डायन के शक में एक ही परिवार के 5 लोगों को डीजल डालकर जिंदा जलाया, जानें पूरा मामला

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बिहार के पूर्णिया ज़िले ( Purnia murder ) में सोमवार सुबह एक भयावह वारदात सामने आई, जिसमें एक ही परिवार के 5 लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई। सभी को बुरी तरह से पीटने के बाद डीजल डालकर जिंदा जला दिया गया था। मिली जानकारी के मुताबिक, गांव वालों को परिवार की एक महिला पर डायन होने का शक था। घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और पुलिस जांच में जुट गई है।

भीड़ ने 5 लोगों के साथ पहले मारपीट की। इसके बाद उन्हें घसीटते हुए चौराहे तक लाए फिर पीटा। करीब डेढ़ किलोमीटर दूर ले जाकर पांचों को जिंदा जला दिया। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।’ ‘उनसे पूछताछ के आधार पर अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।

कहा जा रहा है कि इस वारदात में तीन गांव के करीब 50 लोग शामिल थे। घटना पूर्णिया के मुफ्फसिल थाना के रजीगंज पंचायत के टेटगामा गांव की है।’ घटना का खुलासा तब हुआ, जब बाबूलाल के बेटे 16 साल के सोनू ने अपनी चाची के घर जाकर पूरे घटना की जानकारी दी।

मृतकों के नाम
बाबुलाल उराँव (50), सीता देवी (45), मंजीत उराँव (25), रानी देवी (22), कांतो देवी (70)

हत्या के लिए गांव प्रमुख ने उकसाया
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूर्णिया के टेटगामा गांव में 200 लोग रहते हैं। आदिवासियों के गांव में अंधविश्वास में एक ही परिवार के 5 लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई। लोगों की माने तो गांव के प्रमुख नकुल उरांव के उकसाने पर भीड़ ने इस हत्याकांड को अंजाम दिया। उसी के कहने पर गांव के लोगों ने बाबूलाल उरांव और उसके पूरे परिवार की हत्या कर दी। स्थानीय लोगों के अनुसार, ‘इस गांव में 2 साल में एक-एक कर 6 लोगों की मौत हो चुकी है। इसी महीने 3 लोगों की मौत हुई, जिसमें रामदेव उरांव के बेटे की मौत हो गई थी, जबकि एक बेटे की तबीयत खराब थी।’

मृतक का घर

मृतक के परिवार ने क्या बताया
मृतक सीता देवी की मां रुपो देवी ने बताया- ‘लड़ाई-झगड़ा हुआ तो मेरी बेटी को बुलाया। पिटाई करके सिर फोड़ दिया, फिर बोरी में पैक करके पता नहीं उसके साथ क्या किया।’ ‘डायन का आरोप लगाया और कहा कि तुम लोगों ने मेरे बच्चे को खा लिया है। तब मेरी बेटी सीता ने कहा कि ठीक है, अगर मैंने ऐसा किया है तो मुझे लेकर चलो।’ ‘फिर दामाद बाबूलाल उरांव, उसके बेटे और बहू रनिया देवी, मंजित कुमार और बाबूलाल की मां कागतो देवी को साथ ले गए। पता नहीं कहां ले जाकर पहले लाठी-डंडे से पिटाई की। इसके बाद जिंदा जला दिया।’

मृतक के परिवार के मुताबिक घटनाक्रम
टेटगामा गांव और आसपास के 3 से ज्यादा गांवों में उरांव जाति के लोग रहते हैं। इनमें बाबूलाल उरांव का भी परिवार भी शामिल है। बाबूलाल उरांव खेती, मजदूरी के साथ-साथ झाड़फूंक का काम करते थे। 65 साल के बाबूलाल उरांव अपनी पत्नी 60 साल की सीता देवी, बेटे 25 साल के मंजित उरांव, बहू 22 साल की रनिया देवी और 80 साल की मां कागतो देवी के साथ रहते थे।

बाबूलाल का एक बेटा 16 साल का सोनू भी उनके साथ रहता था, लेकिन घटना के दौरान किसी तरह उसने भागकर अपनी जान बचाई और पूरे घटना की जानकारी अपनी चाची को दी। बाबूलाल का एक और बेटा 19 साल का ललित गांव से बाहर किसी काम से गया था, जो घटना के बाद सोमवार सुबह करीब पांच बजे गांव पहुंचा।

मृतक शव

पूर्णिया में 3 महिलाओं समेत 5 लोगों की पहले लाठी-डंडे से पिटाई की गई, इसके बाद उन्हें जिंदा जलाकर मार डाला गया। इसके बाद आरोपियों ने पांचों लाशों को जलकुंभी से भरे पानी के गड्ढे में फेंक दिया। घटना का खुलासा तब हुआ, जब बाबूलाल के बेटे 16 साल के सोनू ने अपनी चाची के घर जाकर पूरे घटना की जानकारी दी।

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इसके बाद उसने अपने बड़े भाई को भी कॉल कर कहा- ‘भइया, दादी, मम्मी-पापा, भइया-भाई को मार दिया है। मामले की जानकारी के बाद पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।’ ‘उनसे पूछताछ के आधार पर अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। कहा जा रहा है कि इस वारदात में तीन गांव के करीब 50 लोग शामिल थे।

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