ईरान (Iran Attack ) ने ऑपरेशन फतह-ए-जंग के तहत मिडल ईस्ट के 7 देशों पर हमला किया है। ईरान ने सबसे पहले इजराइल पर अटैक किया। उसके बाद सऊदी, बहरीन, कतर, जॉर्डन, यूएई और कुवैत स्थित अमेरिकी बेस पर अटैक किया। ईरान ने इन देशों के अमेरिकी बेस को तबाह कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने पलटवार करते हुए करीब 400 मिलाइलें दागी हैं।
AFP न्यूज एजेंसी के मुताबिक सऊदी अरब के रियाद में भी विस्फोट हुआ है। खबर ये भी है कि इस जंग में जहां इजरायल अमेरिका का साथ दे रहा है वहीं अब यमन और लेबनान से हिजबुल्लाह भी ईरान के साथ जंग में शामिल हो गए हैं।
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ईरान में इंटरनेट पूरी तरह से बंद
एंगस वॉटसन ने अपनी रिपोर्ट में इंटरनेट निगरानी संस्था नेटब्लॉक्स के हवाले से बताया है कि ईरान में लगभग पूरी तरह इंटरनेट बंद कर दिया गया है। देश में अब सिर्फ 4% इंटरनेट कनेक्शन ही काम कर रहा है।
ईरान ने लोगों से शांति बनाए रखने को कहा
ईरान के गृह मंत्रालय ने कहा है कि दुश्मन ने फिर से देश पर हमला किया है, जबकि बातचीत चल रही थी। मंत्रालय ने सभी प्रांतों के गवर्नरों से कहा है कि वे पहले दी गई हिदायतों को याद रखें, हालात की रिपोर्ट जल्दी भेजें और जनता की जरूरी जरूरतों को पूरा करने के लिए सभी रिसोर्स जुटाएं।
Explosions in Abu Dhabi 📍#Iran #AbuDabi pic.twitter.com/zw6FgizL0F
— SANIA KHAN (@khan_Sania5) February 28, 2026
पूरे मिडल ईस्ट में जंग फैल सकती है
ईरान और इजराइल के बीच दुश्मनी जगजाहिर है, ईरान ने हमेश हमास और हिजबुल्लाह जैसे संगठनों का सहारा लिया। वहीं, इजराइल सीधे तौर पर ईरानी ठिकानों पर हमला करता है। अब अगर ईरान सीधे तौर पर इजराइल को निशाना बनाता है तो सबसे बड़ा खतरा इस बात का है कि पूरे मिडिल ईस्ट में यह जंग फैल जाएगी और इसके नतीजे खतरनाक होंगे। जिसकी शुरूआत हो चुकी है। ईरान ने मीडल ईस्ट में अमेरिकी बेस पर निशाना साधना शुरु कर दिया है। जिसमें 7 देश शामिल है।
मिडल ईस्ट में कितने देश
मिडल ईस्ट के 18 देशों में से 13 देश अरब दुनिया का हिस्सा है. साथ ही इन देशों में सबसे ज्यादा आबादी वाले देश मिस्र , तुर्की और ईरान हैं। मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ती नफरत किसी भी वक्त बड़े युद्ध का रूप ले सकती है। यहां की बढ़ती नफरत की वजह धार्मिक कट्टरवाद, आतंकवाद का साथ और अपने निजी हित हैं। आलम ये है कि मौजूदा समय में मिडल ईस्ट में शामिल 18 देशों में ज्यादातर देश एक दूसरे को नामपसंद करते हैं।

किस देश को किस से नफरत
मिडिल ईस्ट में शामिल 18 देशों में बहरीन, साइप्रस, मिस्र, ईरान, इराक, इजरायल, जोर्डन, कुवैत, लेबनान, उत्तरी साइप्रस, ओमान, फिलिस्तीन, कतर, सऊदी अरब, सीरिया, तुर्की, यूएई, और यमन हैं। मौजूदा परिस्थितियों में इजरायल, ईरान को पसंद नहीं करता है। इराक, सीरिया को नापसंद करता है, सीरिया तुर्की को पंसद नहीं, तुर्की से इजरायल का छत्तीस का आंकड़ा है। फिलिस्तीन भी इजरायल को पसंद नहीं करता है। कुवैत, इराक से नफरत करता है। लेबनान, ओमान और जोर्डन में आतंकवाद की जड़े बड़ी गहरी हैं। इसलिए ये दूसरे देशों के आंखों की किरकिरी बने हुए हैं। यूएई को यदि छोड़ दें तो ये बेहद साफ है कि यहां की आबोहवा में शांति और यहां फैली आपसी नफरत को खत्म करने का कोई जरिया फिलहाल दिखाई नहीं देता है।
मिडल ईस्ट में शामिल इन देशों की नफरत किसी टाइम बम की टिक-टिक करती उस घड़ी की तरह है जो कभी भी अपना समय पूरा करने पर फट सकती है। यही हाल मिडिल ईस्ट का भी है। यह पूरी दुनिया के लिए खतरे की घंटी से कम नहीं है। यदि यहां की लगातार बढ़ रही नफरत को यदि न रोका गया तो यह किसी भी वक्त बड़े युद्ध को न्योता दे सकती है।
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