2019 में पुलवामा (Pulwama Attack) में हुए आत्मघाती हमले में जिस विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया था, वह किसी स्थानीय स्रोत से नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय ई-कॉमर्स अमेजन प्लेटफॉर्म से खरीदा गया था। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की नई रिपोर्ट में इस चौंकाने वाले दावे ने डिजिटल माध्यमों के आतंकवादी उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
FATF ने इस रिपोर्ट में 2022 में यूपी के गोरखपुर में गोरखनाथ मंदिर पर हुए हमले का भी जिक्र किया है। यहां हमलावर आतंकी को ऑनलाइन मनी ट्रांसफर प्लेटफॉर्म PayPal के जरिए पैसे दिए गए थे। इन दोनों मामलों को उदाहरण के तौर पर पेश करते हुए संगठन ने आगाह किया है कि ई-कॉमर्स और डिजिटल भुगतान सेवाएं अगर गलत हाथों में जाएं तो वे आतंक को बढ़ावा देने का माध्यम बन सकती हैं।
क्या है FATF की रिपोर्ट?
FATF ने अपनी 131 पेज की रिपोर्ट ‘कॉम्प्रिहेंसिव अपडेट ऑन टेररिस्ट फाइनेंसिंग रिस्क’ में बताया है कि आतंकी संगठन अब पारंपरिक फंडिंग नेटवर्क से आगे बढ़कर ई-कॉमर्स साइट्स, ऑनलाइन पेमेंट गेटवे, सोशल मीडिया और गेमिंग प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। रिपोर्ट में डिजिटल माध्यमों को उभरते हुए खतरे के तौर पर चिन्हित किया गया है, जो भविष्य में वैश्विक आतंकवाद को नई दिशा दे सकते हैं।
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क्या है पुलवामा हमला
14 फरवरी 2019 को CRPF का एक काफिला श्रीनगर-जम्मू हाईवे से गुजर रहा था। ट्रक पुलवामा के पास पहुंचा था, तभी एक सुसाइड अटैकर 200 किलो विस्फोटक लदी मारुति ईको कार लेकर घुस गया। विस्फोट इतना तेज था कि सुरक्षाबलों को लेकर जा रही 2 बसों के परखच्चे उड़ गए। इसमें 40 जवान शहीद हुए थे। भारत सरकार की जांच में यह सामने आया कि यह हमला पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) ने करवाया था।
जांच में पता चला कि हमले में इस्तेमाल किए गए विस्फोटक भारत में सीमा पार से लाए गए थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि हमले में इस्तेमाल हुए बम में जो एल्यूमीनियम पाउडर डाला गया था, जो धमाके को और ज्यादा घातक बनाने के लिए इस्तेमाल हुआ, वह अमेजन से ऑनलाइन खरीदा गया था।

क्या है गोरखपुर में गोरखनाथ मंदिर मामला
यूपी के गोरखपुर में गोरखनाथ मंदिर पर 4 अप्रैल 2022 में हुए हमले का दिया गया। इसमें एक शख्स ने वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों पर धारदार दरांती से हमला किया था। इसमें जवान गंभीर रूप से घायल हो गया था। इस घटना में दोषी शख्स मुर्तजा अब्बासी के पास से पुलिस को मजहबी किताब, धारदार हथियार, उसके मोबाइल और लैपटॉप से मिले जेहादी वीडियो आदि मिले थे।
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FATF ने इस मामले की जांच में पाया कि हमलावर ने विदेशों में PayPal के जरिए लगभग 6.7 लाख रुपए ट्रांसफर किए थे। साथ ही, उसने VPN का इस्तेमाल करके अपना IP एड्रेस छिपाया और अपने ट्रांजैक्शन को गुप्त रखा। इन लेन-देन की संदिग्ध गतिविधियों को देखते हुए PayPal ने उसका अकाउंट बंद कर दिया, जिससे आगे अवैध पैसे का उपयोग रोका जा सका।

बता दें, FATF रिपोर्ट यह साफ तौर पर कहती है कि अब आतंकवाद से जुड़ी फंडिंग की रणनीतियां एक समान नहीं रहीं। हर क्षेत्र और परिस्थिति के अनुसार आतंकी नेटवर्क अपने फंडिंग चैनल्स को ढाल लेते हैं। FATF का मानना है कि अगर ई-कॉमर्स और डिजिटल पेमेंट सर्विसेज की पारदर्शिता और नियंत्रण न बढ़ाया गया, तो ये आतंकवाद के लिए सबसे सुगम रास्ता बन सकते हैं।
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छोटे सेल में काम कर रहे हैं आंतकी
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आंतकी अलग-अलग इलाकों में छोटे-छोटे सेल काम कर रहे हैं, जो खुद ही पैसा जुटाकर आतंकी योजनाओं को अंजाम दे रहे हैं। इन सेल्स में शामिल लोग कभी-कभी छोटे अपराधों, वैध कमाई या माइक्रो ट्रांजैक्शन (जैसे गेमिंग ऐप्स से) के जरिए पैसा इकट्ठा करते हैं। FATF ने यह भी बताया कि नस्लीय, धार्मिक या राजनीतिक कारणों से हो रहे आतंकी हमलों की पहचान करना मुश्किल हो रहा है क्योंकि इनमें इस्तेमाल होने वाला पैसा बहुत कम होता है और उसे पकड़ना भी मुश्किल होता है।
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क्या है FATF
FATF (Financial Action Task Force) एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है जिसकी स्थापना 1989 में G7 देशों ने की थी, और इसका उद्देश्य मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकी फंडिंग और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय अपराधों को रोकना है। यह संस्था दुनियाभर के देशों के लिए दिशा-निर्देश तय करती है और जांच करती है कि कौन-कौन से देश इन नियमों का पालन कर रहे हैं। जो देश इन मानकों का पालन नहीं करते, उन्हें FATF ग्रे लिस्ट या ब्लैक लिस्ट में डाल देता है। FATF की रिपोर्टें वैश्विक सुरक्षा के लिए अहम मानी जाती हैं और भारत इसका सक्रिय सदस्य है, जो आतंकवाद को समर्थन देने वाले देशों पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने में इस मंच का उपयोग करता है।
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