Donald Trump Tariff: हीरो से जीरो बनें डोनाल्ड ट्रम्प, टैरिफ पर कोर्ट ने दिया बड़ा झटका, पढ़ें पूरा मामला?

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अमेरिका में टैरिफ (Donald Trump Tariff) को लेकर बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा ग्लोबल टैरिफ रद्द किए जाने के कुछ ही घंटों बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दुनिया भर से आने वाले सामान पर 10% का नया वैश्विक टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि वह एक आदेश पर हस्ताक्षर करेंगे, जिसके तहत यह 10% टैरिफ लागू होगा।

इससे पहले शुक्रवार को Supreme Court of the United States ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए ट्रम्प के ग्लोबल टैरिफ को अवैध करार दिया था। अदालत ने कहा कि संविधान के तहत टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार कांग्रेस को है, राष्ट्रपति को नहीं।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा था कि अमेरिका दुनिया के हर देश के साथ युद्ध की स्थिति में नहीं है। नौ जजों की पीठ में से छह ने टैरिफ रद्द करने के पक्ष में फैसला दिया।

जस्टिस सैमुअल एलिटो, क्लेरेंस थॉमस और ब्रेट कैवनॉ ने फैसले से असहमति जताई। कैवनॉ ने अपने अलग नोट में लिखा कि टैरिफ नीति समझदारी भरी है या नहीं, यह अलग प्रश्न है, लेकिन इसे अवैध नहीं माना जाना चाहिए।

कोर्ट के फैसले पर ट्रम्प की कड़ी प्रतिक्रिया
Donald Trump ने फैसले की आलोचना करते हुए इसे बेहद निराशाजनक बताया। उन्होंने कहा कि कुछ जज देशहित में सही निर्णय लेने का साहस नहीं दिखा पा रहे हैं। ट्रम्प ने आरोप लगाया कि कुछ न्यायाधीश अमेरिका को मजबूत बनाने वाली नीतियों का लगातार विरोध करते हैं।

हालांकि, उन्होंने उन तीन कंजरवेटिव जजों की सराहना की जिन्होंने फैसले से असहमति जताई। ट्रम्प का कहना था कि उन्हें टैरिफ लागू करने के लिए संसद की अनुमति की आवश्यकता नहीं है और वे राष्ट्रपति को मिले अधिकारों के तहत यह कदम उठा सकते हैं। भारत के साथ व्यापार समझौते पर उन्होंने कहा कि इस डील में कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना अच्छा मित्र बताया।

सभी टैरिफ समाप्त नहीं हुए
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ट्रम्प प्रशासन के सभी टैरिफ खत्म नहीं हुए हैं। स्टील और एल्युमिनियम पर लगाए गए शुल्क अलग कानूनी प्रावधानों के तहत लागू किए गए थे, इसलिए वे जारी रहेंगे।

हालांकि दो प्रमुख श्रेणियों के टैरिफ निरस्त हुए हैं। पहली श्रेणी ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ की थी, जिसमें चीन पर 34% और अन्य देशों पर 10% बेसलाइन टैरिफ तय किया गया था। दूसरी श्रेणी 25% टैरिफ की थी, जो कनाडा, चीन और मैक्सिको से आने वाले कुछ उत्पादों पर लगाया गया था।

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12 राज्यों ने दी थी कानूनी चुनौती
इन टैरिफ के खिलाफ 12 अमेरिकी राज्यों और कई छोटे व्यापारियों ने अदालत में याचिका दायर की थी। एरिजोना, कोलोराडो, कनेक्टिकट, डेलावेयर, इलिनॉय, मेन, मिनेसोटा, नेवादा, न्यू मेक्सिको, न्यूयॉर्क, ओरेगन और वर्मोंट ने आरोप लगाया था कि राष्ट्रपति ने अपने अधिकारों की सीमा से बाहर जाकर आयात पर टैरिफ लगाए।

अब नए 10% वैश्विक टैरिफ की घोषणा के बाद यह मुद्दा एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि सेक्शन 122 के तहत उठाए गए इस कदम पर अदालतों का क्या रुख रहता है और इसका अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर क्या असर पड़ता है।

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