‘नॉन-वेज दूध’ बना भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में रोड़ा, जानें क्यों डेयरी मार्केट इतना खास?

542

भारत और अमेरिका (US India Tariff ) के बीच व्यापार समझौते को लेकर चल रही वार्ताएं एक बार फिर पटरी से उतर गई हैं। अमेरिका ने भले ही भारत पर 25 प्रतिशत का टैरिफ, रूस की दोस्ती का हवाला देकर लगा दिया लेकिन ये उतना सच नहीं है जितना बताया जा रहा है। असल में इसके पीछे विवाद की जड़ भारत का कृषि और डेयरी उत्पादों का बाजार है, जिसपर अमेरिका अपना कब्जा करना चाहता है।

दरअसल, अमेरिका (US India Tariff ) भारत से चाहता है कि वह अपने कृषि और डेयरी सेक्टर को अमेरिकी कंपनियों के लिए खोले, लेकिन भारत अपनी पारंपरिक नीतियों और किसानों के हितों को लेकर पीछे हटने को तैयार नहीं है। खासकर उस दूध को लेकर जिसे भारत ‘नॉन-वेज दूध’ कह रहा है।

क्या है ‘नॉन-वेज दूध’?
‘नॉन-वेज दूध’ वह दूध होता है जो उन गायों से प्राप्त होता है जिन्हें मांस या मांस आधारित चारे (जैसे सूअर, मछली, घोड़े, मुर्गी, यहां तक कि कुत्ते और बिल्ली) से बना चारा खिलाया गया हो। अमेरिका में अक्सर डेयरी पशुओं को ऐसा ही चारा दिया जाता है। जबकि भारत में पारंपरिक रूप से गायों को शाकाहारी चारा ही खिलाया जाता है।

ये भी पढ़ें: ट्रंप ने भारत पर टैरिफ और पेनल्टी लगाकर, अब की पाकिस्तान के साथ बड़ी डील

भारत की आपत्ति क्या है? 
भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि इस तरह के दूध को देश में अनुमति देना धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं के खिलाफ है। देश में दूध और घी जैसे उत्पाद न केवल भोजन में, बल्कि पूजा-पाठ और धार्मिक आयोजनों में भी इस्तेमाल होते हैं। ऐसे में अमेरिका से आने वाला ‘नॉन-वेज दूध’ भारतीय परंपराओं और भावनाओं से मेल नहीं खाता। सरकार ने अमेरिका से कड़ा सर्टिफिकेशन मांगा है, जिससे यह सुनिश्चित हो कि जो भी डेयरी उत्पाद भारत आएं वे ऐसी गायों से प्राप्त हों जिन्हें मांस आधारित चारा नहीं दिया गया हो।

ये भी पढ़ें: “मित्र तो हैं, लेकिन…” ट्रंप ने भारत पर लगाया 25% टैरिफ और अतिरिक्त जुर्माना

अमेरिका की एंट्री से भारतीय डेयरी उद्योग को कितना होगा नुकसान
अगर भारत ने अमेरिकी डेयरी उत्पादों को मंजूरी दे दी, तो बाजार में सस्ते विदेशी उत्पादों की बाढ़ आ सकती है। इससे घरेलू डेयरी किसान बुरी तरह प्रभावित होंगे। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इससे भारतीय डेयरी उद्योग को हर साल करीब ₹1.03 लाख करोड़ का नुकसान हो सकता है। महाराष्ट्र के किसान महेश सकुंडे ने कहा, “अगर सरकार ने विदेशी कंपनियों को अनुमति दे दी, तो हमारी रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ेगा। हम जैसे छोटे किसानों का भविष्य खतरे में आ जाएगा।”

भारत ने तय किया है कि विशेषकर डेयरी और कृषि उत्पादों को किसी भी द्विपक्षीय व्यापार समझौते से अलग रखा जाएगा। भारत सरकार ने अमेरिकी दबाव के बावजूद इस क्षेत्र में कोई छूट नहीं देने का रुख अपनाया है। जबकि अमेरिका WTO में भारत की डेयरी सर्टिफिकेशन नीतियों को व्यापार बाधा बता रहा है, वहीं भारत इस मांग को देश का सांस्कृतिक और आर्थिक नुकसान मानता है।

व्हाट्सऐप चैनल से जुड़ें, ताकि ऐसी ज़रूरी खबरें आप तक तुरंत पहुंचें। [यहां क्लिक करें]

भारत पर 25% टैरिफ की एक वजह BRICS भी
डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत पर 25% टैरिफ लगाने के पीछे BRICS को भी एक वजह बताया। उन्होंने बुधवार को व्हाइट हाउस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बात कही। भारत से ट्रेड डील के सवाल पर ट्रम्प ने कहा- हम अभी बातचीत कर रहे हैं। इसमें BRICS का भी मसला है। यह अमेरिका विरोधी देशों का ग्रुप है और भारत उसका मेंबर है। यह डॉलर पर हमला है और हम किसी को भी डॉलर पर हमला नहीं करने देंगे।

ट्रम्प ने कहा- यह थोड़ा BRICS की वजह से है और थोड़ा व्यापार की स्थिति की वजह से है। हमें बहुत बड़ा घाटा है। PM मोदी मेरे दोस्त हैं, लेकिन वे हमारे साथ बिजनेस के मामले में बहुत ज्यादा कुछ नहीं करते हैं। उनका टैरिफ दुनिया में सबसे ज्यादा है। अब वे इसमें काफी कटौती करने को तैयार हैं।

ट्रम्प पहले भी कह चुके हैं कि ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका का BRICS समूह डॉलर के प्रभुत्व को खत्म करने की कोशिश करना चाहता है। उन्होंने धमकी दी थी कि अगर वे ऐसा करते हैं तो ग्रुप के सदस्य देशों पर 10% टैरिफ लगाएंगे।

ताजा अपडेट्स के लिए आप पञ्चदूत मोबाइल ऐप डाउनलोड कर सकते हैं, ऐप को इंस्टॉल करने के लिए यहां क्लिक करें.. इसके अलावा आप हमें फेसबुकट्विटरइंस्ट्राग्राम और यूट्यूब चैनल पर फॉलो कर सकते हैं।