श्रीमद् भागवत कथा एवं दुर्लभ कथा सत्संग का भव्य आयोजन

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हनुमानगढ़ टाउन के बरकत कॉलोनी स्थित फाटक गौशाला के निर्मला सत्संग भवन में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा एवं दुर्लभ कथा सत्संग का भव्य आयोजन 23 अक्टूबर 2025 से आरंभ होकर 29 अक्टूबर 2025 तक चल रहा है। इस धार्मिक अनुष्ठान में प्रतिदिन भक्तजन बड़ी श्रद्धा और समर्पण के साथ कथा श्रवण करने पहुंच रहे हैं। श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन भक्त प्रह्लाद प्रसंग का बखान किया गया। इसमें कथा व्यास ऋषिकेश के प्रसिद्ध बाल ब्रह्मचारी संत श्री हरिदास जी महाराज ने कहा कि भक्त प्रह्लाद ने माता कयाधु के गर्भ में ही नारायण नाम का मंत्र सुना था। जिसके सुनने मात्र से भक्त प्रह्लाद के कई कष्ट दूर हो गए थे। कथा में उत्तानपाद के वंश में ध्रुव चरित्र की कथा को सुनाते हुए समझाया कि ध्रुव की सौतेली मां सुरुचि के द्वारा अपमानित होने पर भी उसकी मां सुनीति ने धैर्य नहीं खोया जिससे एक बहुत बड़ा संकट टल गया। परिवार को बचाए रखने के लिए धैर्य संयम की नितांत आवश्यकता रहती है। भक्त ध्रुव द्वारा तपस्या कर श्रीहरि को प्रसन्न करने की कथा को सुनाते हुए बताया कि भक्ति के लिए कोई उम्र बाधा नहीं है। भक्ति को बचपन में ही करने की प्रेरणा देनी चाहिए क्योंकि बचपन कच्चे मिट्टी की तरह होता है उसे जैसा चाहे वैसा पात्र बनाया जा सकता है। कथा के दौरान उन्होंने बताया कि पाप के बाद कोई व्यक्ति नरकगामी हो, इसके लिए श्रीमद् भागवत में श्रेष्ठ उपाय प्रायश्चित बताया है। अजामिल उपाख्यान के माध्यम से इस बात को विस्तार से समझाया गया साथ ही प्रह्लाद चरित्र के बारे में विस्तार से सुनाया और बताया कि भगवान नृसिंह रुप में लोहे के खंभे को फाड़कर प्रगट होना बताता है कि प्रह्लाद को विश्वास था कि मेरे भगवान इस लोहे के खंभे में भी है और उस विश्वास को पूर्ण करने के लिए भगवान उसी में से प्रकट हुए एवं हिरण्यकश्यप का वध कर प्रह्लाद के प्राणों की रक्षा की।

इसके उपरांत उन्होंने भगवान श्री कृष्ण की पावन लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि बच्चों को धर्म का ज्ञान बचपन में दिया जाता है, वह जीवन भर उसका ही स्मरण करता है। ऐसे में बच्चों को धर्म व आध्यात्म का ज्ञान दिया जाना चाहिए। माता-पिता की सेवा व प्रेम के साथ समाज में रहने की प्रेरणा ही धर्म का मूल है। अच्छे संस्कारों के कारण ही ध्रुव जी को पांच वर्ष की आयु में भगवान का दर्शन प्राप्त हुआ। इसके साथ ही उन्हें 36 हजार वर्ष तक राज्य भोगने का वरदान प्राप्त हुआ था।इसके साथ ही माता सती कि कथा का वायन करते हएु बताया कि किसी भी स्थान पर बिना निमंत्रण जाने से पहले इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए कि जहां आप जा रहे है वहां आपका, अपने इष्ट या अपने गुरु का अपमान हो। यदि ऐसा होने की आशंका हो तो उस स्थान पर जाना नहीं चाहिए। चाहे वह स्थान अपने जन्म दाता पिता का ही घर क्यों हो। कथा के दौरान सती चरित्र के प्रसंग को सुनाते हुए भगवान शिव की बात को नहीं मानने पर सती के पिता के घर जाने से अपमानित होने के कारण स्वयं को अग्नि में स्वाह होना पड़ा।  उन्होंने कहा कि मनुष्य को जीवन में अच्छे कर्मों का मार्ग अपनाना चाहिए क्योंकि सत्कर्म ही जीवन को सार्थक बनाते हैं। इस दौरान विदुर और मैत्रेयी के मध्य हुए आध्यात्मिक संवाद, ज्ञान और वैराग्य के महत्व तथा सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर ईश्वर भक्ति की ओर अग्रसर होने का संदेश भी भक्तों को दिया गया। फाटक गौशाला के अध्यक्ष मुरलीधर अग्रवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि आज की कथा के यजमान ओम प्रकाश करवा एवं उनकी धर्मपत्नी विमल करवा रहे, जिन्होंने विधि-विधान से पूजा- अर्चना कर कथा का शुभारंभ करवाया। उन्होंने बताया कि कथा प्रतिदिन दोपहर 1:00 बजे से शाम 5:30 बजे तक होती है, जिसके पश्चात भक्ति भाव से आरती सम्पन्न कराई जाती है। इसके साथ ही प्रतिदिन प्रातः 5:00 बजे से 6:30 बजे तक प्रभात फेरी व प्रार्थना का कार्यक्रम भी आयोजित किया जाता है, जिसमें भक्तजन उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं।

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