-सद्गुरु मधु परमहंस जी ने प्रवचनों में बताया- संसार मरिचिका समान, आत्मा ही है आनंद का सच्चा स्रोत
हनुमानगढ़। मक्कासर स्थित साहिब बन्दगी आश्रम में एक विशेष ऑनलाइन सत्संग का आयोजन किया गया। यह सत्संग जम्मू स्थित रांजड़ी आश्रम से सीधा प्रसारित हुआ, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु जुड़े और सद्गुरु मधु परमहंस जी के दिव्य प्रवचनों का लाभ उठाया। सत्संग के दौरान सद्गुरु साहिब जी ने अपने उपदेशों में समझाया कि प्रत्येक मनुष्य का अपना-अपना संसार है, किंतु वास्तव में यह संसार अस्तित्व में नहीं है। उन्होंने गुरु वशिष्ठ और भगवान श्रीराम के संवाद का उल्लेख करते हुए बताया कि जैसा गुरु वशिष्ठ ने राम जी से कहा था, यह संसार कभी हुआ ही नहीं, यह केवल मन की कल्पना मात्र है। सद्गुरु जी ने कहा कि यह जगत मृगतृष्णा की तरह है। जैसे मरुस्थल में दूर आकाश और धरती मिलते प्रतीत होते हैं, वैसे ही संसार का सुख-दुख भी केवल भ्रांति है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जैसे हिरण मरुस्थल में जल की आकांक्षा करता हुआ दौड़ता है, लेकिन अंत में थककर गिर जाता है, उसी प्रकार मनुष्य भी सांसारिक सुखों की दौड़ में जीवन समाप्त कर देता है, जबकि वास्तविकता में वहां कुछ नहीं होता। यह संसार नींद के सपने की तरह है सपना खत्म होते ही उसका अस्तित्व नहीं रहता।
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