Thailand-Cambodia War: जानिए क्यों 118 साल पुराने मंदिर के लिए थाईलैंड-कंबोडिया में छिड़ी जंग

इससे पहले, कंबोडिया और थाईलैंड के बीच यह विवाद 16 जुलाई को बढ़ गया, जब थाईलैंड ने दावा किया कि कंबोडिया ने उनकी सीमा पर लैंडमाइंस बिछाईं है।

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थाईलैंड और कंबोडिया (Thailand-Cambodia War) के बीच सीमा विवाद ने सैन्य टकराव का रूप ले लिया है। गुरुवार सुबह दोनों देशों की सेनाओं के बीच गोलीबारी हुई, जिसके बाद थाईलैंड ने कंबोडिया के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले शुरू कर दिए। थाई सेना के मुताबिक इस संघर्ष में अब तक 9 थाई नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि 14 घायल हुए हैं।

तनाव उस वक्त और बढ़ गया जब थाईलैंड ने बॉर्डर पर F-16 फाइटर जेट तैनात कर दिए। संघर्ष का केंद्र थाईलैंड के सुरिन प्रांत और कंबोडिया के ऐतिहासिक प्रसात ता मुएन थॉम मंदिर के आसपास का इलाका बना हुआ है।

कंबोडिया ने आरोप लगाया है कि गोलीबारी की शुरुआत थाई सेना ने की, जबकि थाईलैंड ने दावा किया है कि कंबोडियाई सेना ने पहले ड्रोन भेजा और फिर BM21 रॉकेटों और तोपों से हमला किया।

इससे पहले 23 जुलाई को थाईलैंड ने अपने राजदूत को कंबोडिया से वापस बुला लिया था और कंबोडियाई राजदूत को निष्कासित कर दिया था। दोनों देशों के बीच विवाद की शुरुआत 16 जुलाई को हुई थी, जब थाईलैंड ने आरोप लगाया कि कंबोडिया ने सीमा पर लैंडमाइंस बिछाई थीं, जिससे उसके 4 सैनिक घायल हो गए थे।

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सीमा पर बढ़ा तनाव, गांव खाली करवाए
थाईलैंड के जिला प्रमुख ने बताया कि हमले के बाद सीमा से लगे 86 गांवों से लगभग 40 हजार थाई नागरिकों को भी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। कंबोडिया की राजधानी नोम पेन्ह स्थित रॉयल थाईलैंड दूतावास ने कहा कि सीमा पर स्थिति बिगड़ती जा रही है और झड़पों के लंबे समय तक जारी रहने की संभावना के कारण, दूतावास ने अपने नागरिकों से जितनी जल्दी हो सके कंबोडिया छोड़ने को कहा है।

थाई दूतावास की घोषणा के कुछ ही देर बाद, थाईलैंड की सेना ने कहा कि किसी भी स्थिति से निपटने के लिए उसने सीमा पर एक एफ-16 जेट लड़ाकू विमान तैनात किया है। एक थाई सैन्य अधिकारी ने BBC को बताया कि थाईलैंड कंबोडिया के साथ अपनी सभी सीमाएं बंद कर रहा है।

इससे पहले, कंबोडिया और थाईलैंड के बीच यह विवाद 16 जुलाई को बढ़ गया, जब थाईलैंड ने दावा किया कि कंबोडिया ने उनकी सीमा पर लैंडमाइंस बिछाईं है। थाई प्राधिकारियों ने बताया- कुछ सैनिक उबोन रात्चाथानी और कंबोडिया के प्रीह विहियर प्रांत के बीच विवादित सीमा क्षेत्र के थाई हिस्से में गश्त कर रहें थे। तभी ये कंबोडिया के बिछाए गए लैंडमाइंस की चपेट में आ गए। जिसमें एक सैनिक का पैर कट गया, जबकि तीन घायल हो गए। कंबोडिया ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि सैनिक पुरानी लैंडमाइंस के कारण घायल हुए।

किस मंदिर को लेकर चल रहा है विवाद
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा विवाद का इतिहास 118 साल पुराना है, जो प्रीह विहार मंदिर और आसपास के क्षेत्रों को लेकर है। दोनों देशों के बीच 1907 में 817 किमी की लंबी सीमा खींची गई थी। तब कंबोडिया फ्रांस के अधीन था। थाईलैंड ने हमेशा इसका विरोध किया, क्योंकि नक्शे में प्रीह विहियर नाम का ऐतिहासिक मंदिर कंबोडिया के हिस्से में दिखाया गया था।

इस पर दोनों देशों में विवाद चलता रहा। 1959 में कंबोडिया यह मामला अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में ले गया और 1962 में अदालत ने फैसला दिया कि मंदिर कंबोडिया का है। थाईलैंड ने इसे स्वीकार किया लेकिन आसपास की जमीन को लेकर विवाद जारी रखा।

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2008 में यह विवाद तब और बढ़ गया जब कंबोडिया ने इस मंदिर को यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल कराने की कोशिश की। मंदिर को मान्यता मिलने के बाद दोनों देशों की सेनाओं में फिर झड़पें शुरू हो गईं और 2011 में तो हालात इतने बिगड़ गए कि हजारों लोग अपने घर छोड़ने पर मजबूर हो गए।

2011 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने दोनों देशों को विवादित क्षेत्र से सैनिक हटाने का आदेश दिया, और 2013 में फिर से पुष्टि की कि मंदिर और उसके आसपास का क्षेत्र कंबोडिया का है। लेकिन सीमा का मुद्दा अब तक पूरी तरह हल नहीं हो पाया है और यही वजह है कि आज भी दोनों देशों के बीच तनाव बना रहता है।

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