आज यानी 5 दिसंबर को 2024 शुक्रवार को मोस्ट मचअवेटेड फिल्म पुष्पा 2 (Pushpa 2) रिलीज हो गई है। अगर आप भी फिल्म देखने से पहले रिव्यू पढ़ना चाहते हैं तो यहां हम आपके लिए पुष्पा 2 के दमदार डॉयलाग के साथ रिव्यू लिख रहे हैं। फिल्म क्राइम और एक्शन थ्रिलर है। 3 घंटे 20 मिनट बाद दिमाग एक दम कड़क होके निकलेगा, आपको लॉजिक नहीं लगाना है, बस एंटरटेन होना है।
इसलिए इस पंचदूत फिल्म को 5 में से 4 स्टार्स देंगे। क्योंकि फिल्म में कुछ भी लॉजिक जैसा नहीं है। बस शर्त आप अल्लू अर्जुन के फैंन होने चाहिए। पहली एंट्री पर इतना बवाल नहीं करता जितना दूसरी एंट्री पर करता है, यह पुष्पा 2 का ही डायलॉग है और ऐसी ही ये फिल्म भी है, पुष्पा फ्लावर नहीं फायर था। इस बार वो बोला मैं वाइल्ड फायर हूं, और वो वाकई वाइल्ड फायर निकला।
क्या है फिल्म की कहानी ?
पहली फिल्म में साधारण मजदूर रहा पुष्पा राज (अल्लू अर्जुन) अब लाल चंदन की लकड़ियां सप्लाई करने वाला सबसे बड़ा स्मगलर हो गया है। वह हजारों करोड़ों की डील करता है। जाहिर सी बात है कि उसके दुश्मन भी बढ़ गए हैं। एसपी भंवर सिंह शेखावत (फहाद फासिल) पिछली बार हुए अपमान को अब तक भूल नहीं पाया है। वह आए दिन पुष्पा और उसके सहयोगियों के खिलाफ अभियान छेड़ता रहता है। इन सब के बीच पुष्पा का स्वैग और ज्यादा बढ़ गया है। वह अपने आत्मसम्मान के लिए किसी भी कीमत पर कुछ भी करने को तैयार रहता है। इतना ही नहीं, प्रदेश का मुख्यमंत्री उसके साथ फोटो खिंचाने को मना करता है तो वह पैसे और पावर का इस्तेमाल करके तख्तापलट कर देता है। पुष्पा इस बार 5000 करोड़ में चंदन की लकड़ियों का सबसे बड़ा डील करता है।
उसे सारा माल विदेश भिजवाना रहता है, लेकिन उसकी राह में भंवर सिंह शेखावत सबसे बड़ा रोड़ा बनता है। अब पुष्पा अपना माल भंवर से बचा पाता है कि नहीं, इसके लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी। इन सब के अलावा पुष्पा की पर्सनल लाइफ में भी बहुत कुछ चलता रहता है। पुष्पा का भाई मोहन अभी भी उसे नाजायज कहकर ताने मारता है। हालांकि, अंत में कुछ ऐसा होता है कि मोहन की आंखें खुल जाती हैं और वह पुष्पा से माफी मांग लेता है।
डायरेक्शन और राइटिंग
सुकुमार की राइटिंग और डायरेक्शन दोनों शानदार हैं, उन्होंने एक ही चेज पर फोकस किया, स्वैग और एंटरटेनमेंट और वो कामयाब रहे. वो जो बनाना चाहते थे उससे भटके नहीं, यही उनकी कामयाबी है। एक के बाद एक कमाल के सीन डाले ताकि एक सीन देख दर्शक हैरान हो और सांस ले उससे पहले दूसरा कमाल का सीन आ जाए। यहां फिल्म के सिनेमैटोग्राफर की भी तारीफ बनती है। उन्होंने लोकेशंस और एक्शन सीक्वेंस को जिस लार्जर दैन लाइफ अंदाज में दिखाया है, इसके लिए वे प्रशंसा के पात्र हैं।
कलाकारों की एक्टिंग
जाहिर सी बात है कि पूरी फिल्म में दो ही कलाकार दिखाई देंगे। पहले अल्लू अर्जुन और दूसरे फहाद फासिल। अल्लू अर्जुन ने गजब की एक्टिंग की है। कुछ सीन्स तो रौंगटे खड़े करने वाले हैं। उनके ऊपर पुष्पा का स्वैग खूब जंचता है।साथ ही, फहाद फासिल भले ही निगेटिव भूमिका में हैं, लेकिन उनका नटखट अंदाज खूब रास आया है। कभी गुस्सा तो कभी मजाक, उनके फेस एक्सप्रेशन भी गजब के लगे हैं। अल्लू अर्जुन के साथ उनका फेस ऑफ और नोकझोंक देखकर मजा आएगा। यहां रश्मिका मंदाना की भी बात करनी जरूरी है। उन्हें इस बार पिछली बार से ज्यादा स्क्रीन टाइम मिला है। उन्होंने अपने रोल के साथ न्याय भी किया है।
फिल्म का म्यूजिक बकवास
पिछली फिल्म के मुकाबले इस बार गाने काफी ज्यादा सस्ते हैं। पिछली फिल्म में सामंथा ने ‘ऊ अंटवा’ से जो स्टैंडर्ड बनाया था वो इसबार कायम नहीं रहा। बस यही इस फिल्म की कमजोर कड़ी है, गाने काफी बकवास हैं, सामी को छोड़कर कोई गाना झेला नहीं जाएगा। सिनेमाघरों में फॉरवर्ड का ऑप्शन नहीं मिलेगा इसलिए आपको ये झेलना ही पड़ेगा।
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