– अंगद-रावण संवाद ने बांधा समां, मन्नत पूरी होने पर 2038 तक बुक हुई हनुमान जी की पोशाक
हनुमानगढ़। स्थानीय टाउन स्थित नगरपरिषद रंगमंच पर श्री रामलीला समिति के तत्वावधान में आयोजित ऐतिहासिक रामलीला के 12वें दिन शनिवार रात भक्ति, श्रद्धा और रोमांच का अनूठा संगम देखने को मिला। पिछले 66 वर्षों से निरंतर आयोजित हो रही बीकानेर संभाग की इस प्रतिष्ठित रामलीला में मुख्य आकर्षण दक्षिण मुखी बालाजी की भव्य झांकी और अंगद-रावण संवाद का मंचन रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ दक्षिण मुखी बालाजी की मनोहारी झांकी के साथ हुआ। श्री सुंदरकांड मित्र मंडल के पदाधिकारियों ने श्रद्धापूर्वक हनुमान चालीसा का पाठ किया, बालाजी महाराज को तिलक लगाया और महाआरती कर मंचन की शुरुआत की। इसके बाद युद्ध की पृष्ठभूमि तैयार हुई। प्रभु श्रीराम ने युद्ध टालने के उद्देश्य से युवराज अंगद को शांति दूत बनाकर लंकापति रावण की सभा में भेजा। रावण के दरबार में अंगद ने मर्यादा और दृढ़ता के साथ शांति प्रस्ताव रखा, जिसे अहंकारी रावण ने ठुकरा दिया। इसके पश्चात अंगद और रावण के बीच हुए तीखे वाकयुद्ध ने दर्शकों में जोश भर दिया। अपनी शक्ति का परिचय देते हुए जब अंगद ने रावण के दरबार में अपना पैर जमाया, तो मेघनाद सहित लंका का कोई भी बलशाली योद्धा उसे हिला तक नहीं सका। कलाकारों के ओजस्वी अभिनय और संवाद अदायगी पर पूरा पंडाल ‘जय श्री राम’ के जयकारों से गूंज उठा।
समिति के अध्यक्ष अर्चित अग्रवाल ने बताया कि यह मंचन पूर्णतः मर्यादित और शास्त्रसम्मत ढंग से होता है। इसमें मंझे हुए कलाकार भाग ले रहे हैं। वर्ष 1965 से निरंतर अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे वयोवृद्ध कलाकार तिलक राज सुधाकर आज भी पूरे उत्साह से सेवाएं दे रहे हैं। यह मंचन निर्देशक प्रेम रतन पारीक, उप निर्देशक बहादुर सिंह चौहान और अशोक मिड्ढा के कुशल निर्देशन में संपन्न हो रहा है।
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