भारतीय सिनेमा के सबसे संवेदनशील और कलात्मक फिल्मकारों में गिने जाने वाले गुरु दत्त (guru dutt ) का आज (9 जुलाई) 100वां जन्मदिन है। अगर गुरुदत्त आज जिंदा होते, तो उनकी उम्र 100 साल होती। प्यासा, कागज़ के फूल और साहिब बीबी और गुलाम जैसी क्लासिक फिल्मों से उन्होंने न सिर्फ सिनेमा की दिशा बदली, बल्कि उसे भावनाओं, गहराई और शायरी से भर दिया।
गुरु दत्त का सिनेमा जितना यादगार है, उतने ही उनके फिल्मों के गीत भी — जो आज भी दिलों में जिंदा हैं। उन्होंने गानों को सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि कहानी कहने का एक ज़रिया बनाया। गीतों में दर्द, मोहब्बत, खामोशी और बगावत का वो रंग था, जो आज भी सुनते ही रूह को छू जाता है।
गुरुदत्त का असली नाम वसंत कुमार शिवशंकर पडुकोण था। वे बेंगलुरु में पैदा हुए लेकिन बड़े हुए कोलकाता में। शुरुआत में उन्होंने उदय शंकर की डांस अकादमी से नृत्य सीखा, फिर पुणे की प्रभात फिल्म कंपनी से फिल्मों की दुनिया में कदम रखा।
1951 में आई फिल्म ‘बाज़ी’ से उन्होंने बतौर निर्देशक पहचान बनाई। इसके बाद उन्होंने ‘आर-पार’, ‘मिस्टर एंड मिसेज 55’, ‘प्यासा’, ‘कागज़ के फूल’ और ‘साहिब बीबी और गुलाम’ जैसी यादगार फिल्में बनाईं।
39 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा
गुरुदत्त की आखिरी फिल्म ‘कागज़ के फूल’ को लोगों ने उस समय नहीं समझा, और वो बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही। इससे वे बहुत दुखी हुए और फिर कभी फिल्म डायरेक्ट नहीं की। 10 अक्टूबर 1964 को मुंबई में उनकी मौत हो गई, तब उनकी उम्र सिर्फ 39 साल थी।
गुरुदत्त फिल्मों में क्या खास था?
गुरुदत्त की फिल्में भावनाओं से भरी होती थीं। उनकी कहानियों में प्यार, अकेलापन, ग़म और समाज की सच्चाइयों की झलक मिलती थी। वो अपने समय से आगे की सोच रखते थे। उनकी फिल्मों में गाने, कैमरे का काम और लाइटिंग सब कुछ बहुत ही सुंदर और सोच-समझकर दिखाया जाता था। उन्हें गानों को पर्दे पर पेश करने का तरीका भी खास आता था। ‘बाबूजी धीरे चलना’, ‘वक़्त ने किया क्या हसीं सितम’ और ‘जाने क्या तूने कही’ जैसे गाने आज भी लोगों की जुबान पर हैं।
यहां पेश हैं गुरुदत्त के कुछ सबसे यादगार और भावुक गीत, जो उनकी सौवीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं:
‘वक़्त ने किया क्या हसीं सितम’
फिल्म: कागज़ के फूल
गायिका: गीता दत्त
एक उदास दिल की दास्तान और वक़्त की बेरुखी पर गहराई से लिखा गया गीत।
बाबूजी धीरे चलना’
फिल्म: आर-पार
गायिका: गीता दत्त
नज़ाकत और नखरे से भरा यह गाना गुरुदत्त की शैली का बेहतरीन उदाहरण है।
‘हम आप की आँखों में इस दिल को बसा दें तो’
फिल्म: प्यासा
दिल को छू लेने वाला एक और नग़मा, जिसमें मोहब्बत, तड़प और कशिश तीनों बसी हैं।
जाने वो कैसे लोग थे’
फिल्म: प्यासा
गायक: हेमंत कुमार
दोस्ती, धोखा और आत्मा की पीड़ा को शब्दों में पिरोता गीत।
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