भारतीय नर्स निमिषा प्रिया (Nimisha Priya) को कल यानी बुधवार को यमन में मौत की सजा दी जाएगी। निमिषा 2017 से जेल में बंद हैं, उन पर यमन के नागरिक तलाल अब्दो महदी को ड्रग का ओवरडोज देकर हत्या करने का आरोप है। ये केस अब सुर्खियों में है। जहां एक तरह भारत नर्स निमिषा प्रिया के लिए हरसंभव उन्हें बचाने का प्रयास कर रहा है लेकिन अभी तक कोई राहत की खबर नहीं मिली है। जानिए यमन में किस तरह सजा-ए-मौत दी जाती है…
“अगर चाकू से कत्ल किया, तो चाकू से मरो” यमन की अदालतों में ये एक आम न्यायिक सोच है। इस देश में सज़ा सिर्फ कानून से नहीं, बल्कि सामाजिक और धार्मिक परंपराओं से भी तय होती है और जब बात मौत की सज़ा की आती है, तो यमन का सिस्टम न सिर्फ कठोर है, बल्कि दुनिया के सबसे रहस्यमयी और तेज़तर्रार दंड प्रक्रियाओं में से एक माना जाता है।
क्या है यमन का कानूनी सिस्टम?
यमन का कानून इस्लामी शरीया (Sharia Law) पर आधारित है। यहाँ कोई एक समान “दंड संहिता” (Penal Code) नहीं, बल्कि शरीया के साथ-साथ औपनिवेशिक और परंपरागत कानूनों का मेल है। देश की अदालतें Qisas (बदले का कानून), Hudud (ईश्वरीय सजा) और Ta’zir (न्यायाधीश की विवेक से तय सजा) की अवधारणाओं पर काम करती हैं।
किन अपराधों में मिलती है मौत की सज़ा? यमन में मौत की सज़ा सिर्फ हत्या जैसे गंभीर अपराधों तक सीमित नहीं है। इसमें कई ऐसे अपराध शामिल हैं जिन्हें अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन अत्यधिक और क्रूर मानते हैं:
- हत्या (Murder) – Qisas के तहत, पीड़ित के परिवार की मांग पर हत्यारे को वैसी ही मौत दी जा सकती है।
- बलात्कार (Rape) – सज़ा मौत, विशेषकर अगर पीड़िता की मृत्यु हो गई हो।
- व्यभिचार (Adultery) – शादीशुदा व्यक्ति के लिए मौत की सजा (कभी-कभी पत्थर मार कर)।
- धर्म परिवर्तन (Apostasy) – इस्लाम छोड़ने पर मौत की सज़ा दी जा सकती है।
- जादू-टोना या काला जादू (Witchcraft/Sorcery) – शरीया के तहत यह भी मृत्युदंड का अपराध है।
- समलैंगिक संबंध (Homosexuality) – शरीया इसे अपराध मानता है; मौत की सज़ा संभव है।
- राजद्रोह, आतंकवाद, जासूसी – इन मामलों में गोली से मारने या फांसी की सज़ा दी जाती है।
सज़ा कैसे दी जाती है?
यमन में सिर्फ गोली मारकर ही मौत की सजा दी जाती है। हालांकि, यहां पत्थर मारना, फांसी देना और सिर कलम करने का भी प्रावधान है, लेकिन इनका इस्तेमाल नहीं किया जाता है। गोली मारने से पहले दोषी को किसी गलीचे या कंबल पर चेहरा नीचे करके लेटा दिया जाता है। इसके बाद डॉक्टर दोषी की पीठ के ऊपर दिल की जगह पर एक निशान लगाता है और फिर जल्लाद ऑटोमैटिक राइफल से उसकी पीठ में गोलियां मारता है। कुछ मामलों में मृत्युदंड से पहले कोड़े मारने की सजा भी दी जाती है।
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नर्स निमिषा के केस क्या है ब्लड मनी?
निमिषा की जान बचाने के लिए अब ब्लड मनी ही आखिरी उम्मीद है। हालांकि, भारत सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वो निमिषा प्रिया मामले में ज्यादा कुछ नहीं कर सकती है। अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि ने कहा- हम एक हद तक ही जा सकते हैं और हम वहां तक पहुंच चुके हैं।
वहीं, सेव निमिषा प्रिया इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल’ के वकील ने कोर्ट को बताया कि एकमात्र रास्ता यह है कि मृतक का परिवार ‘ब्लड मनी’ (मुआवजा) स्वीकार कर ले।” परिवार को 10 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 8.5 करोड़ रुपए) की पेशकश की गई है, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया है। परिवार ने कहा- यह मामला उनकी इज्जत से जुड़ा हुआ है।
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क्या है निमिषा का केस
1. नौकरी के लिए यमन गईं: 2008 में केरल के पलक्कड़ की 19 वर्षीय नर्स निमिषा प्रिया यमन की राजधानी सना पहुंचीं, जहां उन्हें एक सरकारी अस्पताल में काम मिला।
2. भारत आकर शादी, फिर यमन वापसी: 2011 में वह भारत आईं और कोच्चि निवासी टॉमी थॉमस से शादी की। शादी के बाद दोनों यमन लौटे। टॉमी को वहां एक छोटी नौकरी मिली, लेकिन सैलरी बेहद कम थी।
3. बेटी का जन्म और आर्थिक तंगी: 2012 में निमिषा ने एक बेटी को जन्म दिया, लेकिन आर्थिक मुश्किलें बढ़ती रहीं। 2014 में पति और बेटी भारत लौट गए, जबकि निमिषा यमन में रहकर काम करती रहीं।
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4. क्लिनिक खोलने का फैसला: सरकारी नौकरी छोड़कर उन्होंने खुद का क्लिनिक खोलने की योजना बनाई, लेकिन यमन के कानून के मुताबिक किसी विदेशी को वहां बिज़नेस करने के लिए एक स्थानीय पार्टनर की जरूरत थी।
5. महदी की एंट्री: इसी दौरान उनकी मुलाकात यमन के व्यापारी महदी से हुई, जिसकी पत्नी की डिलीवरी निमिषा ने कराई थी। दोनों ने साझेदारी में क्लिनिक शुरू किया।
6. महदी की धोखाधड़ी: 2015 में भारत यात्रा के दौरान महदी ने निमिषा की शादी की फोटो चुराकर उसे एडिट कर लिया और खुद को उसका पति बताने लगा। इससे यमन के दस्तावेज़ों में उसने पति का दर्जा पा लिया।
7. यमन में फंसीं निमिषा: महदी ने पासपोर्ट छीन लिया, शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न शुरू कर दिया और क्लिनिक का मुनाफा भी हड़पने लगा। पुलिस में शिकायत करने पर उल्टा निमिषा को ही 6 दिन हिरासत में रखा गया क्योंकि दस्तावेज़ों में महदी उसका “पति” दिख रहा था।
8. हत्या और गिरफ्तारी: जुलाई 2017 में पासपोर्ट वापस पाने के लिए निमिषा ने महदी को बेहोश करने की कोशिश की, लेकिन ओवरडोज़ से उसकी मौत हो गई। घबराकर उन्होंने शव के टुकड़े कर वाटर टैंक में फेंक दिए। जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
9. कोर्ट का फैसला: यमन की अदालत ने निमिषा को हत्या का दोषी ठहराया और मौत की सजा सुनाई। 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने माफ़ी की याचिका खारिज कर दी। 30 दिसंबर 2024 को राष्ट्रपति रशद ने भी फांसी की मंजूरी दे दी।




































