8 साल से यौन उत्पीड़न का मामला कोर्ट में, फिर कैसे मिला BJP सांसद के बेटे को सरकारी पद

5 अगस्त 2017 की रात चंडीगढ़ की सड़कों पर एक युवती अपनी कार में अकेली थी। आरोप है कि विकास बराला और उनका दोस्त आशीष कुमार लगातार उसका पीछा करते रहे

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हरियाणा सरकार ने एक ऐसा फ़ैसला लिया है, जो न्याय, नैतिकता और राजनीतिक ताकत तीनों पर सवाल खड़े कर रहा है। राज्य के नए सहायक महाधिवक्ता (AAG) बनाए गए हैं विकास बराला (Vikas barala)। ये वही शख्स जिन पर 2017 में एक आईएएस अधिकारी की बेटी ने यौन उत्पीड़न, पीछा करने और अपहरण की कोशिश का आरोप लगाया था।

बता दें, विकास बराला बीजेपी नेता और हरियाणा से राज्यसभा सांसद सुभाष बराला के बेटे हैं। उस समय जब केस दर्ज हुआ था, उनके पिता प्रदेश भाजपा अध्यक्ष थे। इस पूरे मामले में पीड़ित परिवार का बयान आया है-पीड़िता के पिता ने कहा “हमने न्यायपालिका पर पूरा भरोसा किया था, लेकिन 7 साल बीत गए और ट्रायल ठीक से शुरू भी नहीं हुआ। अब आरोपी को इस तरह का संवैधानिक पद मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है।”

क्या है मामला?
5 अगस्त 2017 की रात चंडीगढ़ की सड़कों पर एक युवती अपनी कार में अकेली थी। आरोप है कि विकास बराला और उनका दोस्त आशीष कुमार लगातार उसका पीछा करते रहे, कार रोकने की कोशिश की और कथित तौर पर अगवा करने का प्रयास भी किया।

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इस गंभीर आरोप पर चंडीगढ़ के सेक्टर 26 थाने में एफआईआर दर्ज हुई। भारतीय दंड संहिता की धारा 354D, 341, 365, 511 और नशे में गाड़ी चलाने की धाराएं लगीं। दोनों को गिरफ़्तार भी किया गया, लेकिन कुछ महीनों में जमानत मिल गई। आज 8 साल हो चुके हैं। केस अभी भी कोर्ट में लंबित है।

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सरकार का फैसला और विवाद
18 जुलाई 2025 को खबर आती है कि हरियाणा सरकार ने एक अधिसूचना जारी की, जिसमें 97 वकीलों को एएजी, डिप्टी एडवोकेट जनरल जैसे पदों पर नियुक्त किया गया। उसी सूची में विकास बराला का नाम भी है। ये नियुक्ति तब हुई जब विकास अभी भी जमानत पर हैं और अगली सुनवाई 2 अगस्त को होनी है।

अब यहां सवाल यह है कि क्या कोई ऐसा व्यक्ति, जिस पर यौन उत्पीड़न का गंभीर मुकदमा चल रहा है, उसे राज्य के सर्वोच्च कानूनी पदों में से एक दिया जा सकता है? यह पीड़िता के साथ अन्याय ही नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के साथ खिलवाड़ है?

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