UP Flood: डूब गया उत्तर प्रदेश! 17 जिलों में बाढ़ का कहर, अबतक 12 लोगों की मौत

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उत्तर प्रदेश (up flood news) में मानसून की रफ्तार ने बीते कुछ दिनों में तबाही का रूप ले लिया है। राज्य के पूर्वी और मध्य हिस्सों में भारी बारिश और नदियों के जलस्तर में तेज़ी से वृद्धि ने हालात बिगाड़ दिए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 17 जिलों में बाढ़ की गंभीर स्थिति बनी हुई है, जिनमें प्रयागराज, वाराणसी, लखनऊ, अयोध्या और अम्बेडकरनगर प्रमुख हैं। हालात इतने खराब हो गए हैं कि कई ज़िलों में 1 से 12वीं तक के स्कूल बंद कर दिए गए हैं।

पिछले 24 घंटे में बाढ़ और बारिश से 12 लोगों की मौत हो चुकी है। मौसम विभाग ने आने वाले तीन दिनों के लिए भी तेज़ बारिश और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है, जिससे हालात और बिगड़ सकते हैं।

10 हजार से ज्यादा घरों में घुसा पानी
प्रयागराज में गंगा और यमुना दोनों नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। स्थानीय प्रशासन के अनुसार नदियों का पानी खतरे के निशान से एक मीटर ऊपर बह रहा है। इससे शहर के निचले इलाकों में 10 हजार से अधिक मकानों में पानी भर गया है। करीली, बख्शी बाजार, राजापुर और गोविंदपुर जैसे इलाकों से सैकड़ों लोगों को नावों और ट्रैक्टरों के ज़रिए राहत शिविरों तक पहुँचाया गया।

प्रयागराज के जिलाधिकारी संजय खत्री ने बताया कि जिले में 17 राहत शिविर बनाए गए हैं, जहाँ अब तक 6,000 से ज्यादा लोग पहुंचाए जा चुके हैं। प्रशासन ने SDRF और NDRF की टीमें तैनात की हैं, जो राहत और बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं।

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वाराणसी में दर्जनों वार्ड जलमग्न
वाराणसी में हालात दिन पर दिन बिगड़ते जा रहे हैं। वरुणा नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। नगर निगम क्षेत्र के लगभग 60 वार्डों में पानी भर चुका है। रविंद्रपुरी, काली मंदिर, लहरतारा, भेलूपुर और आदमपुर जैसे क्षेत्र सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं।

शहर में बिजली और जल आपूर्ति पर भी असर पड़ा है। कई मोहल्लों में दो-दो दिन से बिजली नहीं है। नगर आयुक्त प्रभु एन. सिंह ने बताया कि वाटर पंप हाउस डूब जाने से सप्लाई बाधित हो रही है। नगर निगम द्वारा कुछ क्षेत्रों में टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा है।

वहीं, राजधानी लखनऊ समेत अयोध्या और अंबेडकरनगर जिलों में प्रशासन ने 1 से 12वीं तक के सभी स्कूलों को बंद रखने का आदेश दिया है। लखनऊ में पिछले तीन दिनों से लगातार बारिश के चलते सड़कों पर भारी जलभराव हो गया है। नाले उफान पर हैं और कई स्थानों पर बच्चे बहते हुए देखे गए, जिनमें से दो की मौत की पुष्टि प्रशासन ने की है।

राहत कार्य में उतरी योगी सरकार की ‘टीम-11’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाढ़ की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए ‘टीम-11’ को सक्रिय मोड में काम पर लगाया है। यह टीम राज्य के सभी प्रभावित जिलों में हालात की निगरानी और राहत कार्यों के लिए जिम्मेदार है। टीम में आपदा प्रबंधन विभाग, स्वास्थ्य, सिंचाई, नगर निगम, बिजली और खाद्य आपूर्ति विभाग शामिल हैं।

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मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी स्थिति में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में खाद्य सामग्री, दवाइयाँ और पेयजल की कमी नहीं होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने हर जिलाधिकारी को राहत शिविरों का व्यक्तिगत रूप से निरीक्षण करने का निर्देश दिया है।

बिजली गिरने से सबसे ज्यादा मौतें
राज्य सरकार के आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ के अनुसार अब तक 12 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इनमें से 6 लोगों की मौत आकाशीय बिजली गिरने से हुई, जबकि 4 लोग बाढ़ में डूबने से मरे और 2 अन्य की मौत दीवार गिरने से हुई। ललितपुर, झांसी, भदोही, कानपुर देहात और गोंडा जैसे जिलों से ये मौतें सामने आई हैं। भदोही में एक ही परिवार के तीन लोग खेत में काम कर रहे थे, तभी बिजली गिर गई, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। झांसी के मऊरानीपुर में एक बुजुर्ग महिला की कच्ची दीवार गिरने से मौत हो गई।

रेलवे ट्रैक धंसे, कई ट्रेनें लेट
भारी बारिश के चलते कानपुर और बांदा के बीच रेलवे ट्रैक धंस गया, जिससे रेल यातायात प्रभावित हुआ है। कई ट्रेनें अपने निर्धारित समय से 2 से 5 घंटे की देरी से चल रही हैं। उत्तर मध्य रेलवे ने कहा है कि आवश्यक मरम्मत कार्य शुरू कर दिया गया है और जल्द सेवा बहाल की जाएगी।

10 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
भारतीय मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि उत्तर प्रदेश के 40 जिलों में अगले 48 घंटों तक बिजली गिरने का खतरा बना रहेगा। वहीं, 10 जिलों में बहुत भारी बारिश की संभावना है, जिनमें सीतापुर, बहराइच, बाराबंकी, सिद्धार्थनगर, गोरखपुर और बलरामपुर प्रमुख हैं। विभाग के निदेशक जेपी गुप्ता के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने लो-प्रेशर सिस्टम के कारण मानसून की रफ्तार तेज़ हुई है और अगले तीन दिनों तक राहत की संभावना नहीं है।

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स्वास्थ्य सेवाएं अलर्ट पर, डेंगू और दस्त का खतरा बढ़ा
जलभराव और गंदगी के कारण कई क्षेत्रों में डायरिया, त्वचा रोग और वायरल बुखार फैलने लगे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल टीमें गांव-गांव भेजनी शुरू कर दी हैं। राहत शिविरों में ORC, क्लोरीन टैबलेट्स और बुखार की दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। जिला अस्पतालों और CHC/PHC को 24 घंटे कार्यरत रखने के निर्देश दिए गए हैं।

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