • पिछड़ी जाति की लड़कियों को 10 से 12 लाख रुपए का भुगतान होता था।
  • अन्य जाति की लड़कियों को 8 से 10 लाख रुपए दिए जाते थे।

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