कौन हैं मुजतबा खामेनेई? अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद बनें ईरान के अगले सुप्रीम लीडर

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ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद देश में नेतृत्व को आगे बढ़ाने के लिए अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) को देश का नया सर्वोच्च नेता चुन लिया गया है। ये ही नहीं नए कमांडर-इन-चीफ के नाम का भी ऐलान कर दिया है।

अहमद वाहिदी को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्म्स (IRGC) की नई जिम्मेदारी सौंप दी गई है। 31 दिसंबर 2025 को वाहिदी को डिप्टी कमांडर-इन-चीफ नियुक्त किया गया था। फिलहाल ईरान में नई नेतृत्व प्रक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हैं, क्योंकि इसका असर न सिर्फ देश पर, बल्कि पूरे मध्य पूर्व की राजनीति पर पड़ सकता है।

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पहले ही उनके मारे जाने का दावा किया था। उन्होंने कहा कि यह ईरान के लोगों के लिए अपने देश को वापस लेने का मौका है। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि शीर्ष नेताओं की मौत के बाद भी तुरंत सत्ता परिवर्तन तय नहीं होता।

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कौन हैं मुजतबा खामेनेई? मुजतबा खामेनेई, अली खामेनेई के दूसरे बेटे हैं। वे एक मिड-लेवल धर्मगुरु हैं और लंबे समय से उनके संभावित उत्तराधिकारी माने जाते रहे हैं।

  • उनका ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) से करीबी संबंध बताया जाता है।
  • ईरान-इराक युद्ध के दौरान वे सेना में रहे थे।
  • कहा जाता है कि वे पर्दे के पीछे काफी प्रभाव रखते थे और अपने पिता के दफ्तर के कामकाज में अहम भूमिका निभाते थे।

हालांकि, न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, खामेनेई ने पिछले साल तीन वरिष्ठ धर्मगुरुओं को संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर चुना था। इस सूची में मुजतबा का नाम शामिल नहीं बताया गया।

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला की मौत के बाद हमले तेज
ईरान ने खामेनेई की मौत के बाद हमले और ज्यादा तेज कर दिए हैं। कतर में 11 जगहों पर धमाके हुए हैं। दोहा से लेकर दुबई तक कई जगहों पर धमाके हुए हैं। ईरान ने इजरायल पर फिर से हमला किया है। पूरे इजरायल में सायरन बज रहे हैं। ईलाट में ड्रोन दिखाई दिया।

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जानिए कौन थे ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई

  • अयातुल्ला अली खामेनेई का जन्म 19 अप्रैल 1939 को ईरान के धार्मिक शहर मशहद में एक मौलवी परिवार में हुआ था। वे खोमैनी शाह की नीतियों के खिलाफ थे और इस्लामी शासन की वकालत करते थे।
  • 1963 में शाह के खिलाफ भाषण देने पर उन्हें गिरफ्तार भी किया गया। धीरे-धीरे वे सरकार विरोधी आंदोलन का बड़ा चेहरा बन गए और खोमैनी के भरोसेमंद सहयोगी माने जाने लगे।
  • 1979 में ईरान में इस्लामी क्रांति हुई और शाह की सरकार गिर गई। खोमैनी देश लौटे और नई इस्लामी सरकार बनाई। खामेनेई को क्रांतिकारी परिषद में जगह मिली और बाद में उप रक्षामंत्री बनाया गया।
  • 1981 में तेहरान की एक मस्जिद में भाषण के दौरान खामेनेई पर बम हमला हुआ। उसी साल एक और बम धमाके में तत्कालीन राष्ट्रपति की मौत हो गई। इसके बाद हुए चुनाव में खामेनेई भारी बहुमत से जीतकर ईरान के तीसरे राष्ट्रपति बने।
  • 1989 में खोमैनी के निधन के बाद खामेनेई को देश का सर्वोच्च नेता यानी ‘रहबर’ बनाया गया। इसके लिए संविधान में बदलाव भी किया गया। समर्थक उन्हें इस्लामी व्यवस्था का मजबूत रक्षक मानते हैं, जबकि आलोचक उन पर सख्त और कट्टर शासन चलाने का आरोप लगाते हैं।

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