Independence Day: हथियार और आंदोलनों से नहीं, आज़ादी की राह में इन 5 गीतों का है बड़ा योगदान..

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भारत इस साल अपना 79वां स्वतंत्रता दिवस (Indian Independence Day) मना रहा है। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सिर्फ़ हथियार और आंदोलनों ने ही नहीं, बल्कि गीतों और कविताओं ने भी अहम भूमिका निभाई। इन देशभक्ति से भरे गीतों ने लाखों लोगों के दिलों में आज़ादी की लौ जगाई, हिम्मत दी और आंदोलन को एकजुट किया।

इस आर्टिकल में यहां ऐसे ही कुछ गानों की सूची है और उनके बारें में जानकारी जिन्होंने अपनी कलम की धार से भारत की आजादी में अहम योगदान दिया था। आज आप उनके लिखें गाने तो सुनते हैं लेकिन क्या आपको उनके बारें में जानते हैं..यहां पढ़िए..ये गीत सिर्फ़ शब्द या धुन नहीं थे, बल्कि आज़ादी के सपनों को परवान चढ़ाने वाली ताक़त थे, जिन्होंने पूरे देश को एक सुर में बाँध दिया।

वंदे मातरम
भारत का राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ 1880 के दशक में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने संस्कृत और बांग्ला में लिखा था। यह पहली बार 1882 के उनके उपन्यास आनंदमठ में प्रकाशित हुआ। 1896 में रवींद्रनाथ ठाकुर ने इसे कांग्रेस अधिवेशन में गाया, जिसके बाद यह स्वतंत्रता आंदोलन का प्रतीक बन गया। अंग्रेजों ने इसे प्रतिबंधित कर दिया, लेकिन 1950 में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इसे राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया।

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सारे जहां से अच्छा
उर्दू में लिखी गई यह रचना 1904 में मोहम्मद इक़बाल ने लिखी थी। ‘तराना-ए-हिन्द’ नाम से मशहूर यह गीत गांधीजी के भी प्रिय गीतों में था। उन्होंने इसे 1930 के दशक में पुणे की यरवदा जेल में कई बार गाया।

सरफरोशी की तमन्ना
बिस्मिल अज़ीमाबादी द्वारा 1920 में लिखी गई यह कविता क्रांतिकारियों की हुंकार बन गई – “सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है…”। पंडित राम प्रसाद बिस्मिल ने इसे जन-जन तक पहुंचाया और फांसी से पहले भी इसे पढ़ा।

कदम कदम बढ़ाए जा
सुभाष चंद्र बोस और आज़ाद हिंद फौज का यह मार्चिंग सॉन्ग वंशीधर शुक्ल ने लिखा और कैप्टन राम सिंह ने संगीतबद्ध किया। 1942 में तैयार हुए इस गीत को अंग्रेजों ने देशद्रोही बताकर प्रतिबंधित कर दिया था। आज भी यह भारतीय सेना के आयोजनों में बजाया जाता है।

विश्व तिरंगा प्यारा
श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ ने 1924 में यह ‘झंडा गीत’ लिखा – “विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा।” यह पहली बार नेहरू द्वारा आयोजित जलियांवाला बाग़ हत्याकांड की वर्षगांठ पर सार्वजनिक रूप से गाया गया। बाद में कांग्रेस ने इसे अपने ध्वज सलामी समारोह में शामिल किया।

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